
चेन्नई। दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य तमिलनाडु में सार्वजनिक परिवहन और तिपहिया वाहनों से यात्रा करने वाले लाखों आम नागरिकों को महंगाई का बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने करीब 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ऑटो-रिक्शा के किराए में ऐतिहासिक संशोधन करते हुए न्यूनतम किराए को सीधे दोगुना कर दिया है। गृह (परिवहन-I) विभाग द्वारा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 67 के तहत जारी आधिकारिक अधिसूचना (G.O. Ms. No. 366) के मुताबिक, अब राज्य भर में ऑटो-रिक्शा का न्यूनतम किराया ₹25 से बढ़ाकर ₹50 तय कर दिया गया है। नया किराया चेन्नई मेट्रोपॉलिटन एरिया समेत राज्य के सभी जिलों में चलने वाले सभी अनुबंधित कैरिज ऑटो रिक्शा पर तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है।
तमिलनाडु सरकार ने इससे पहले अगस्त 2013 में ऑटो-रिक्शा का किराया तय किया था, जिसके तहत पहले 1.8 किलोमीटर के लिए ₹25 न्यूनतम किराया और उसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए ₹12 की दर लागू थी। पिछले एक दशक से अधिक समय में पेट्रोल, सीएनजी, ऑटो पार्ट्स, मेंटेनेंस और जीवनयापन की लागत में आई भारी वृद्धि के चलते ऑटो यूनियनों द्वारा लगातार किराया बढ़ाने की मांग की जा रही थी। अब जारी नए आदेश के अनुसार, शुरुआती 1.8 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए यात्रियों को ₹50 चुकाने होंगे। इस शुरुआती दूरी के बाद प्रति किलोमीटर की दर को ₹12 से बढ़ाकर सीधे ₹25 प्रति किलोमीटर कर दिया गया है।
दैनिक आवागमन के अलावा देर रात यात्रा करने वालों और बीच रास्ते में रुकने वाले यात्रियों के लिए भी नए नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं:
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नाइट चार्ज (Night Fare): रात 10:00 बजे से लेकर सुबह 05:00 बजे के बीच ऑटो से यात्रा करने पर कुल सामान्य किराए का 1.5 गुना (50% अतिरिक्त शुल्क) देना होगा। यानी रात के समय न्यूनतम किराया और प्रति किलोमीटर का खर्च काफी बढ़ जाएगा।
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वेटिंग चार्ज (Waiting Fee): यदि यात्रा के दौरान यात्री किसी दुकान, बाजार या बैंक के बाहर ऑटो को रुकवाता है, तो इसके लिए सरकार ने ₹1 प्रति मिनट का वेटिंग चार्ज निर्धारित किया है।
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डिजिटल व सामान्य मीटर कैलिब्रेशन: परिवहन विभाग ने सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (RTOs) को निर्देश दिए हैं कि सभी ऑटो-रिक्शा के इलेक्ट्रॉनिक फेयर मीटरों को निर्धारित समयसीमा के भीतर नए रेट्स के अनुसार पुनः कैलिब्रेट (Recalibrate) कराया जाए ताकि यात्रियों से ओवरचार्जिंग की शिकायतें न आएं।
ऊटी (नीलगिरि), कोडाइकनाल, येरकौड और वालपारई जैसे पर्वतीय पर्यटन स्थलों (Ghat Roads) में चलने वाले ऑटो-रिक्शा के लिए ईंधन की अधिक खपत और दुर्गम रास्तों को देखते हुए विशेष दरें अधिसूचित की गई हैं:
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पहाड़ी क्षेत्रों में पहले 1.8 किलोमीटर के लिए बेस फेयर ₹60 तय किया गया है।
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इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए यात्रियों को ₹30 प्रति किलोमीटर का भुगतान करना होगा।
| यात्रा का प्रकार / श्रेणी | पुराना किराया (अगस्त 2013 से लागू) | नया संशोधित किराया (अक्टूबर 2026) | बदलाव का प्रतिशत / अंतर |
| न्यूनतम किराया (First 1.8 KM) | ₹25 | ₹50 | 100% की सीधी बढ़ोतरी (दोगुना) |
| प्रति किलोमीटर दर (1.8 KM के बाद) | ₹12 / किमी | ₹25 / किमी | ₹13 प्रति किमी की वृद्धि |
| नाइट चार्ज (10 PM से 5 AM) | 50% अतिरिक्त (रात 11 बजे से) | 1.5 गुना (रात 10 बजे से सुबह 5 बजे) | समय दायरा बढ़ा, डेढ़ गुना भुगतान |
| वेटिंग चार्ज | ₹3.50 प्रति 5 मिनट | ₹1 प्रति मिनट | समय के आधार पर सीधा कैलकुलेशन |
| पहाड़ी क्षेत्र (Ghat Roads) बेस फेयर | सामान्य दर से थोड़ा अधिक | ₹60 (शुरुआती 1.8 KM), ₹30/किमी बाद में | पर्यटन स्थलों के लिए अलग स्लॉट |
13 साल बाद लिए गए इस फैसले का जहां चेन्नई, मदुरै, कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली और सलेम के ऑटो चालकों ने स्वागत किया है और इसे राहत भरा कदम बताया है, वहीं आम मध्यमवर्गीय यात्रियों, छात्रों और बुजुर्गों के लिए दैनिक आवागमन का खर्च बढ़ गया है। उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि किराए में बढ़ोतरी के साथ-साथ प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ऑटो चालक राइड शेयरिंग ऐप्स (जैसे Ola, Uber, Rapido) के मुकाबले मीटर से चलने में आनाकानी न करें और तय सरकारी दरों का ही पालन करें। परिवहन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मीटर का उपयोग न करने या तय शुल्क से अधिक मांगने वाले चालकों के खिलाफ परमिट रद्दीकरण और भारी चालान की कार्रवाई की जाएगी।
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