
यदि आप अपनी गाढ़ी कमाई को बिना किसी बाजार जोखिम के निवेश करना चाहते हैं और हर 6 महीने में एक तय और गारंटीड नियमित आय (Regular Passive Income) की तलाश में हैं, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित ‘फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स’ (Floating Rate Savings Bonds – FRSB) आपके लिए सबसे मुफीद वित्तीय विकल्प बनकर उभरे हैं। वर्तमान में बैंकों की अधिकांश सामान्य फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) योजनाएं जहां 6.5% से 7.25% के आसपास ब्याज दरें ऑफर कर रही हैं, वहीं आरबीआई के इस सरकारी बॉन्ड पर निवेशकों को 8.05% प्रति वर्ष की आकर्षक ब्याज दर मिल रही है। इस योजना की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें आपका पैसा सीधे भारत सरकार की संप्रभु गारंटी (Sovereign Guarantee) के तहत सुरक्षित रहता है, यानी डिफ़ॉल्ट या पूंजी डूबने का जोखिम शून्य प्रतिशत होता है।
आरबीआई फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स के तहत मिलने वाले ब्याज का भुगतान साल में दो बार यानी हर 6 महीने के अंतराल पर सीधे निवेशक के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप से ट्रांसफर किया जाता है। इसके ब्याज भुगतान की तारीखें हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को तय होती हैं।
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ब्याज दर का गणित: योजना में वर्तमान ब्याज दर 8.05% वार्षिक है। चूंकि ब्याज का भुगतान अर्धवार्षिक (Half-Yearly) आधार पर होता है, इसलिए 6 महीने की ब्याज दर 4.025% (8.05% / 2) बनती है।
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₹1,00,000 के निवेश पर गणना: जब आप ₹1 लाख का निवेश करते हैं, तो ₹1,00,000 का 4.025% सीधे ₹4,025 बनता है।
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सालाना और 7 साल का रिटर्न: इसका मतलब है कि आपको हर साल ₹8,050 का निश्चित ब्याज मिलेगा। इस बॉन्ड की कुल परिपक्वता अवधि (Tenure) 7 वर्ष होती है। 7 वर्षों के दौरान आपको कुल 14 बार अर्धवार्षिक ब्याज का भुगतान मिलेगा, जिससे कुल अर्जित ब्याज ₹56,350 हो जाएगा। 7 वर्ष पूरे होने पर आपका ₹1 लाख का मूलधन (Principal) भी शत-प्रतिशत वापस मिल जाएगा।
आरबीआई के इस बॉन्ड में आप न्यूनतम ₹1,000 से निवेश शुरू कर सकते हैं और इसमें अधिकतम निवेश की कोई सीमा (No Maximum Limit) तय नहीं की गई है। नीचे दी गई तालिका से समझें कि अलग-अलग निवेश राशि पर आपको 6 महीने में कितना ब्याज मिलेगा:
| कुल निवेश राशि (Deposit Amount) | छमाही ब्याज (Every 6 Months at 4.025%) | सालाना कुल ब्याज (Annual Payout) | 7 साल में कुल अर्जित ब्याज (Total Interest) | 7 साल बाद कुल रिटर्न (Principal + Interest) |
| ₹1,00,000 (1 लाख) | ₹4,025 | ₹8,050 | ₹56,350 | ₹1,56,350 |
| ₹2,00,000 (2 लाख) | ₹8,050 | ₹16,100 | ₹1,12,700 | ₹3,12,700 |
| ₹5,00,000 (5 लाख) | ₹20,125 | ₹40,250 | ₹2,81,750 | ₹7,81,750 |
| ₹10,00,000 (10 लाख) | ₹40,250 | ₹80,500 | ₹5,63,500 | ₹15,63,500 |
| ₹25,00,000 (25 लाख) | ₹1,00,625 | ₹2,01,250 | ₹14,08,750 | ₹39,08,750 |
| ₹50,00,000 (50 लाख) | ₹2,01,250 | ₹4,02,500 | ₹28,17,500 | ₹78,17,500 |
तालिका से साफ है कि यदि कोई वरिष्ठ नागरिक या निवेशक ₹10 लाख की एकमुश्त पूंजी लगाता है, तो उसे हर छह महीने में घर बैठे ₹40,250 की निश्चित पेंशन जैसी आमदनी प्राप्त होती रहेगी।
इस बॉन्ड के नाम में ‘फ्लोटिंग’ शब्द इसलिए जुड़ा है क्योंकि इसकी ब्याज दर पूरी 7 साल की अवधि के लिए फिक्स (स्थिर) नहीं रहती, बल्कि समय-समय पर सरकार द्वारा संशोधित होती है।
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राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) से सीधा लिंक: भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के फॉर्मूले के अनुसार, इस बॉन्ड की ब्याज दर को पोस्ट ऑफिस की लोकप्रिय स्कीम ‘नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट’ (NSC) की दर से जोड़ा गया है।
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NSC से 0.35% अधिक ब्याज का नियम: आरबीआई एफआरएसबी की ब्याज दर हमेशा एनएससी की मौजूदा दर से +0.35% (35 बेसिस प्वाइंट्स) अधिक रखी जाती है।
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वर्तमान में एनएससी पर 7.70% की ब्याज दर लागू है। इसी आधार पर 7.70% + 0.35% जोड़कर एफआरएसबी बॉन्ड की ब्याज दर 8.05% तय की गई है। सरकार हर 6 महीने (1 जनवरी और 1 जुलाई) में लघु बचत योजनाओं की समीक्षा करती है; यदि भविष्य में एनएससी की दर बढ़ती है, तो इस बॉन्ड का ब्याज भी स्वतः बढ़ जाएगा।
आरबीआई फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स की सामान्य परिपक्वता अवधि 7 वर्ष होती है। सामान्य निवेशकों (60 वर्ष से कम आयु) के लिए इसमें 7 साल से पहले निकासी की अनुमति नहीं होती है। हालांकि, बुजुर्गों और रिटायर्ड नागरिकों की आपातकालीन वित्तीय जरूरतों का सम्मान करते हुए सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को समय पूर्व निकासी (Premature Redemption) की विशेष छूट प्रदान की है:
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60 से 70 वर्ष के निवेशक: निवेश की तारीख से 6 वर्ष पूरे होने के बाद किसी भी समय अपना पैसा निकाल सकते हैं।
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70 से 80 वर्ष के निवेशक: 5 वर्ष पूरे होने के बाद प्री-मैच्योर विड्रॉल की सुविधा मिलती है।
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80 वर्ष से अधिक (सुपर सीनियर सिटीजन): केवल 4 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद अपने बॉन्ड्स को भुना सकते हैं।
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टैक्स स्लैब के अनुसार कर: इस बॉन्ड से अर्जित होने वाला ब्याज पूरी तरह कर-योग्य (Taxable) होता है। इसे निवेशक की वार्षिक आय में ‘अन्य स्रोतों से आय’ (Income from Other Sources) के तहत जोड़ा जाता है और संबंधित इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लागू होता है।
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टीडीएस (TDS) कटौती: यदि एक वित्तीय वर्ष में अर्जित ब्याज ₹10,000 (वरिष्ठ नागरिकों के मामले में ₹50,000) से अधिक होता है, तो बैंक नियमानुसार टीडीएस काटते हैं। कर छूट के दायरे में आने वाले निवेशक फॉर्म 15G या 15H जमा कर टीडीएस से बच सकते हैं।
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ट्रेडिंग और ट्रांसफर: इन बॉन्ड्स को शेयर बाजार या सेकेंडरी मार्केट में बेचा या खरीदा नहीं जा सकता और न ही इनके बदले बैंक से कोई लोन (Collateral/Pledge) लिया जा सकता है। यह केवल एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को नॉमिनेशन या मृत्यु की स्थिति में ही ट्रांसफर हो सकते हैं।
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कौन कर सकता है निवेश: भारत का कोई भी एकल नागरिक, संयुक्त रूप से दो वयस्क, या नाबालिग की ओर से अभिभावक इसमें निवेश कर सकते हैं। हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) भी इसके लिए पात्र हैं, जबकि अनिवासी भारतीय (NRIs) इसमें नया निवेश नहीं कर सकते।
आरबीआई फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड में निवेश करने के दो बेहद सरल और सुरक्षित माध्यम उपलब्ध हैं:
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आरबीआई रिटेल डायरेक्ट (RBI Retail Direct Portal): आप बिना किसी बिचौलिए या कमीशन के सीधे आरबीआई के आधिकारिक पोर्टल rbiretaildirect.org.in पर जाकर अपना ‘रिटेल डायरेक्ट गिल्ट (RDG) अकाउंट’ ऑनलाइन खोल सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और नेट बैंकिंग/यूपीआई की आवश्यकता होती है। पोर्टल पर लॉगिन करके आप सीधे सरकारी बॉन्ड खरीद सकते हैं।
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अधिकृत बैंक शाखाएं: यदि आप ऑफलाइन निवेश करना चाहते हैं, तो देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा या प्रमुख निजी बैंकों (HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank) की किसी भी नजदीकी शाखा में जाकर फॉर्म भरकर चेक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। सफल आवंटन के बाद आपके नाम पर इलेक्ट्रॉनिक रूप में ‘बॉन्ड लेजर अकाउंट’ (BLA Certificate) जारी कर दिया जाता है।
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