
नई दिल्ली/विशेष संवाददाता। भारतीय रेल से सामान, भारी पार्सल या व्यावसायिक माल भेजने वाले आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों और ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। रेलवे प्रशासन ने अपनी पारंपरिक पार्सल व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए ‘डोर-टू-डोर पार्सल डिलीवरी सर्विस’ (Door-to-Door Parcel Service) को व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। अब तक किसी भी सामान को ट्रेन के जरिए भेजने के लिए लोगों को भारी सामान लादकर रेलवे स्टेशन के पार्सल घर तक ले जाना पड़ता था, जहां लंबी कतारों, वजन तौलने की प्रक्रिया और कागजी लिखा-पढ़ी में घंटों बर्बाद होते थे। इसके अलावा, गंतव्य स्टेशन पर सामान पहुंचने के बाद रिसीवर को भी स्टेशन जाकर पार्सल छुड़ाने की मशक्कत करनी पड़ती थी। रेलवे की इस नई पहल के बाद स्टेशन के चक्कर काटने की यह सारी झंझट हमेशा के लिए खत्म होने जा रही है।
इस महत्वाकांक्षी सेवा को धरातल पर उतारने के लिए भारतीय रेल ने ‘भारतीय डाक विभाग’ (India Post) के साथ हाथ मिलाया है। इस एकीकृत मॉडल को ‘जॉइंट पार्सल प्रोडक्ट’ (Joint Parcel Product – JPP) नाम दिया गया है।
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फर्स्ट माइल और लास्ट माइल कनेक्टिविटी डाक विभाग के पास: आपके घर या गोदाम से सामान उठाने (First Mile Pickup) और गंतव्य पर प्राप्तकर्ता के दरवाजे तक सामान पहुंचाने (Last Mile Delivery) का जिम्मा डाक विभाग के विशाल और भरोसेमंद नेटवर्क का होगा।
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लंबी दूरी का तीव्र परिवहन रेलवे के जिम्मे: एक शहर से दूसरे शहर तक सामान को तेज गति, सुरक्षित माहौल और न्यूनतम लागत में पहुंचाने का काम भारतीय रेलवे की एक्सप्रेस और सुपरफास्ट पार्सल ट्रेनों द्वारा किया जाएगा। इस तरह दोनों सरकारी उपक्रमों की ताकत मिलकर एक हाई-टेक लॉजिस्टिक्स समाधान पेश कर रही हैं।
रेलवे की इस आधुनिक सेवा को पूरी तरह से डिजिटल और उपभोक्ता-अनुकूल बनाया गया है। अब कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप से घर बैठे कुछ ही क्लिक में पार्सल बुक कर सकेगा:
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ऑनलाइन रिक्वेस्ट और स्लॉट चयन: ग्राहक रेलवे या डाक विभाग के आधिकारिक पोर्टल/ऐप पर जाकर पार्सल का वजन, आकार, पिकअप पता और डिलीवरी एड्रेस दर्ज करके पिकअप का समय तय करेगा।
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घर पर वजन और बारकोडिंग: तय समय पर डाकिया या लॉजिस्टिक्स प्रतिनिधि डिजिटल वेइंग मशीन के साथ आपके घर पहुंचेगा, सामान का वजन करेगा, डिजिटल रसीद देगा और पार्सल पर एक सुरक्षित बारकोड/क्यूआर कोड चस्पा करेगा।
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रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग: बुकिंग होते ही ग्राहक के मोबाइल पर ट्रैकिंग आईडी आ जाएगी। इसके जरिए ग्राहक हर पल देख सकेगा कि उसका सामान किस ट्रेन में लोड हुआ है, वह किस स्टेशन पर पहुंचा है और कब डिलीवरी के लिए बाहर निकला है।
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ओटीपी आधारित सुरक्षित डिलीवरी: गंतव्य पर सामान की डिलीवरी प्राप्तकर्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए वन टाइम पासवर्ड (OTP) के सत्यापन के बाद ही की जाएगी, जिससे सामान के खोने या गलत हाथों में जाने की आशंका शून्य हो जाती है।
वर्तमान समय में निजी कूरियर और लॉजिस्टिक्स कंपनियां घर से सामान उठाने और पहुंचाने के लिए भारी-भरकम चार्ज वसूलती हैं। खासकर जब सामान 15 से 50 किलोग्राम या उससे अधिक वजन का हो, तो कूरियर का खर्च आम आदमी के बजट से बाहर हो जाता है। रेलवे और डाक विभाग की यह संयुक्त सेवा निजी कंपनियों की तुलना में बेहद किफायती और पारदर्शी दरों पर उपलब्ध होगी। इसमें छोटे 5 किलो के डिब्बे से लेकर भारी-भरकम घरेलू सामान, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, कपड़े, किताबें, मशीनरी पार्ट्स और यहां तक कि दोपहिया वाहन के कलपुर्जे भी आसानी से भेजे जा सकेंगे। रेलवे के विशाल नेटवर्क के कारण दूरदराज के कस्बों और पूर्वोत्तर राज्यों तक भी सामान की डिलीवरी सबसे कम समय में संभव होगी।
डोर-टू-डोर पार्सल सेवा का सबसे बड़ा फायदा देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), हस्तशिल्प कारीगरों और मौसमी फल-सब्जी उत्पादकों को मिलने वाला है। अब लखनऊ की चिकनकारी के सूट हों, बनारस की साड़ियां, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन या फिर कश्मीर के सेब—कारीगरों और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए किसी बिचौलिए या ट्रांसपोर्ट नगर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वे सीधे अपने घर या कारखाने से माल लोड कराकर देश के किसी भी कोने में बैठे ग्राहक तक सीधे पहुंचा सकेंगे।
रेलवे बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट के सफल परीक्षणों के बाद अब इस सेवा को देश के सभी प्रमुख टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों में तेजी से विस्तारित किया जा रहा है। यह कदम भारतीय रेल को आधुनिक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) का सबसे मजबूत और आधुनिक स्तंभ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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