
भारतीय सिनेमा जगत और साउथ के सुपरस्टार प्रभास (Prabhas) की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक ‘फौजी’ (Fauzi Movie) को लेकर इस वक्त एक बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अभिनेता प्रभास के जन्मदिन के खास मौके पर यानी 23 अक्टूबर को मेकर्स द्वारा इस फिल्म का पहला टीजर रिलीज किया गया था। इस टीजर के सामने आने के बाद से ही यह फिल्म सिनेप्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गई थी, लेकिन अब यह फिल्म अपनी कहानी और ऐतिहासिक तथ्यों के गलत चित्रण के कारण भारी कानूनी और राजनीतिक मुश्किलों में फंसती नजर आ रही है। देश के महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose) के पोते और पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष चंद्र कुमार बोस ने इस टीजर पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सीधे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) को एक पत्र लिखा है। उन्होंने फिल्म के मेकर्स पर इतिहास से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए टीजर को तुरंत सोशल मीडिया से हटाने और मेकर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस पूरे विवाद की असल वजह क्या है और चंद्र कुमार बोस ने अपने पत्र में क्या गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रभास की फिल्म ‘फौजी’ के टीजर में नेताजी के चित्रण पर गरमाई राजनीति
हाल ही में रिलीज किए गए प्रभास की फिल्म ‘फौजी’ के टीजर ने जहां एक तरफ फैंस के बीच उत्सुकता बढ़ाई थी, वहीं दूसरी तरफ इसने एक नए विवाद को भी जन्म दे दिया है। फिल्म के इस टीजर में यह दिखाया गया है कि महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रभास के एक काल्पनिक किरदार का परिचय देते हुए नजर आ रहे हैं और भगवद्गीता के विभिन्न श्लोकों व कोड्स के बारे में बातचीत कर रहे हैं।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार के सदस्यों और उनके अनुयायियों को यह प्रस्तुति बिल्कुल रास नहीं आई है। नेताजी के ग्रैंड नेफ्यू चंद्र कुमार बोस ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि देश के सबसे बड़े राष्ट्र नायकों में से एक नेताजी के व्यक्तित्व और उनके राजनीतिक इतिहास को फिल्मों में इस तरह से काल्पनिक कथाओं के साथ तोड़-मरोड़कर पेश करना सरासर गलत है। उनका मानना है कि ऐसा करने से न केवल महान ऐतिहासिक शख्सियत की गरिमा प्रभावित होती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के सामने गलत संदेश भी जाता है।
चंद्र कुमार बोस ने I&B मिनिस्टर को लिखा पत्र, सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
इस गंभीर मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए चंद्र कुमार बोस ने मंगलवार को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को लिखे गए खत को सार्वजनिक किया। उन्होंने अपने इस पत्र में सीधे तौर पर देश के सूचना एवं प्रसारण मंत्री को टैग करते हुए इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
अपने खत में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए चंद्र कुमार बोस ने लिखा, “हमें यह बात बिल्कुल समझ नहीं आ रही है कि सेंसर बोर्ड ने इस तरह के आपत्तिजनक और भ्रामक कंटेंट को पास कैसे कर दिया। हम फिल्म में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को इस तरह के काल्पनिक और संदर्भहीन रूप में दर्शाने का कड़ा विरोध करते हैं।” उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जानी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि यह आपत्तिजनक टीजर सभी प्लेटफार्मों से तुरंत प्रभाव से हटा दिया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने सेंसर बोर्ड के उन जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की है जिन्होंने इस टीजर को रिलीज करने की अनुमति दी थी।
‘टीजर को हटाकर सुधारा जाए इतिहास’, पीएम मोदी को भी किया गया टैग
इस पूरे विवाद के बीच चंद्र कुमार बोस ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में टैग किया है और उनसे इस मामले में संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने अपनी मांग को दोहराते हुए कहा कि ‘फौजी’ फिल्म के इस टीजर को अभी के अभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से हटाया जाना चाहिए और यदि मेकर्स इसे दोबारा रिलीज करना चाहते हैं, तो इसमें ऐतिहासिक तथ्यों के अनुकूल सुधार किया जाना चाहिए।
चंद्र कुमार बोस का कहना है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी चिंताओं का समाधान किए बिना इस फिल्म को आगे नहीं बढ़ने देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे प्रभास और फिल्म ‘फौजी’ की पूरी टीम के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं, लेकिन रचनात्मक स्वतंत्रता (Creative Freedom) के नाम पर देश के स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। उन्होंने उम्मीद जताई है कि फिल्म के निर्देशक हनु राघवपुडी (Hanu Raghavapudi) इस पूरे मामले की गंभीरता को समझेंगे और उचित कदम उठाएंगे।
इतिहास से छेड़छाड़ बनाम सिनेमाई स्वतंत्रता: क्या होगी मेकर्स की अगली प्रतिक्रिया
भारतीय सिनेमा में ऐतिहासिक और राजनीतिक हस्तियों पर फिल्में बनने का दौर पुराना है, लेकिन कई बार कल्पना और तथ्यों के मेल के चक्कर में मेकर्स विवादों के घेरे में आ जाते हैं। ‘फौजी’ फिल्म के मामले में भी यही देखने को मिल रहा है, जहां निर्देशक ने एक काल्पनिक कहानी के भीतर नेताजी के किरदार को शामिल करने का जोखिम उठाया है।
अब जबकि देश के एक प्रतिष्ठित परिवार के सदस्य और नेताजी के पोते ने इस पर आधिकारिक रूप से आपत्ति जताते हुए मंत्रालय का दरवाजा खटखटा लिया है, तो फिल्म के निर्माताओं और प्रभास की टीम पर भारी दबाव बन गया है। क्या मेकर्स इस विवाद को शांत करने के लिए टीजर में बदलाव करेंगे या फिर कोई आधिकारिक बयान जारी करेंगे, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में सेंसरशिप और ऐतिहासिक किरदारों के चित्रण को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छेड़ सकता है।
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