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दिवाली और छठ की तैयारियों में थकान नहीं होगी हावी, अपनाएं ये स्मार्ट टिप्स; ऊर्जा से भरपूर रहेगा फेस्टिव सीजन

त्योहारों का मौसम उमंग, उल्लास और अपनों से मिलने का सुखद अहसास लेकर आता है, लेकिन इसके साथ ही घर-गृहस्थी में जिम्मेदारियों का भारी बोझ भी जुड़ जाता है। खासकर उत्तर भारत में जहां दिवाली और लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा बेहद कम दिनों के फासले पर आते हैं, वहां घर की डीप क्लीनिंग, रंग-रोगन, बाजार की दौड़भाग, गिफ्ट्स की पैकिंग और छठ के पारंपरिक पकवानों व सूप-दउरा के इंतजाम की आपाधापी शुरू हो जाती है। कामकाजी महिलाओं और पुरुषों के लिए ऑफिस की डेडलाइन्स और घर के इन अनगिनत कामों को एक साथ संभालना शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद थका देने वाला साबित होता है। कई बार लोग त्योहार के मुख्य दिन तक इतने निढाल और बर्नआउट के शिकार हो जाते हैं कि उत्सव की खुशियों का आनंद ही नहीं ले पाते। अगर आप सही योजना और स्मार्ट लाइफस्टाइल के साथ काम करें, तो बिना किसी तनाव और गंभीर थकान के पूरा फेस्टिव सीजन ऊर्जा से भरपूर बिता सकते हैं।

फेस्टिव सीजन में सबसे बड़ी गलती लोग यह करते हैं कि वे बिना किसी पूर्व तैयारी के एक साथ कई काम शुरू कर देते हैं। कभी अलमारी का सामान निकाल दिया, तो बीच में ही खरीदारी के लिए निकल गए। यह अव्यवस्थित तरीका दिमाग पर अनावश्यक दबाव डालता है। इससे बचने के लिए सबसे पहले एक नोटबुक या फोन के नोट्स ऐप में सभी कामों की एक व्यवस्थित चेकलिस्ट तैयार करें। इसे तीन श्रेणियों में बांटें: अति आवश्यक, सामान्य और वैकल्पिक। जो काम दिवाली से दो हफ्ते पहले निपटाए जा सकते हैं (जैसे पर्दे धुलना, स्टोर रूम साफ करना या छठ के सूखे बर्तनों और सामान की छंटाई), उन्हें पहले पूरा करें। जब आप एक-एक करके कार्यों पर टिक लगाते हैं, तो दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है और मानसिक तनाव अपने आप आधा रह जाता है।

सफाई शुरू करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पूरे घर को एक ही दिन में अस्त-व्यस्त कर दिया जाए। सफाई का पहला स्वर्णिम नियम है ‘डिक्लेटरिंग’ यानी गैर-जरूरी चीजों को बाहर निकालना। पुराने अखबार, खाली डिब्बे, टूटे प्लास्टिक के खिलौने और न पहने जाने वाले कपड़ों को सबसे पहले घर से बाहर करें। जब अतिरिक्त कबाड़ हट जाता है, तो घर का 40 प्रतिशत हिस्सा खुद-ब-खुद साफ दिखने लगता है। इसके बाद एक दिन में सिर्फ एक कमरा या एक सेक्शन (जैसे सिर्फ किचन या सिर्फ बेडरूम) साफ करने का लक्ष्य रखें। सफाई के लिए आधुनिक गैजेट्स जैसे वैक्यूम क्लीनर, माइक्रोफाइबर मॉप और ऑनलाइन उपलब्ध आसान क्लीनिंग स्प्रे का सहारा लें ताकि झुकने और भारी बाल्टियां उठाने से कमर पर अतिरिक्त जोर न पड़े। परफेक्शनिस्ट बनने के फेर में अपनी सेहत की बलि न चढ़ाएं, क्योंकि घर को इंसानों के रहने लायक सुंदर बनाना है, किसी शोरूम जैसा बेदाग नहीं।

त्योहार किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे परिवार का उत्सव होता है। अक्सर देखा जाता है कि घर की महिलाएं अकेले ही रसोई से लेकर सजावट तक का सारा भार अपने कंधों पर ले लेती हैं, जो त्योहार के दिन उनकी बीमारी या चिड़चिड़ेपन का कारण बन जाता है। परिवार के हर सदस्य—पति, बच्चों और बुजुर्गों—को उनकी क्षमता के अनुसार जिम्मेदारियां सौंपें। बच्चे रंगोली के रंग व्यवस्थित करने, दीये भिगोने या झालर लगाने में मदद कर सकते हैं, जबकि युवा बाजार से फल, पूजा सामग्री और राशन लाने का जिम्मा संभाल सकते हैं। मिलकर काम करने से न सिर्फ समय की भारी बचत होती है, बल्कि आपस में संवाद बढ़ता है और त्योहार का असली आनंद भी दोगुना हो जाता है।

काम की आपाधापी में अक्सर लोग खाना समय पर खाना भूल जाते हैं या लगातार चाय-कॉफी पीकर पेट खराब कर लेते हैं। दिनभर एक्टिव रहने के लिए शरीर को सही ईंधन की जरूरत होती है। अपने दिन की शुरुआत भीगे बादाम, अखरोट और गुनगुने पानी के साथ करें। दिन में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी, नारियल पानी या नींबू-पानी का सेवन अवश्य करें ताकि डिहाइड्रेशन और मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या न हो। इसके साथ ही अपने दैनिक शेड्यूल में ‘बफर टाइम’ जरूर निर्धारित करें। दोपहर या शाम को 30 से 45 मिनट का ऐसा ब्रेक लें जिसमें आप कोई काम न करें—बस आंखें बंद करके लेटें, हल्का संगीत सुनें या गहरी सांस लें। 6 से 7 घंटे की सुकून भरी नींद आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और ताजगी को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। इन छोटी लेकिन असरदार सावधानियों को अपनाकर आप बिना किसी थकावट के दिवाली की रोशनी और छठ के पावन अर्घ्य का पूरी ऊर्जा के साथ स्वागत कर सकते हैं।