
नई दिल्ली/विशेष संवाददाता। बंगाल की खाड़ी के ऊपर गहराते चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ (Cyclone Arnab) ने देश के पूर्वी और दक्षिणी तटीय राज्यों की धड़कनें तेज कर दी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, यह चक्रवाती तंत्र तेजी से उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है और तट के करीब पहुंचते ही इसके और अधिक विकराल रूप लेने की आशंका है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि लैंडफॉल के दौरान समुद्र में 8 फीट (लगभग 2.5 मीटर) तक की विनाशकारी तूफानी लहरें (Storm Surge) उठ सकती हैं, जो निचले तटीय गांवों, बस्तियों और कृषि भूमि को जलमग्न कर सकती हैं।
इस गंभीर खतरे को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों के आपदा प्रबंधन महकमों ने ‘जीरो कैजुअल्टी’ के लक्ष्य के साथ युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लाखों नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सबसे संवेदनशील मानी जाने वाली गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने एक अनुकरणीय और मानवीय पहल की है। प्रभावित तटीय जिलों में चिन्हित लगभग 2,000 गर्भवती महिलाओं को समय रहते प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PEC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CEC) और सुरक्षित बहुउद्देशीय चक्रवात आश्रय स्थलों (Cyclone Shelters) में स्थानांतरित कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उन महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है जिनकी डिलीवरी डेट अगले कुछ दिनों या हफ्तों में संभावित है। तेज आंधी और भारी जलभराव के चलते सड़कें टूटने, संचार माध्यम ठप होने या एम्बुलेंस सेवा बाधित होने की स्थिति में किसी भी प्रसूता को आपातकालीन चिकित्सा से वंचित न होना पड़े, इसी उद्देश्य से उन्हें पहले ही अस्पतालों के लेबर वार्ड और सुरक्षित केंद्रों में भर्ती कराया गया है। इन केंद्रों पर डॉक्टरों, नर्सों, जीवन रक्षक दवाओं, ऑक्सीजन सिलेंडर और बैकअप जनरेटर की 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात के प्रभाव से हवाओं की रफ्तार 90 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जो झोंकों के साथ 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार भी छू सकती है। IMD ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटीय जनपदों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
तूफान के तट से टकराने के समय मूसलाधार बारिश का अनुमान है, जिससे निचले इलाकों में गंभीर जलभराव, कच्चे मकानों को नुकसान, बिजली के खंभे गिरने और पेड़ों के उखड़ने की पूरी आशंका है। मछुआरों को अगले आदेश तक गहरे समुद्र में न जाने की सख्त ताकीद की गई है, जबकि समुद्र में पहले से मौजूद सभी नौकाओं को निकटतम बंदरगाहों पर सुरक्षित लौटने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। पारादीप, विशाखापट्टनम और हल्दिया बंदरगाहों पर विशेष खतरे के संकेत फहरा दिए गए हैं।
आपदा से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की दर्जनों टीमों को संवेदनशील तटीय इलाकों में तैनात कर दिया गया है। इन टीमों को आधुनिक बोट्स, कटर और राहत सामग्री से लैस किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।
इसके साथ ही, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल (Coast Guard) के जहाजों और टोही विमानों को भी स्टैंडबाय मोड पर रखा गया है। जिला प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर राहत शिविरों में शुद्ध पेयजल, सूखा राशन, शिशु आहार और स्वच्छता सामग्री का पर्याप्त भंडारण पूरा कर लिया है। नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है ताकि किसी भी सूचना पर फौरन प्रतिक्रिया दी जा सके। चक्रवात के खतरे को देखते हुए संवेदनशील इलाकों के स्कूलों, कॉलेजों और गैर-जरूरी सरकारी दफ्तरों में अवकाश घोषित कर दिया गया है।
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