Tuesday , October 27 2026

₹1 लाख की FD पर 1 साल बाद कौन-सा बैंक देगा सबसे ज्यादा रिटर्न? सरकारी, प्राइवेट और SFB की नई ब्याज दरें और पूरा हिसाब

जब भी किसी आम नागरिक, नौकरीपेशा पेशेवर या गृहिणी के हाथ में ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की बचत आती है, तो सबसे पहला और स्वाभाविक विचार यही आता है कि इसे बिना किसी जोखिम के ऐसी सुरक्षित जगह लगाया जाए जहां एक साल के भीतर अधिकतम रिटर्न मिल सके। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड की अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव से दूर रहने वाले पारंपरिक निवेशकों के लिए बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आज भी सबसे पसंदीदा विकल्प बना हुआ है। हालांकि, अधिकांश लोग बिना सोचे-समझे अपने पुराने खाते वाले बैंक में ही पैसा जमा कर देते हैं, जिससे उन्हें सालाना ₹1,500 से ₹2,000 तक का सीधा नुकसान उठाना पड़ता है। आज बैंकिंग सेक्टर में सरकारी बैंक, बड़े प्राइवेट बैंक और रिजर्व बैंक द्वारा मान्यता प्राप्त स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए अलग-अलग ब्याज दरें पेश कर रहे हैं। यदि 1 साल की अवधि के लिए ₹1 लाख का निवेश करना हो, तो ब्याज दरों और तिमाही चक्रवृद्धि (Quarterly Compounding) के आधार पर रिटर्न में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिलता है।

यदि आपका मुख्य लक्ष्य केवल यह है कि 1 साल बाद ₹1 लाख पर सबसे ज्यादा नकदी हाथ में आए, तो स्मॉल फाइनेंस बैंक इस समय सबसे आगे खड़े दिखाई देते हैं। नए ग्राहकों को जोड़ने और अपनी उधारी पूंजी जुटाने के लिए ये बैंक सामान्य और बड़े बैंकों के मुकाबले 1% से 1.5% तक अधिक ब्याज ऑफर कर रहे हैं। यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (Unity SFB), सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक (Suryoday SFB) और उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक (Utkarsh SFB) जैसे संस्थान 1 वर्ष की सावधि जमा पर सामान्य नागरिकों को 7.75% से लेकर 8.00% तक का ब्याज दे रहे हैं। वहीं वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए यह दर 8.25% से 8.50% तक पहुंच जाती है।

तिमाही आधार पर कंपाउंडिंग का हिसाब लगाएं तो 8% की दर से ₹1,00,000 की राशि 1 साल में बढ़कर लगभग ₹1,08,240 हो जाती है, यानी आपको सीधे ₹8,240 का शुद्ध लाभ मिलता है। वहीं उत्कर्ष और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में 7.25% से 7.75% की दरों पर यह मैच्योरिटी राशि लगभग ₹1,07,450 से ₹1,07,980 के बीच बनती है।

देश के बड़े प्राइवेट बैंकों में सुविधा, त्वरित नेट बैंकिंग और शाखाओं का विशाल नेटवर्क मिलता है, लेकिन इनकी ब्याज दरें स्मॉल फाइनेंस बैंकों के मुकाबले थोड़ी कम होती हैं। निजी क्षेत्र में इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) और यस बैंक (Yes Bank) 1 साल की एफडी पर 7.25% तक का आकर्षक ब्याज दे रहे हैं, जिस पर ₹1 लाख का निवेश 12 महीने बाद बढ़कर करीब ₹1,07,450 हो जाता है। आरबीएल बैंक (RBL Bank) में 7.10% की दर से यह रिटर्न लगभग ₹1,07,290 बनता है।

दूसरी तरफ, देश के सबसे बड़े निजी ऋणदाताओं—एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) की बात करें तो ये 1 साल की अवधि के लिए सामान्य नागरिकों को 6.60% से 6.70% के बीच ब्याज दे रहे हैं। इन दिग्गज बैंकों में ₹1 लाख जमा करने पर 1 साल बाद आपको लगभग ₹1,06,760 से ₹1,06,870 की मैच्योरिटी राशि ही मिल पाती है। यानी इंडसइंड या यस बैंक जैसे मध्यम आकार के प्राइवेट बैंकों की तुलना में बड़े बैंकों में करीब ₹600 से ₹700 का कम मुनाफा होता है।

भारत के करोड़ों बुजुर्गों और ग्रामीण निवेशकों की पहली पसंद आज भी सरकारी बैंक (Public Sector Banks) ही हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) 1 साल के टेन्योर पर सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए सामान्य नागरिकों को 6.85% का ब्याज दे रहा है, जिससे ₹1 लाख की एफडी 1 साल में बढ़कर लगभग ₹1,07,030 हो जाती है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) 6.80% की दर से करीब ₹1,06,970 और केनरा बैंक 6.75% की दर से करीब ₹1,06,920 का भुगतान करता है।

देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की बात करें तो एसबीआई 1 साल की एफडी पर सामान्य ग्राहकों को 6.40% से 6.50% के आसपास ब्याज दे रहा है। इसका मतलब है कि एसबीआई में ₹1 लाख जमा करने पर 1 साल बाद आपको लगभग ₹1,06,550 मिलेंगे। यदि इसकी तुलना 8% देने वाले स्मॉल फाइनेंस बैंक से करें, तो सरकारी बैंक में आपको लगभग ₹1,690 का सीधा कम ब्याज मिलता है। हालांकि, जो लोग पूरी तरह से सरकारी उपक्रम की मानसिक शांति चाहते हैं, वे बैंक ऑफ बड़ौदा या पीएनबी की शाखाओं को प्राथमिकता देते हैं।

कई जमाकर्ताओं के मन में यह स्वाभाविक हिचकिचाहट होती है कि ज्यादा ब्याज के लालच में किसी नए या छोटे बैंक में ₹1 लाख डालना जोखिम भरा तो नहीं होगा। यहां भारतीय बैंकिंग कानून के एक सबसे मजबूत सुरक्षा चक्र को समझना आवश्यक है। स्मॉल फाइनेंस बैंक कोई गैर-कानूनी या अनियंत्रित चिटफंड कंपनियां नहीं हैं; ये भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रत्यक्ष नियंत्रण और ‘बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949’ के तहत काम करने वाले शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि देश का हर सरकारी, निजी और स्मॉल फाइनेंस बैंक आरबीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी संस्था डीआईसीजीसी (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) के अंतर्गत बीमित (Insured) होता है। डीआईसीजीसी के नियमों के अनुसार, प्रत्येक बैंक में प्रत्येक खाताधारक की ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) तक की जमा पूंजी (जिसमें मूलधन और उस पर मिलने वाला ब्याज दोनों शामिल हैं) की शत-प्रतिशत कानूनी गारंटी होती है। यदि कोई बैंक दिवालिया भी हो जाए, तब भी कानूनन सरकार जमाकर्ता को ₹5 लाख तक की रकम चुकाने के लिए बाध्य है। चूंकि आपका निवेश केवल ₹1 लाख है, इसलिए स्मॉल फाइनेंस बैंक में भी आपका एक-एक पैसा उतना ही सुरक्षित है जितना कि एसबीआई या पीएनबी में।

यदि आप यह ₹1 लाख अपने माता-पिता, दादा-दादी या परिवार के किसी ऐसे सदस्य के नाम पर जमा करते हैं जिनकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है, तो हर बैंक उन्हें सामान्य नागरिकों से 0.50% से 0.75% तक अतिरिक्त ब्याज देता है। उदाहरण के लिए, स्मॉल फाइनेंस बैंकों में वरिष्ठ नागरिकों को 8.50% की दर मिलने पर ₹1 लाख का फंड 1 साल में बढ़कर ₹1,08,775 हो जाएगा, जिससे सीधे ₹8,775 की कमाई होगी।

निवेशकों को आयकर के टीडीएस नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए। आयकर कानून के तहत एक वित्तीय वर्ष में बैंक एफडी से होने वाली कुल ब्याज आय यदि सामान्य नागरिक के लिए ₹40,000 और सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000 से अधिक होती है, तभी बैंक 10% टीडीएस काटता है। ₹1 लाख की एफडी पर अधिकतम ब्याज भी ₹8,500 से ₹8,800 के बीच ही बनेगा, इसलिए इस पर कोई टीडीएस कटने का जोखिम नहीं है। यदि आपकी कुल सालाना आय टैक्स छूट सीमा के भीतर आती है, तो आप बैंक में फॉर्म 15G (वरिष्ठ नागरिकों के लिए फॉर्म 15H) जमा करके ब्याज पर किसी भी कटौती से पूरी तरह बच सकते हैं। यदि अधिकतम मुनाफा प्राथमिकता है तो स्मॉल फाइनेंस बैंक, मध्यम सुरक्षा व बेहतर तकनीक चाहिए तो निजी बैंक, और 100% पारंपरिक विश्वास चाहिए तो बैंक ऑफ बड़ौदा या पीएनबी आपके ₹1 लाख के लिए सबसे मुफीद साबित होंगे।