
बिहार की राजनीति में अपनी बेबाक शैली, जनता के बीच लगातार सक्रियता और हर सुख-दुख में बढ़-चढ़कर खड़े रहने वाले पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक बयानबाजी या हंगामा नहीं, बल्कि उनकी अचानक बिगड़ी हुई तबीयत है। हाल ही में एक सार्वजनिक और धार्मिक कार्यक्रम के दौरान सांसद पप्पू यादव के साथ एक ऐसी घटना घटी जिसने वहां मौजूद लोगों की सांसें कुछ पल के लिए रोक दीं। बताया जा रहा है कि एक नए प्रतिष्ठान या पूजा के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे पप्पू यादव जैसे ही कैंची उठाकर फीता काटने लगे, उन्हें अचानक तेज चक्कर आ गए और उनका संतुलन बिगड़ गया। गनीमत यह रही कि समय रहते आसपास खड़े उनके समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत संभाल लिया, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आया, वैसे ही उनके चाहने वालों और समर्थकों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई और हर कोई उनकी सेहत का हाल जानने के लिए बेचैन हो उठा। आइए विस्तार से जानते हैं कि उस वक्त मौके पर असल में क्या हुआ था और अब उनकी तबीयत कैसी है।
घटना की जानकारी के अनुसार, सांसद पप्पू यादव अपने संसदीय क्षेत्र या किसी अन्य निर्धारित कार्यक्रम के सिलसिले में एक स्थानीय आयोजन में शामिल होने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में उनके हाथों से ही पूजा-पाठ के बाद उद्घाटन का फीता काटा जाना तय था। आयोजकों और स्थानीय लोगों में अपने चहेते नेता का स्वागत करने को लेकर भारी उत्साह था और चारों तरफ लोगों की भीड़ जमा थी। जैसे ही सांसद महोदय फीता काटने के लिए आगे बढ़े और उन्होंने कैंची चलाई, उसी पल उन्हें अचानक चक्कर महसूस हुआ और उनकी आंखें बंद होने लगीं। शरीर की कमजोरी या अत्यधिक व्यस्तता के कारण उनका संतुलन अचानक लड़खड़ा गया और वे जमीन पर गिरने ही वाले थे कि तभी पास खड़े सतर्क सुरक्षाकर्मियों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने फुर्ती दिखाते हुए उन्हें संभाल लिया। उन्हें तुरंत एक आरामदायक कुर्सी पर बैठाया गया और उनके चेहरे पर पानी के छींटे मारे गए, जिसके कुछ देर बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ। इस अप्रत्याशित घटना से कुछ समय के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया था, क्योंकि किसी को यह अंदाजा नहीं था कि लगातार एक्टिव रहने वाले नेता अचानक इस तरह अस्वस्थ महसूस करने लगेंगे।
राजनीतिक गलियारों और डॉक्टरों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं आमतौर पर अत्यधिक शारीरिक थकान, लगातार भागदौड़, खान-पान में अनियमितता और जरूरत से ज्यादा तनाव के कारण होती हैं। सांसद पप्पू यादव के बारे में यह सर्वविदित है कि वे सुबह से लेकर देर रात तक जनता के बीच रहते हैं, चाहे वह बाढ़ का इलाका हो, किसी गरीब की मदद का मामला हो या फिर जनता की समस्याएं सुनना हो, वे हर जगह व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहते हैं। पिछले कुछ हफ्तों से उनके लगातार दौरे और चुनावी या सामाजिक बैठकों के कारण उनके शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा था, जिसका असर उनकी सेहत पर दिखना स्वाभाविक था। कार्यक्रम के तुरंत बाद स्थानीय चिकित्सकों की एक टीम ने पहुंचकर उनके स्वास्थ्य की जांच की और उन्हें सलाह दी कि वे कुछ दिनों तक पूरी तरह से आराम करें और अपनी दिनचर्या में थोड़ा संयम रखें। इस घटना के बाद खुद सांसद ने अपने सोशल मीडिया हैंडल या समर्थकों के माध्यम से यह संदेश दिया है कि वे अब पूरी तरह से ठीक हैं और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन उनके करीबियों का मानना है कि उन्हें अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखने की सख्त जरूरत है।
जैसे ही पप्पू यादव के चक्कर खाकर गिरने और तबीयत बिगड़ने की खबर मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए फैली, उनके समर्थकों का हुक्म उनके आवास और कार्यालय के बाहर जुटने लगा। हर कोई अपने लोकप्रिय नेता के जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना कर रहा है। इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों से भी विभिन्न दलों के नेताओं ने फोन करके उनका हाल-चाल जाना और उनके अच्छे स्वास्थ्य की ईश्वर से प्रार्थना की। यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर ध्यान खींचती है कि जनप्रतिनिधि चाहे कितने भी ऊर्जावान और जनता के प्रति समर्पित क्यों न हों, उनका शरीर भी इंसान का ही होता है और अत्यधिक कार्यभार के कारण वे भी अस्वस्थ हो सकते हैं। इस घटना ने एक तरफ जहां जनता और नेताओं के बीच के भावनात्मक जुड़ाव को और प्रगाढ़ किया है, वहीं यह सबक भी दिया है कि व्यस्तता के बीच स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल, सांसद पप्पू यादव की सेहत स्थिर है और वे डॉक्टरों की देखरेख में आराम कर रहे हैं, और उम्मीद है कि जल्द ही वे अपनी पुरानी ऊर्जा के साथ एक बार फिर जनता की सेवा में सक्रिय रूप से लौट आएंगे।
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