
डिजिटल इंडिया के इस दौर में यूपीआई, डेबिट कार्ड और एटीएम हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि आप दुकान पर क्यूआर कोड स्कैन करते हैं, पीओएस मशीन पर कार्ड स्वाइप करते हैं या एटीएम से कैश निकालते हैं, और स्क्रीन पर ‘ट्रांजैक्शन फेल्ड’ का मैसेज आ जाता है। झटका तब लगता है जब आपके मोबाइल पर खाते से पैसे कटने का एसएमएस आ जाता है। ऐसी स्थिति में आम ग्राहक घबरा जाता है और बैंक के चक्कर काटने लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार यदि बैंक तय समय सीमा के भीतर आपका कटा हुआ पैसा वापस नहीं करता, तो उसे ग्राहक को ₹100 प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा (Compensation) देना अनिवार्य होता है?
भारतीय रिज़र्व बैंक ने डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक भुगतानों को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए ‘हार्मोनाइजेशन ऑफ टर्न अराउंड टाइम (TAT) एंड कस्टमर कम्पेन्सेशन’ फ्रेमवर्क लागू किया हुआ है। इस नियम का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी खामी के कारण अगर किसी ग्राहक का पैसा फंसता है, तो बैंक स्वतः संज्ञान लेकर उसे तय दिनों के भीतर खाते में वापस क्रेडिट करे। यदि बैंक निर्धारित समय सीमा से अधिक की देरी करता है, तो बिना ग्राहक के मांगे भी ₹100 प्रति दिन का हर्जाना सीधे उसके बैंक खाते में जमा होना चाहिए।
आरबीआई ने सभी प्रकार के पेमेंट सिस्टम्स के लिए ऑटो-रिवर्सल की समय सीमा तय की है, जिसे ‘T’ (ट्रांजैक्शन का दिन) के आधार पर गिना जाता है:
| पेमेंट का प्रकार | स्थिति | ऑटो-रिवर्सल की समय सीमा (TAT) | देरी पर हर्जाना |
| एटीएम (ATM / Micro-ATM) | खाते से पैसे कटे लेकिन कैश नहीं निकला | अधिकतम T + 5 दिन | ₹100 प्रति दिन (T+5 के बाद) |
| यूपीआई (UPI P2P / P2M) | खाते से पैसे कटे पर रिसीवर को नहीं पहुंचे | अधिकतम T + 1 दिन | ₹100 प्रति दिन (T+1 के बाद) |
| कार्ड ट्रांजेक्शन (POS / E-Commerce) | पैसे कटे पर मर्चेंट को कन्फर्मेशन नहीं मिला | अधिकतम T + 5 दिन | ₹100 प्रति दिन (T+5 के बाद) |
| आईएमपीएस (IMPS) / एनईएफटी (NEFT) | पैसा खाते से कटा पर लाभार्थी खाते में क्रेडिट नहीं हुआ | अधिकतम T + 1 दिन | ₹100 प्रति दिन (T+1 के बाद) |
| आधार सक्षम भुगतान (AePS) | ग्राहक का खाता डेबिट हुआ पर ट्रांजेक्शन असफल | अधिकतम T + 5 दिन | ₹100 प्रति दिन (T+5 के बाद) |
नोट: यहाँ ‘T’ का अर्थ ट्रांजैक्शन की तारीख से है।
आरबीआई के स्पष्ट निर्देश हैं कि यह मुआवजा ग्राहक को तभी देय होता है जब गलती बैंकिंग सिस्टम या तकनीकी विफलता की वजह से हुई हो। उदाहरण के लिए:
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एटीएम से कैश न निकलना: आपने ₹5,000 निकालने के लिए पिन दर्ज किया, मशीन से आवाज आई लेकिन नकदी बाहर नहीं आई और खाते से राशि कट गई। बैंक को ट्रांजैक्शन की तारीख से अगले 5 दिनों (T+5) के भीतर पैसे लौटाने होंगे। अगर बैंक ने 10वें दिन पैसे वापस किए, तो 5 दिन की देरी के लिए ₹500 का अतिरिक्त हर्जाना मिलेगा।
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यूपीआई पेमेंट फेल होना: आपने किसी दुकानदार को ₹2,000 भेजे, आपके खाते से कट गए लेकिन दुकानदार के खाते में नहीं पहुंचे। इसके लिए बैंक के पास केवल T+1 दिन का समय होता है। इसके बाद होने वाले हर दिन के विलंब पर ₹100 प्रतिदिन जुड़ता जाएगा।
यह जानना भी बहुत जरूरी है कि ₹100 का जुर्माना किन मामलों में लागू नहीं होता:
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ग्राहक की गलती: यदि आपने गलत यूपीआई आईडी या गलत खाता संख्या दर्ज कर दी और पैसे किसी अन्य व्यक्ति के खाते में चले गए, तो यह बैंक की तकनीकी विफलता नहीं मानी जाती।
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समय पर शिकायत दर्ज न करना (एटीएम के मामले में): एटीएम विफलताओं में ग्राहक को लेनदेन की तारीख से 30 दिनों के भीतर अपने बैंक में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
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धोखाधड़ी या साइबर अपराध: यदि कोई यूजर ओटीपी साझा करने या फिशिंग लिंक पर क्लिक करने के कारण साइबर फ्रॉड का शिकार हुआ है, तो वह इस ऑटो-रिवर्सल टीएटी नियम के दायरे में नहीं आता।
यदि आपका ट्रांजैक्शन फेल हो गया है और पैसे कट गए हैं, तो इन चरणों का पालन करें:
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सबूत सुरक्षित रखें: ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट, यूटीआर (UTR) नंबर, बैंक का एसएमएस, एटीएम ट्रांजैक्शन स्लिप या फेल्योर रसीद को सुरक्षित रखें।
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अपने बैंक में शिकायत दर्ज करें: जिस बैंक में आपका खाता है (कार्ड जारीकर्ता बैंक), उसकी हेल्पलाइन, नेट बैंकिंग या नजदीकी शाखा में जाकर तत्काल शिकायत दर्ज करें और टिकट/कम्प्लेंट रेफरेंस नंबर अवश्य लें।
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टीएटी अवधि तक प्रतीक्षा करें: यूपीआई के लिए 24-48 घंटे और एटीएम/कार्ड के लिए 5 कार्यदिवस तक प्रतीक्षा करें।
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हर्जाने की जांच करें: यदि रिफंड तय समय के बाद आता है, तो बैंक स्टेटमेंट चेक करें कि क्या बैंक ने मूल राशि के साथ ₹100 प्रतिदिन के हिसाब से पेनल्टी क्रेडिट की है या नहीं।
यदि बैंक तय समय सीमा बीतने के बाद भी रिफंड नहीं करता या देरी होने के बावजूद ₹100 प्रतिदिन का मुआवजा देने से इनकार करता है, तो ग्राहक के पास कानूनी अधिकार है:
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नोडल अधिकारी (Grievance Officer): सबसे पहले बैंक के प्रधान शिकायत निवारण अधिकारी को ईमेल भेजें।
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आरबीआई ओम्बड्समैन (RBI Ombudsman): यदि बैंक 30 दिनों के भीतर समाधान नहीं देता या असंतोषजनक जवाब देता है, तो आप भारतीय रिज़र्व बैंक के ऑनलाइन कम्प्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल (cms.rbi.org.in) पर बिना किसी शुल्क के सीधे लोकपाल से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आरबीआई का लोकपाल बैंक को मूल राशि के साथ पूरा हर्जाना चुकाने का आदेश जारी करता है।
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