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RSS से लड़ने में मुझे बहुत खुशी मिलती है’: राहुल गांधी का संघ पर जोरदार प्रहार, बताया ‘पुरुषवादी’ और ‘असंवैधानिक’ संगठन

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा वैचारिक प्रहार किया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम और संवाद सत्र के दौरान राहुल गांधी ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें संघ की विचारधारा से मुकाबला करने और उसके खिलाफ संघर्ष करने में बेहद खुशी और आत्मिक संतोष मिलता है। उन्होंने आरएसएस को सीधे तौर पर एक ‘पुरुषवादी’ (Male-chauvinist) और ‘असंवैधानिक’ संगठन करार देते हुए आरोप लगाया कि संघ देश के लोकतांत्रिक ढांचे, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा रचित संविधान और विविधतापूर्ण सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने की लगातार कोशिश कर रहा है।

राहुल गांधी ने कहा कि उनकी यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत द्वेष या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की नहीं, बल्कि दो बिल्कुल विपरीत और स्पष्ट विचारधाराओं के बीच की ऐतिहासिक जंग है। एक तरफ कांग्रेस और विपक्षी दलों का वह विचार है जो भारत के संविधान, सामाजिक न्याय, बहुलतावाद, महिलाओं की बराबरी और हर नागरिक के मूलभूत अधिकारों की पैरवी करता है; वहीं दूसरी तरफ आरएसएस की वह सोच है जो देश को केवल एक खास चश्मे और केंद्रीकृत नियंत्रण से चलाना चाहती है। नेता प्रतिपक्ष के इस आक्रामक बयान के बाद राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और भाजपा के बीच एक नया सियासी संग्राम छिड़ गया है।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में विशेष रूप से संघ के संगठनात्मक ढांचे पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आरएसएस अपनी शाखाओं और नीति-निर्धारण के शीर्ष स्तर पर महिलाओं को बराबरी की भागीदारी नहीं देता। राहुल के अनुसार, जिस संगठन की संरचना में आधी आबादी यानी देश की महिलाओं के लिए शीर्ष पदों पर कोई वास्तविक स्थान न हो, वह आधुनिक भारत और समानता की बात कैसे कर सकता है?

उन्होंने कहा कि संघ की पूरी कार्यप्रणाली पुरुष वर्चस्ववादी सोच से प्रेरित है, जहां महिलाओं को केवल पारंपरिक दायरों में समेटने की वकालत की जाती है। नेता प्रतिपक्ष ने जोर देकर कहा कि 21वीं सदी का नया भारत महिलाओं के नेतृत्व, उनकी आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय लेने की सर्वोच्च भूमिका से आगे बढ़ेगा, न कि किसी संकीर्ण और दकियानूसी सोच से। यही वजह है कि वे संघ की इस व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हैं और इसके खिलाफ आवाज उठाना अपना कर्तव्य समझते हैं।

आरएसएस को ‘असंवैधानिक’ कहे जाने के अपने तर्क को समझाते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि संघ खुलेआम संविधान पर हमला करने से बचता है, लेकिन पर्दे के पीछे से देश की संवैधानिक और स्वायत्त संस्थाओं पर कब्जा करने का अभियान चला रहा है। उन्होंने कहा कि आज देश की न्यायपालिका, चुनाव आयोग, विश्वविद्यालय, जांच एजेंसियां और नौकरशाही में योग्यता के बजाय केवल एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों को व्यवस्थित तरीके से बैठाया जा रहा है।

राहुल गांधी ने कहा कि जब स्वायत्त संस्थाओं की निष्पक्षता समाप्त हो जाती है और वे किसी संगठन के रिमोट कंट्रोल से चलने लगती हैं, तो संविधान स्वयं निष्प्रभावी हो जाता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे केवल एक राजनीतिक चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि भारतीय गणराज्य के मूल अस्तित्व और जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए मैदान में डटे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जितनी बार भी संघ उनके खिलाफ कानूनी मामले दर्ज कराएगा या संसद में उन्हें दबाने की कोशिश करेगा, उनकी आवाज उतनी ही बुलंद होगी।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन के सबसे चर्चित हिस्से में कहा कि कई लोग उनसे पूछते हैं कि वे आरएसएस को इतना निशाने पर क्यों लेते हैं और क्या वे इससे थकते नहीं हैं? इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि संघ के साथ यह वैचारिक संघर्ष उनके लिए किसी मजबूरी का विषय नहीं है, बल्कि इससे लड़ने में उन्हें असीम आनंद और ऊर्जा मिलती है।

उन्होंने कहा कि जब आप सत्य, न्याय और कमजोरों के अधिकारों के लिए किसी विशाल शक्ति के अहंकार के खिलाफ खड़े होते हैं, तो वह संघर्ष बोझ नहीं लगता। उन्होंने कहा कि उनके परिवार और कांग्रेस पार्टी की परंपरा हमेशा से भयमुक्त राजनीति की रही है। वे महात्मा गांधी की उस सीख को दोहराते हैं जिसमें कहा गया था कि सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन अंततः विजय उसी की होती है। राहुल ने दोहराया कि वे किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।

राहुल गांधी के इस तीखे बयान पर भारतीय जनता पार्टी और संघ से जुड़े नेताओं ने तत्काल और बेहद कड़ा पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ताओं ने राहुल गांधी के आरोपों को उनकी ‘हताशा’ और ‘भारतीय संस्कृति के प्रति अज्ञानता’ का परिणाम बताया। सत्ता पक्ष का कहना है कि आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी और राष्ट्रवादी सामाजिक संगठन है, जो देश में किसी भी प्राकृतिक आपदा, युद्ध या संकट के समय निस्वार्थ भाव से सबसे पहले सेवा के लिए आगे आता है।

भाजपा नेताओं ने कहा कि संघ ने देश को समर्पित और राष्ट्रभक्त नेतृत्व दिया है और राहुल गांधी लगातार संघ की देशभक्ति पर सवाल उठाकर दरअसल भारतीय समाज की जड़ों का अपमान कर रहे हैं। महिला भागीदारी के मुद्दे पर संघ समर्थकों ने तर्क दिया कि राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से महिलाएं दशकों से समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण और सशक्तिकरण के क्षेत्र में स्वतंत्र और अभूतपूर्व भूमिका निभा रही हैं। भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि एक परिवार विशेष के नियंत्रण में चलने वाली कांग्रेस पार्टी को उन लोकतांत्रिक और स्वयंसेवी संस्थाओं पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है जो बिना किसी सरकारी मदद के करोड़ों नागरिकों के कल्याण में लगी हैं। कुल मिलाकर, राहुल गांधी के इस बयान ने आगामी चुनावी माहौल में ‘संविधान बनाम संघ’ की वैचारिक बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।