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वायु सेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो की रिहर्सल देख काशीवासी दंग

धर्म, अध्यात्म और सनातन संस्कृति की पावन नगरी काशी के आसमान में भारतीय वायु सेना के जांबाज लड़ाकू विमानों ने जब अपनी प्रचंड गर्जना भरी, तो पूरा शहर रोमांच और गर्व से सराबोर हो गया। भारतीय वायु सेना (IAF) अपनी 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में वाराणसी में पहली बार ऐतिहासिक और भव्य ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो का आयोजन करने जा रही है। मुख्य हवाई प्रदर्शन से पहले सोमवार को गंगा की अविरल धारा के ऊपर वायु सेना के अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और हेलीकॉप्टरों ने जब फुल ड्रेस रिहर्सल शुरू की, तो नमो घाट से लेकर अस्सी घाट तक मौजूद लाखों श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक हैरान रह गए। सुपरसोनिक गति से मां गंगा के सीने को चीरते हुए गुजरे राफेल और सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों की दहाड़ से काशी का कोना-कोना गूंज उठा। वाराणसी के इतिहास में यह पहला अवसर है जब देश के सबसे उन्नत लड़ाकू विमान इतने करीब से आम जनता के सामने हवाई करतब दिखाते नजर आए हैं।

रिहर्सल के दौरान भारतीय वायु सेना के रणनीतिकारों ने नमो घाट से अस्सी घाट तक के पूरे तटीय क्षेत्र को एक विशाल एयर कॉरिडोर में बदल दिया था। गंगा किनारे बने 84 पक्के घाटों की सीढ़ियों पर सुबह से ही हजारों लोगों का हुजूम जुटा हुआ था। जैसे ही आसमान में लड़ाकू विमानों की फॉर्मेशन दिखाई दी, घाटों पर मौजूद भीड़ ‘भारत माता की जय’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठी। वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने गंगा के ठीक ऊपर बेहद कम ऊंचाई (लो-एल्टीट्यूड) पर उड़ान भरते हुए कई हैरतअंगेज हवाई पैंतरेबाजी (एयरोबैटिक मैन्युवर्स) का प्रदर्शन किया। लड़ाकू विमानों के अलावा वायु सेना के परिवहन विमानों और अत्याधुनिक स्वदेशी हेलीकॉप्टरों ने भी रिहर्सल में हिस्सा लिया। हेलीकॉप्टरों द्वारा गंगा की लहरों के ठीक ऊपर स्थिर रहकर किए गए करतबों को देखकर लोग स्तब्ध रह गए।

वाराणसी के शहरी इलाकों में भी इस रिहर्सल का जबर्दस्त क्रेज देखने को मिला। गोदौलिया, लंका, मैदागिन, सिगरा और दशाश्वमेध क्षेत्र के लोग अपने घरों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की छतों पर चढ़कर इन विमानों के लाइव करतबों को निहारते नजर आए। शहर के ऊपर से जब राफेल विमान ने सुपरसोनिक स्पीड से उड़ान भरी, तो उसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक स्पष्ट सुनाई दी। छतों पर खड़े बच्चे और युवा उत्साह से चिल्लाते हुए विमानों की पहचान करते दिखे—कोई चीख रहा था ‘देखो राफेल आ गया’, तो कोई सुखोई और चिनूक हेलीकॉप्टर की ताकत देखकर रोमांचित हो रहा था। स्थानीय नागरिकों ने बातचीत में बताया कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में कभी इतने करीब से लड़ाकू विमानों को उड़ते नहीं देखा था। यह केवल एक अभ्यास नहीं था, बल्कि भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और तकनीकी ताकत का सीधा साक्षात्कार था जिसने हर नागरिक का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। दिन भर काशी के स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लड़ाकू विमानों की गर्जना के वीडियो छाए रहे।

भारतीय वायु सेना द्वारा अपनी 94वीं वर्षगांठ के मुख्य कार्यक्रम को नई दिल्ली के हिंडन या पारंपरिक एयरबेस से बाहर निकालकर वाराणसी जैसी सांस्कृतिक नगरी के गंगा तट पर आयोजित करना एक बेहद दूरदर्शी कदम है। इसका सीधा उद्देश्य देश के युवाओं और नई पीढ़ी के भीतर भारतीय सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान बढ़ाना और उन्हें राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करना है। ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो के जरिए लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष तौर पर यह समझने का मौका मिला है कि वायु सेना की मारक क्षमता देश की सीमाओं को किस प्रकार अभेद्य बनाए रखती है। इस बड़े आयोजन के लिए स्थानीय जिला प्रशासन और पुलिस कमिश्नरेट ने भी घाटों पर सुरक्षा, बैरिकेडिंग और आपातकालीन जल पुलिस की विशेष व्यवस्था की है ताकि मुख्य आयोजन के दिन किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

इस एयर शो के चलते वाराणसी के पर्यटन, होटल और नाव संचालन उद्योग में भारी उछाल दर्ज किया गया है। नमो घाट, चेत सिंह घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट और अस्सी घाट के आसपास स्थित सभी होटल, होमस्टे और गेस्टहाउस पूरी तरह से बुक हो चुके हैं। गंगा में चलने वाले बड़े बजड़ों, रो-रो जहाजों और पारंपरिक नौकाओं की एडवांस बुकिंग फुल हो गई है, क्योंकि लोग पानी के बीच नावों पर बैठकर इस दुर्लभ हवाई प्रदर्शन को अपनी आंखों में कैद करना चाहते हैं। जिला प्रशासन का अनुमान है कि मुख्य एयर शो के दिन शहर और पूर्वांचल के अन्य जिलों से 5 लाख से अधिक लोग गंगा किनारे पहुंचेंगे। वाराणसी के गंगा तट पर होने वाला यह विहंगम दृश्य सैन्य शक्ति और सनातन संस्कृति के संगम का ऐसा अनूठा उदाहरण बन चुका है, जिसकी गूंज लंबे समय तक काशीवासियों के दिलों में जिंदा रहेगी।