
जापान के आइची-नागोया में आयोजित हो रहे पैरा एशियाई खेलों में भारतीय पैरा-एथलीटों ने अपने अदम्य साहस और विश्वस्तरीय कौशल के बल पर नया इतिहास रच दिया है। भारत के स्टार पैरा-एथलीट प्रणव सूरमा ने पुरुषों के डिस्कस थ्रो में 11.66 मीटर का विशालकाय थ्रो फेंककर न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि एक नया एशियाई रिकॉर्ड भी स्थापित कर दिया। इस स्पर्धा में भारत का दबदबा इस कदर कायम रहा कि पहले और दूसरे दोनों ही स्थानों पर तिरंगा लहराया। प्रणव के ऐतिहासिक स्वर्ण पदक के साथ ही भारत के ही राम रतन सिंह ने 10.35 मीटर का शानदार थ्रो करते हुए रजत पदक पर कब्जा जमाया। ट्रैक और फील्ड से लेकर तैराकी तक भारतीय खिलाड़ियों ने मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन करते हुए देश के पदकों की कुल संख्या को 30 तक पहुंचा दिया है।
प्रणव सूरमा ने पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 मिश्रित स्पर्धा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए मैदान पर उतरते ही शानदार शुरुआत की। उन्होंने तकनीकी सटीकता और फौलादी बाजुयों के दम पर 11.66 मीटर का थ्रो किया, जो इस स्पर्धा का नया एशियाई रिकॉर्ड बन गया। सूरमा की इस अविश्वसनीय उपलब्धि के आगे अन्य देशों के प्रतिद्वंद्वी टिक नहीं सके। पेरिस पैरालंपिक 2024 में पुरुषों के क्लब थ्रो में रजत पदक जीतने वाले प्रणव सूरमा ने इस बार अपने पदक का रंग बदलते हुए सोने पर निशाना साधा। वहीं भारतीय दल के एक अन्य जांबाज राम रतन सिंह ने 10.35 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास दर्ज कर देश के लिए रजत पदक पक्का किया। इस स्पर्धा का कांस्य पदक ईरान के अलीरेज़ा हेमामी के खाते में गया, जिन्होंने F53 वर्ग में 20.20 मीटर का थ्रो फेंककर तीसरा स्थान प्राप्त किया।
फील्ड स्पर्धाओं के अलावा ट्रैक इवेंट्स में भी भारतीय धावकों की रफ्तार ने सबको हैरान कर दिया। महिला 200 मीटर टी12 स्पर्धा में भारत की शीर्ष धाविका सिमरन शर्मा ने 24.80 सेकंड का सनसनीखेज समय निकालते हुए पहला स्थान हासिल किया और भारत की झोली में एक और स्वर्णिम सफलता डाली। सिमरन की रफ्तार के सामने ईरान की स्टार एथलीट हज्जार सफारजादेह 25.02 सेकंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहीं और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इसी स्पर्धा में भारत की युवा धाविका तेजलबेन दामोर ने 25.23 सेकंड में दौड़ पूरी करके अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया और कांस्य पदक पर कब्जा जमाया, जबकि चीन की दिग्गज धाविका याकिन शेन 26.49 सेकंड के साथ चौथे स्थान पर खिसक गईं।
महिला 200 मीटर टी35 स्पर्धा में भारत की स्टार पैरा-एथलीट प्रीति पाल ने असाधारण सुधार दिखाते हुए पोडियम पर जगह बनाई। प्रीति ने 29.53 सेकंड में दौड़ पूरी कर रजत पदक पर कब्जा जमाया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक चीन की झोउ शिया ने 28.03 सेकंड के साथ खेलों का नया रिकॉर्ड बनाते हुए जीता। प्रीति का यह प्रदर्शन उनके खेल जीवन की ऐतिहासिक छलांग माना जा रहा है, क्योंकि पिछले 2022 संस्करण में वह 32.19 सेकंड के साथ चौथे स्थान पर रहकर पदक से चूक गई थीं। इस बार उन्होंने अपने समय में 2.66 सेकंड का भारी सुधार दर्ज करते हुए देश को गौरव का क्षण दिया।
पैरा-तैराकी में भी भारतीय एथलीटों ने पोडियम पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। भारत के हिमांशु नंदाल ने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 (S11) स्पर्धा के फाइनल में शानदार तैराकी का मुजाहिरा किया। बेहद कड़े मुकाबले में उन्होंने 5:10.91 मिनट का समय निकालकर कांस्य पदक अपनी झोली में डाला। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक चीन के चुआनझेन सन ने एशियाई रिकॉर्ड तोड़ते हुए जीता, जबकि जापान के उचू तोमिता दूसरे स्थान पर रहते हुए रजत पदक जीतने में सफल रहे। हिमांशु की इस जीत के साथ ही पैरा-तैराकी में भारत को इन खेलों का दूसरा ऐतिहासिक पदक प्राप्त हुआ।
नागोया में भारतीय दल की यह सामूहिक सफलता देश में पैरा-स्पोर्ट्स के बढ़ते स्तर और मजबूत बुनियादी ढांचे को रेखांकित करती है। मंगलवार को एथलेटिक्स और स्विमिंग में मिले इन शानदार पदकों की बदौलत भारत के कुल पदकों की संख्या 30 हो गई है। भारतीय दल अब तक 8 स्वर्ण, 9 रजत और 13 कांस्य पदक जीत चुका है। खिलाड़ियों का यह निरंतर और आक्रामक प्रदर्शन यह साबित करता है कि पेरिस पैरालंपिक के बाद भारतीय पैरा-एथलीट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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