
Drinking Water Standing Up: क्या वाकई खड़े होकर पानी पीने से खराब हो जाते हैं घुटने और जोड़? जानें दादी-नानी की इस बात पर क्या कहते हैं डॉक्टर और साइंस!
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क्या आपको भी बड़े-बुजुर्ग खड़े होकर पानी पीने से टोकते हैं? क्या सच में खड़े होकर पानी पीने से घुटनों में दर्द (Knee Pain) और गठिया की बीमारी होती है? जानिए आयुर्वेद और मॉडर्न मेडिकल साइंस के एक्सपर्ट्स ने इस पर क्या बड़ा खुलासा किया है।
नई दिल्ली/लखनऊ/जयपुर (हेल्थ डेस्क): बचपन से लेकर आज तक हम सभी ने अपने घर के बड़े-बुजुर्गों और दादी-नानी से एक बात जरूर सुनी है कि “खड़े होकर पानी मत पियो, वरना बुढ़ापे में घुटने खराब हो जाएंगे और जोड़ों में दर्द रहने लगेगा।” उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली और मुंबई तक, भारत के लगभग हर घर में इस नियम को बहुत सख्ती से माना जाता है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब लोग ऑफिस के लिए लेट हो रहे होते हैं, जिम में वर्कआउट कर रहे होते हैं या सफर में होते हैं, तो अक्सर बोतल उठाकर खड़े-खड़े ही गटागट पानी पी जाते हैं। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि क्या वाकई खड़े होकर पानी पीने से हमारे घुटनों (Knees) और जोड़ों (Joints) को कोई नुकसान पहुंचता है? या फिर यह सदियों से चला आ रहा सिर्फ एक अंधविश्वास और मिथक (Myth) है? आज की इस विशेष स्वास्थ्य रिपोर्ट में हम आयुर्वेद और आधुनिक मेडिकल साइंस (Modern Medical Science) के जाने-माने एक्सपर्ट्स व डॉक्टरों की राय के जरिए इस सवाल की पूरी सच्चाई आपके सामने रखेंगे।
खड़े होकर पानी पीने और घुटनों के दर्द पर क्या कहता है मॉडर्न मेडिकल साइंस
सबसे पहले बात करते हैं आधुनिक चिकित्सा विज्ञान यानी एलोपैथी के डॉक्टरों और ऑर्थोपेडिक सर्जन्स (हड्डी रोग विशेषज्ञों) की। मेडिकल साइंस के एक्सपर्ट्स का साफ तौर पर कहना है कि खड़े होकर पानी पीने से घुटनों के खराब होने या जोड़ों में दर्द (Joint Pain) होने का कोई भी सीधा वैज्ञानिक प्रमाण (Scientific Evidence) मौजूद नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक, जब हम पानी पीते हैं, तो वह हमारी भोजन नली (Esophagus) से होते हुए सीधे पेट (Stomach) में जाता है और वहां से आंतों के जरिए अवशोषित होकर खून में मिलता है और अंत में किडनी द्वारा फिल्टर किया जाता है। मानव शरीर में ऐसी कोई भी पाइपलाइन नहीं है जिससे पिया गया पानी सीधे गुरुत्वाकर्षण बल (Gravity) के कारण फिसलकर घुटनों में चला जाए। घुटनों में दर्द होने के असली वैज्ञानिक कारण बढ़ती उम्र, शरीर में कैल्शियम और विटामिन D की कमी, यूरिक एसिड का बढ़ना, मोटापा (Obesity), आर्थराइटिस (गठिया) या फिर घुटनों की कार्टिलेज का घिसना होता है। इसलिए मेडिकल साइंस की नजर में खड़े होकर पानी पीने से घुटने खराब होने की बात महज एक मिथक है।
आयुर्वेद के अनुसार खड़े होकर पानी पीना क्यों माना जाता है खतरनाक
भले ही मॉडर्न साइंस घुटनों के दर्द से इसका सीधा संबंध न मानता हो, लेकिन भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति ‘आयुर्वेद’ (Ayurveda) में खड़े होकर पानी पीने (Drinking Water While Standing) को सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक बताया गया है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स के अनुसार, मानव शरीर वात, पित्त और कफ—इन तीन दोषों पर टिका होता है। जब कोई व्यक्ति खड़े होकर और तेजी से पानी पीता है, तो शरीर में ‘वात दोष’ (Vata Dosha) का संतुलन बिगड़ जाता है। आयुर्वेद में वात दोष को ही शरीर के सभी प्रकार के दर्द, विशेषकर जोड़ों के दर्द, गठिया (Arthritis) और घुटनों की समस्याओं का मुख्य जनक माना गया है। इसके अलावा, आयुर्वेद कहता है कि खड़े होने की मुद्रा में हमारा शरीर और मांसपेशियां तनाव (Tension) में होती हैं। ऐसे में जब हम तेजी से पानी पीते हैं, तो शरीर में तरल पदार्थों (Fluids) का संतुलन बिगड़ता है, जिससे लंबे समय बाद जोड़ों में मौजूद लुब्रिकेंट (ग्रीस) पर बुरा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि हमारे बुजुर्गों ने आयुर्वेद के इसी सिद्धांत को सरल भाषा में घुटनों के दर्द से जोड़कर हमें बैठकर पानी पीने की सलाह दी थी।
पाचन तंत्र और किडनी पर पड़ता है सीधा और बुरा असर
हेल्थ एक्सपर्ट्स और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (पेट रोग विशेषज्ञ) इस बात पर एकमत हैं कि खड़े होकर पानी पीने से भले ही घुटने तुरंत खराब न हों, लेकिन इससे हमारा पाचन तंत्र (Digestive System) जरूर प्रभावित होता है। जब हम खड़े होकर बड़ी-बड़ी घूंट में पानी पीते हैं, तो पानी बहुत तेजी से अन्नप्रणाली से गुजरते हुए पेट के निचले हिस्से की दीवार (Lower Stomach Wall) से टकराता है। इस तेज बहाव के कारण पेट के आसपास के अंगों और पाचन नली को झटका लगता है। लगातार ऐसा करने से पेट में एसिडिटी, सीने में जलन (Heartburn), अपच, गैस और पेट फूलने (Bloating) जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इतना ही नहीं, पानी के साथ-साथ हवा भी पेट में चली जाती है। इसके अलावा, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि खड़े होकर तेजी से पानी पीने पर पानी बिना ठीक से फिल्टर हुए किडनी (Kidneys) से तेजी से गुजर जाता है, जिससे खून और मूत्राशय (Bladder) में गंदगी जमा होने का खतरा बढ़ सकता है और आपकी प्यास भी पूरी तरह नहीं बुझती।
नर्वस सिस्टम और फेफड़ों के लिए भी सही नहीं है यह आदत
डॉक्टरों के मुताबिक, जब हम खड़े रहते हैं, तो हमारा नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) ‘फाइट ऑर फ्लाइट’ मोड में यानी थोड़ा अलर्ट और तनावपूर्ण स्थिति में रहता है। इसके विपरीत, जब हम आराम से बैठते हैं, तो हमारा ‘पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम’ एक्टिव हो जाता है, जो शरीर को रिलैक्स करता है। शांत और रिलैक्स अवस्था में पिया गया पानी ही शरीर के अंगों को सही तरीके से हाइड्रेट कर पाता है। इसके अलावा, खड़े होकर हरबड़ी में पानी पीने से सांस की नली (Windpipe) और भोजन नली में ऑक्सीजन की सप्लाई कुछ सेकंड के लिए बाधित होती है। कई बार खड़े होकर तेजी से पानी पीते समय पानी सांस की नली में जाने का भी खतरा रहता है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘चोकिंग’ (Choking) या धसका लगना कहते हैं, जो फेफड़ों और दिल के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
पानी पीने का सबसे सही और वैज्ञानिक तरीका क्या है? जानें एक्सपर्ट टिप्स
अगर आप चाहते हैं कि आपके द्वारा पिया गया पानी आपके शरीर के लिए अमृत का काम करे, तो एक्सपर्ट्स द्वारा बताए गए इन नियमों को आज से ही अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें। सबसे पहला नियम यह है कि जब भी पानी पिएं, कुर्सी पर या जमीन पर आराम से बैठकर ही पिएं, इससे आपकी मांसपेशियां और नर्वस सिस्टम शांत रहते हैं और पाचन बेहतरीन होता है। दूसरा नियम यह है कि पानी को कभी भी बोतल से ऊपर से गटागट न पिएं; हमेशा गिलास में लेकर छोटे-छोटे घूंट (Sip by Sip) भरकर धीरे-धीरे पिएं। ऐसा करने से मुंह में मौजूद लार (Saliva), जो कि क्षारीय (Alkaline) होती है, पानी के साथ मिलकर पेट में जाती है और पेट के एसिड को शांत रखती है। तीसरा नियम, फ्रिज का बहुत ज्यादा ठंडा (Chilled Water) पानी पीने से बचें, हमेशा सामान्य तापमान (Room Temperature) या हल्का गुनगुना पानी ही पिएं। और अंत में, खाना खाने के तुरंत बाद ढेर सारा पानी न पिएं, बल्कि खाने के कम से कम 30 से 45 मिनट बाद ही पानी का सेवन करें।
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