गुलशन कुमार की हत्या से लेकर टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग तक: जब-जब गैंगस्टरों के निशाने पर आए बॉलीवुड सितारे

ग्लैमर और चकाचौंध से भरी मायानगरी मुंबई का एक स्याह पहलू यह भी है कि यहां के सितारों पर हमेशा से आपराधिक सिंडिकेट और अंडरवर्ल्ड की नजरें गड़ी रही हैं। 18 अक्टूबर 2026 की शाम जुहू में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग ने फिल्म इंडस्ट्री में एक बार फिर पुराने खौफ को जिंदा कर दिया है। इस हमले में टाइगर सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति को गोली लगी। इस घटना की कथित जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े गुर्गों ने सोशल मीडिया पर ली। यह पहला मौका नहीं है जब किसी फिल्मी हस्ती को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया हो। 90 के दशक में दाऊद इब्राहिम और अबू सलेम के ‘डी-कंपनी’ दौर से लेकर आज सोशल मीडिया और जेलों से ऑपरेट करने वाले नए गैंगस्टरों तक, बॉलीवुड का यह खूनी सिलसिला दशकों से चला आ रहा है।

रंगदारी, विदेशी राइट्स की मांग, आपसी रंजिश या फिर आतंक फैलाने की नीयत से समय-समय पर बड़े फिल्ममेकर्स, म्यूजिक डायरेक्टर्स और ए-लिस्ट अभिनेताओं को गोलियों और धमकियों का सामना करना पड़ा है। आइए जानते हैं हिंदी सिनेमा के इतिहास के उन प्रमुख हमलों के बारे में, जिन्होंने पूरी इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था।

बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड के खूनी आतंक का सबसे बड़ा और भयावह चेहरा 12 अगस्त 1997 को सामने आया था। कैसेट किंग और टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार मुंबई के अंधेरी (जीतेश्वर महादेव मंदिर) में पूजा करके बाहर निकल रहे थे, तभी दिनदहाड़े बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ 16 गोलियां बरसाईं। मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी।

जांच में सामने आया था कि यह हमला अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और अबू सलेम के इशारे पर करवाया गया था। गुलशन कुमार से भारी रंगदारी (प्रोटेक्शन मनी) मांगी जा रही थी, जिसे देने से उन्होंने साफ इनकार कर दिया था। इस नृशंस हत्याकांड ने बॉलीवुड के भीतर डर का ऐसा माहौल बना दिया था कि कई बड़े निर्माता-निर्देशकों ने घर से निकलना और फोन उठाना तक बंद कर दिया था।

साल 2000 में ऋतिक रोशन की डेब्यू फिल्म ‘कहो ना… प्यार है’ ने बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता दर्ज की थी। इसी सफलता के कुछ ही दिनों बाद, 21 जनवरी 2000 को मुंबई के सांताक्रूज स्थित ऑफिस के बाहर फिल्ममेकर राकेश रोशन पर दो अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। एक गोली उनके कंधे और दूसरी सीने के पास लगी।

गंभीर हालत में उन्हें लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने समय रहते सर्जरी करके उनकी जान बचाई। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि अंडरवर्ल्ड डॉन अली बुदेश के शूटरों ने फिल्म के विदेशी राइट्स से मिलने वाले मुनाफे में हिस्सेदारी न देने पर राकेश रोशन को जान से मारने की नीयत से यह हमला किया था। इस घटना के बाद मुंबई पुलिस ने कई शीर्ष फिल्म निर्माताओं को 24 घंटे की कमांडो सुरक्षा दी थी।

नब्बे और दो हजार के दशक में सिर्फ गुलशन कुमार और राकेश रोशन ही नहीं, बल्कि कई बड़े फिल्ममेकर निशाने पर आए। 1997 में ‘गुप्त’ और ‘मोहरा’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाने वाले निर्देशक राजीव राय पर उनके तारदेव स्थित दफ्तर में हमलावरों ने गोलियां चलाईं। राजीव राय अपने सुरक्षा गार्ड की सूझबूझ से बच तो गए, लेकिन इस घटना से वे इतने सहम गए कि उन्होंने भारत छोड़कर ब्रिटेन में बसने का फैसला कर लिया।

इसी तरह एडलैब्स के संस्थापक मनमोहन शेट्टी पर 2000 में उनकी कार पर फायरिंग की गई थी। चर्चित फिल्म निर्देशक महेश भट्ट पर भी रवि पुजारी गैंग ने जानलेवा हमले की पूरी साजिश रच ली थी, जिसे मुंबई क्राइम ब्रांच ने ऐन वक्त पर शूटरों को गिरफ्तार करके नाकाम किया था। निर्माता साजिद नाडियाडवाला और यश चोपड़ा तक को अबू सलेम और छोटा शकील से फिरौती भरे फोन आते थे।

अंडरवर्ल्ड के पारंपरिक डॉन के कमजोर पड़ने के बाद हाल के वर्षों में लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने बॉलीवुड सितारों को डराना शुरू किया। 14 अप्रैल 2024 की सुबह मुंबई के बांद्रा स्थित सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर दो बाइक सवार शूटरों ने ताबड़तोड़ कई राउंड फायरिंग की। बिश्नोई गैंग 1998 के काले हिरण शिकार मामले को लेकर लंबे समय से सलमान को जान से मारने की धमकियां दे रहा था।

इसके बाद फरवरी 2026 में एक्शन फिल्मों के मशहूर डायरेक्टर रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर चार से पांच राउंड गोलियां चलाई गईं। इस फायरिंग का मकसद भी दहशत फैलाकर बड़ी वसूली करना था। इसके अलावा कॉमेडियन कपिल शर्मा के कनाडा स्थित कैफे पर तीन बार हुई गोलीबारी और पंजाबी गायक गिप्पी ग्रेवाल व एपी ढिल्लों के विदेशी ठिकानों पर हुए हमलों ने यह साबित किया कि फिल्म और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री आज भी संगठित आपराधिक सिंडिकेट के सीधे रडार पर है।

18 अक्टूबर 2026 को जुहू में फुटबॉल ग्राउंड से निकल रहे अभिनेता टाइगर श्रॉफ की बीएमडब्ल्यू कार पर हुई गोलीबारी इस कड़ी की सबसे ताजा घटना है। भीड़ के बीच से आए हमलावरों ने तीन से चार राउंड फायर किए। गोली कार के ड्राइवर फिरदौस के हाथ में लगी और पास से गुजर रहा एक ऑटो चालक भी घायल हुआ, जबकि टाइगर पूरी तरह सुरक्षित रहे।

हमले के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के विदेशी गुर्गों ने पोस्ट जारी कर दावा किया कि टाइगर को सलमान खान के साथ काम करने से मना करने के बावजूद न मानने पर यह ‘चेतावनी’ दी गई थी। महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस ने मामले में 15 विशेष टीमें गठित कर जांच तेज कर दी है। गुलशन कुमार से लेकर टाइगर श्रॉफ तक की ये घटनाएं साफ दर्शाती हैं कि सितारों की चमक-दमक के पीछे सुरक्षा का खतरा आज भी उतना ही संवेदनशील बना हुआ है।