दशहरा 2026: अबूझ मुहूर्त का महासंयोग, गाड़ी-प्रॉपर्टी की खरीदारी से लेकर नए व्यापार की शुरुआत के लिए क्यों है यह दिन सबसे खास

सनातन हिंदू संस्कृति में पर्व और त्योहारों की एक बेहद समृद्ध और पवित्र परंपरा रही है, जिसमें हर एक विशेष तिथि का अपना अलग ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व होता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला विजयदशमी यानी दशहरा (Dussehra 2026) का यह पावन पर्व मुख्य रूप से अधर्म पर धर्म की, असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की भव्य जीत के प्रतीक के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी ऐतिहासिक दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर पूरी सृष्टि को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। लेकिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस दिन की एक और सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विजयदशमी के पूरे दिन को ‘अबूझ मुहूर्त’ (Abujh Muhurat) माना जाता है। इस विशेष दिन पर बिना किसी पंचांग को देखे या पंडित से पूछे कोई भी नया शुभ कार्य शुरू किया जा सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस साल दशहरा 2026 की सही तिथि क्या है, रावण दहन का शुभ मुहूर्त कब है और इस दिन खरीदारी करना क्यों इतना अधिक फलदायी माना गया है।

क्या होता है ‘अबूझ मुहूर्त’ और क्यों खास है विजयदशमी का दिन

हिंदू पंचांग और भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, साल भर में कुछ ऐसी खास तिथियां आती हैं, जिन्हें अबूझ या स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है। इन तिथियों में अक्षय तृतीया, देवउठनी एकादशी और विजयादशमी का नाम सबसे ऊपर आता है। दशहरे के दिन ग्रहों और नक्षत्रों की चाल इतनी अधिक अनुकूल और सकारात्मक होती है कि इस दिन किसी भी कार्य को शुरू करने के लिए राहुकाल या अन्य अशुभ वेला का विचार नहीं किया जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ऊर्जा का स्तर अपने चरम पर होता है, जिसे ‘विजय काल’ कहा जाता है। यही कारण है कि इस पावन अवसर पर बिना पंचांग देखे किसी भी नए व्यापार की नींव रखी जा सकती है, नया वाहन (Car or Bike) खरीदा जा सकता है, मकान या जमीन की रजिस्ट्री कराई जा सकती है, या फिर सोने-चांदी के आभूषणों की खरीदारी की जा सकती है। इस दिन किए गए कार्यों में असफलता की संभावना न के बराबर होती है और मां लक्ष्मी तथा भगवान श्रीराम की कृपा से व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

दशहरा 2026 की सही तिथि और पंचांग का गणित

इस वर्ष यानी 2026 में दशहरा की तिथि और उसके सही समय को लेकर लोगों के मन में कई तरह के असमंजस और सवाल बने हुए हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से होगी, जबकि इस तिथि का समापन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा।

उदया तिथि (Udaya Tithi) के लिहाज से देखा जाए तो कुछ लोग 21 अक्टूबर को त्योहार मनाने की बात करते हैं, लेकिन सनातन धर्म में दशहरे का पर्व मुख्य रूप से प्रदोष काल और शाम के समय मनाए जाने वाले रावण दहन के आधार पर तय होता है। चूंकि रावण दहन और शस्त्र पूजा हमेशा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए ज्योतिषीय गणना के अनुसार 20 अक्टूबर को ही दशहरा मनाना सबसे उत्तम और श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन शाम के समय सभी धार्मिक अनुष्ठान और पुत दहन के कार्यक्रम संपन्न किए जाएंगे।

रावण दहन के लिए सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त

दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन करने के लिए एक विशेष समय का होना बहुत जरूरी माना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर दोपहर 02 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।

इसके अलावा, शाम के समय का प्रदोष काल 20 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा। शाम के इन पावन पलों में शस्त्र पूजन, अपराजिता पूजा और रावण दहन करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। इस दौरान बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

नई गाड़ी, प्रॉपर्टी और व्यापार की शुरुआत के लिए क्यों है यह महासंयोग

व्यापारियों, युवाओं और नया आशियाना या गाड़ी खरीदने का सपना देखने वाले लोगों के लिए दशहरा किसी वरदान से कम नहीं है। ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में राजा-महाराजा भी अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए इसी दिन अपने रथों और शस्त्रों की पूजा करके रणक्षेत्र में निकलते थे। आधुनिक समय में इस परंपरा का स्वरूप बदल गया है, लेकिन इसका महत्व आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

यदि आप लंबे समय से कोई नई कार, मोटरसाइकिल, नया फ्लैट, प्लॉट या कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदने की सोच रहे हैं, या फिर किसी नए स्टार्टअप और बिजनेस की शुरुआत करना चाहते हैं, तो 20 अक्टूबर 2026 के इस अबूझ मुहूर्त का पूरा लाभ उठाएं। इस दिन की गई खरीदारी घर में लंबे समय तक बरकत, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है। इसलिए बिना किसी संकोच के इस विजयदशमी पर अपने नए जीवन और नए वेंचर की शुरुआत करें।