
सनातन संस्कृति और पर्व-त्योहारों के इस पवित्र दौर में शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri 2026) का पावन पर्व बेहद धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। आज 17 अक्टूबर 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बहुत ही खास रहने वाला है। आज नवरात्रि का सातवां दिन है, जो माता रानी के अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली स्वरूप मां कालरात्रि (Maa Kalaratri) की आराधना को समर्पित है। इसके साथ ही आज के दिन पंचांग में कई दुर्लभ योग, नक्षत्र परिवर्तन और सूर्य की राशि में बदलाव यानी तुला संक्रांति का महासंयोग भी बन रहा है। आइए एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी आनंद सागर पाठक के अनुसार जानते हैं आज 17 अक्टूबर का संपूर्ण दैनिक पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और विशेष धार्मिक महत्व।
आज का पंचांग और मुख्य तिथियां
वैदिक पंचांग के अनुसार, आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है, जो संपूर्ण रात्रि तक विद्यमान रहेगी। आज शनिवार का दिन है और संवत 2083 चल रहा है। नवरात्र की सप्तमी तिथि को आदि शक्ति मां दुर्गा के उग्र और भय का नाश करने वाले स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से मां की आराधना करने से जातक के जीवन से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, अकाल मृत्यु का भय और बाधाएं दूर होती हैं। इसके अलावा आज के दिन विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की प्रधान पूजा का भी विशेष अवसर है, जिसमें विद्यार्थी और साधक विशेष रूप से मां शारदा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति एवं नक्षत्र का प्रभाव
आज के दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति बेहद खास बदलाव लेकर आई है। पंचांग के अनुसार, आज सूर्योदय सुबह 6:23 बजे और सूर्यास्त सायं 5:50 बजे होगा। चंद्रमा दोपहर 12:27 बजे उदित होंगे और रात्रि 10:31 बजे अस्त होंगे।
आज का दिन खगोलीय और ज्योतिषीय लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज तुला संक्रांति का संयोग बन रहा है। आज सूर्य देव कन्या राशि से निकलकर सायं 7:57 बजे तुला राशि में प्रवेश करेंगे। वहीं, चंद्र देव आज धनु राशि में स्थित रहेंगे। नक्षत्रों की बात करें तो आज प्रातः 9:47 बजे तक मूल नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का आरंभ होगा। मूल नक्षत्र के स्वामी केतु और देवता निर्ऋति हैं, जो जीवन में गंभीरता, आध्यात्मिकता और आत्म-चिंतन का प्रतीक माने जाते हैं।
आज के शुभ मुहूर्त और अभिजीत समय
यदि आप आज के दिन कोई नया कार्य, वाहन खरीदारी, गृह प्रवेश या मांगलिक अनुष्ठान शुरू करना चाहते हैं, तो पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्तों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आज का दिन माता की पूजा के लिए उत्तम है:
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक (यह समय किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए बेहद श्रेष्ठ माना जाता है)।
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सरस्वती पूजा (पूर्वाषाढ़ा) मुहूर्त: दोपहर 3:32 बजे से शाम 5:50 बजे तक (अवधि: 2 घंटे 17 मिनट)। इस दौरान विद्यार्थी विद्या और बुद्धि प्राप्ति के लिए मां सरस्वती की विशेष आराधना कर सकते हैं।
आज के अशुभ समय और राहुकाल की जानकारी
ज्योतिष शास्त्र में किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले राहुकाल और अशुभ समय का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है। आज के दिन निम्नलिखित समय पर विशेष सावधानी बरतें:
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राहुकाल: प्रातः 9:15 बजे से प्रातः 10:40 बजे तक (इस दौरान किसी भी नए या मांगलिक कार्य को करने से बचना चाहिए)।
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गुलिकाल: प्रातः 6:23 बजे से प्रातः 7:49 बजे तक।
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यमगण्ड: दोपहर 1:32 बजे से दोपहर 2:58 बजे तक।
नवरात्र सप्तमी और मां कालरात्रि की महिमा
शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व है। माता का यह स्वरूप दुष्टों का नाश करने वाला और भक्तों को अभय प्रदान करने वाला है। आज के दिन विधि-विधान से मां कालरात्रि का पूजन करने, उनके मंत्रों का जाप करने और गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाने से घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। साथ ही, तुला संक्रांति और मूल नक्षत्र के इस पावन संयोग में किए गए धार्मिक कार्य अनंत गुना फलदायी होते हैं।
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