ब्रिटेन में भारतीय छात्रों को मिली खुलेआम धमकी, नस्लीय हिंसा से मचा हड़कंप

उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य का सपना लेकर यूनाइटेड किंगडम यानी ब्रिटेन (UK) पहुंचे भारतीय छात्रों की सुरक्षा पर एक बार फिर बहुत बड़ा और खौफनाक सवालिया निशान खड़ा हो गया है। ब्रिटेन के प्रमुख शहरों में पढ़ाई कर रहे भारतीय युवाओं को अचानक नस्लीय नफरत, उत्पीड़न और खुलेआम धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक भारतीय छात्रों को निशाना बनाते हुए कड़े शब्दों में कहा जा रहा है कि ‘इंग्लैंड में क्या करने आए हो, यहां दोबारा दिख मत जाना।’ इस सनसनीखेज और खौफनाक घटनाक्रम के सामने आने के बाद ब्रिटेन में रह रहे हजारों भारतीय छात्रों, उनके परिवारों और भारत सरकार के कूटनीतिक गलियारों में भारी चिंता और खलबली मच गई है। ब्रिटेन के कई हिस्सों में हाल के दिनों में उभरे अति-दक्षिणपंथी और प्रवासियों के खिलाफ भड़के माहौल के बीच भारतीय युवाओं को मिल रही इन धमकियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तहलका मचा दिया है। आइए एक स्वतंत्र इंटरनेशनल रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि जमीनी स्तर पर इस वक्त भारतीय छात्रों की स्थिति क्या है और ब्रिटेन पुलिस व प्रशासन इस पर क्या कदम उठा रहा है।

ब्रिटेन के लंदन, बर्मिंघम, मैनचेस्टर और लीसेस्टर जैसे प्रमुख शहरों में स्थित नामी विश्वविद्यालयों में लाखों भारतीय छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से इन छात्रों को निशाना बनाकर खुलेआम भड़काऊ और नस्ली टिप्पणियां की जा रही हैं। स्थानीय प्रवासियों के खिलाफ जारी हिंसात्मक विरोध प्रदर्शनों की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व भारतीय छात्रों के किराए के मकानों, हॉस्टलों और सार्वजनिक परिवहन के स्थानों पर उनके साथ बदसलूकी कर रहे हैं। कई छात्रों ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन्हें बस स्टॉप, शॉपिंग मॉल और यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर रोककर यह धमकी दी गई कि वे तुरंत अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर अपने देश वापस लौट जाएं, वरना उनके साथ कुछ भी बुरा हो सकता है। यह नस्ली जहर सिर्फ सड़कों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी भारतीय छात्रों को डराने-धमकाने वाले मैसेज भेजे जा रहे हैं।

ब्रिटेन में पिछले कुछ महीनों से अर्थव्यवस्था में सुस्ती, आवास संकट और स्थानीय नौकरियों में आ रही दिक्कतों को लेकर स्थानीय नागरिकों और अति-दक्षिणपंथी समूहों के बीच भारी असंतोष और गुस्सा देखा जा रहा है। इन समूहों का आरोप है कि ब्रिटेन में बाहर से आ रहे प्रवासियों की वजह से स्थानीय लोगों के अधिकार छीने जा रहे हैं। हालांकि, भारतीय छात्र ब्रिटेन में कानूनी तौर पर वीजा हासिल करके, लाखों-करोड़ों रुपये की फीस चुकाकर और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए पढ़ाई करने पहुंचते हैं। इसके बावजूद, प्रवासियों के प्रति उपजे इस अंधे आक्रोश का शिकार सीधे तौर पर निर्दोष भारतीय छात्रों को बनाया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि वे देर रात अपनी पार्ट-टाइम जॉब्स या लाइब्रेरी से वापस लौटते वक्त बेहद डरे और सहमे हुए महसूस करते हैं, क्योंकि सड़कों पर असामाजिक तत्वों का हुड़दंग लगातार बढ़ता जा रहा है।

ब्रिटेन में भारतीय छात्रों को मिल रही इस खुली धमकी और नस्ली हमले की खबरों का संज्ञान लेते हुए लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग (Indian High Commission) ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया है। भारतीय दूतावास ने यूके सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन के सामने इस मामले को बेहद गंभीरता से उठाया है और भारतीय नागरिकों तथा छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उच्चायोग ने यूके में रह रहे सभी भारतीय छात्रों के लिए एक विशेष सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है। एडवाइजरी में छात्रों को सलाह दी गई है कि वे बिना किसी अति-आवश्यक काम के रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचें, विरोध प्रदर्शन या भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस तथा भारतीय उच्चायोग के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।

इधर भारत में पंजाब, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में रहने वाले परिजन अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित और तनाव में हैं। जो माता-पिता अपनी जिंदगी भर की कमाई और भारी-भरकम एजुकेशन लोन लेकर अपने बच्चों को एक सुरक्षित भविष्य के लिए ब्रिटेन भेजते हैं, वे आज टीवी और अखबारों में आ रही इन खबरों को देखकर रात-रात भर सो नहीं पा रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूके सरकार ने समय रहते इन नस्ली ताकतों पर सख्त लगाम नहीं कसी, तो ब्रिटेन की वैश्विक स्तर पर जो एजुकेशन हब के रूप में साख है, वह पूरी तरह से मिट्टी में मिल जाएगी। आने वाले समय में भारतीय छात्र यूके के बजाय कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या जर्मनी जैसे देशों का रुख कर सकते हैं, जिससे ब्रिटिश अर्थव्यवस्था और विश्वविद्यालयों को भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ सकता है।