
यदि आपके पास ₹2,50,000 की एकमुश्त पूंजी है और आप बिना किसी बाजार जोखिम के 5 साल की अवधि के लिए सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न चाहते हैं, तो दो पारंपरिक साधन सबसे लोकप्रिय हैं—बैंक की 5-वर्षीय फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और डाकघर की राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र (NSC)। दोनों ही योजनाओं में भारत सरकार या आरबीआई का सुरक्षा कवच मिलता है, लेकिन जब बात मैच्योरिटी पर मिलने वाले शुद्ध पैसे (Net Return) और ब्याज के कंपाउंडिंग की आती है, तो दोनों के बीच एक स्पष्ट अंतर नजर आता है।
| तुलनात्मक मापदंड | नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) | शीर्ष बैंक 5-वर्षीय FD (उदा. SBI/HDFC) |
| वर्तमान ब्याज दर | 7.70% वार्षिक | 6.50% – 7.00% वार्षिक |
| कंपाउंडिंग फ्रीक्वेंसी | सालाना कंपाउंडिंग (वार्षिक चक्रवृद्धित) | तिमाही कंपाउंडिंग (Quarterly Compounding) |
| मूलधन (Principal) | ₹2,50,000 | ₹2,50,000 (सामान्य 6.75% दर पर) |
| 5 साल में कुल अर्जित ब्याज | ₹1,12,259 | ₹99,444 |
| 5 साल बाद कुल मैच्योरिटी राशि | ₹3,62,259 | ₹3,49,444 |
| सीधा मुनाफा अंतर | ₹12,815 ज्यादा | — |
नोट: वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए बैंक 5-वर्षीय एफडी पर 0.50% से 0.75% अतिरिक्त ब्याज (लगभग 7.25% से 7.50%) देते हैं, जिससे उनकी एफडी की मैच्योरिटी लगभग ₹3.58 लाख से ₹3.62 लाख के करीब पहुंचती है।
-
उच्च ब्याज दर: केंद्र सरकार की इस लघु बचत योजना पर वर्तमान में 7.7% वार्षिक ब्याज दर मिल रही है, जो अधिकांश बड़े सरकारी और निजी बैंकों की 5-वर्षीय एफडी दरों से 0.70% से 1.20% तक अधिक है।
-
सॉवरेन गारंटी (शून्य जोखिम): यह योजना सीधे भारत सरकार द्वारा समर्थित है, इसलिए इसमें जमा आपकी पूरी पूंजी (मूलधन + ब्याज) शत-प्रतिशत सुरक्षित है।
-
कोई टीडीएस नहीं (No TDS at Source): एनएससी की मैच्योरिटी पर पोस्ट ऑफिस द्वारा कोई टीडीएस (TDS) नहीं काटा जाता। पूरा पैसा सीधे आपके बचत खाते में ट्रांसफर होता है।
-
तिमाही कंपाउंडिंग: बैंक एफडी का एक फायदा यह होता है कि इसमें ब्याज हर तीन महीने (Quarterly) पर चक्रवृद्धित होता है, लेकिन ब्याज दर कम होने के कारण यह एनएससी की 7.7% की दर की बराबरी नहीं कर पाती।
-
टीडीएस कटौती: यदि किसी वित्तीय वर्ष में आपका एफडी ब्याज ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से अधिक होता है, तो बैंक नियमानुसार 10% टीडीएस काट लेता है।
-
डीआईसीजीसी बीमा सीमा: बैंक एफडी पर डीआईसीजीसी (DICGC) के तहत अधिकतम ₹5 लाख तक की ही सुरक्षा गारंटी होती है।
यदि आप पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत टैक्स फाइल करते हैं, तो दोनों विकल्पों में धारा 80C का लाभ मिलता है, लेकिन ब्याज पर टैक्स के नियम थोड़े भिन्न हैं:
-
निवेश पर छूट:
-
₹2.5 लाख में से ₹1.5 लाख तक का निवेश धारा 80C के तहत टैक्स कटौती के लिए पात्र है (चाहे वह 5-वर्षीय टैक्स सेवर एफडी हो या एनएससी)। शेष ₹1 लाख पर कोई 80C छूट नहीं मिलेगी।
-
-
अर्जित ब्याज पर टैक्स का अनोखा नियम (NSC का री-इन्वेस्टमेंट एडवांटेज):
-
बैंक एफडी: हर साल अर्जित होने वाला ब्याज आपकी आय (Income from Other Sources) में जुड़ता है और आपके संबंधित टैक्स स्लैब के अनुसार पूरी तरह कर योग्य होता है।
-
एनएससी: एनएससी में पहले 4 वर्षों तक हर साल जमा होने वाला ब्याज चूंकि बाहर नहीं निकाला जाता, बल्कि दोबारा निवेश (Re-invest) हो जाता है, इसलिए वह ब्याज भी धारा 80C की ₹1.5 लाख की सीमा के भीतर कटौती के रूप में क्लेम किया जा सकता है (यदि आपकी 80C की लिमिट खाली है)। केवल 5वें वर्ष का ब्याज पूरी तरह कर योग्य होता है।
-
-
सामान्य नागरिकों (General Category) के लिए: यदि आपकी उम्र 60 वर्ष से कम है, तो एनएससी (NSC) स्पष्ट रूप से विजेता है। इसमें ₹2.5 लाख पर 5 साल बाद लगभग ₹12,800 से ₹13,000 अधिक शुद्ध रिटर्न मिलता है और ब्याज दर सरकार द्वारा लॉक रहती है।
-
वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए: वरिष्ठ नागरिकों को कई बैंकों (जैसे एसबीआई वीकेयर या स्मॉल फाइनेंस बैंक) में 7.50% से 7.75% तक की एफडी दरें मिल जाती हैं। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को धारा 80TTB के तहत ₹50,000 तक के एफडी ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिक बैंक एफडी का विकल्प भी चुन सकते हैं।
girls globe