
यूनाइटेड किंगडम (UK) में लंबे समय से सख्त वीजा पाबंदियों और कंपनियों की मनमानी से जूझ रहे लाखों विदेशी कामगारों के लिए ब्रिटिश सरकार ने एक राहत भरा और युगांतरकारी फैसला लिया है। यूके के गृह मंत्रालय (Home Office) ने स्किल्ड वर्कर वीजा (Skilled Worker Visa) और हेल्थ एंड केयर वर्कर वीजा से जुड़े नियमों में अहम संशोधन करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि अब किसी शोषणकारी या अनैतिक कंपनी से नौकरी छोड़ने पर विदेशी कर्मचारियों का वीजा और वर्क परमिट स्वतः रद्द नहीं किया जाएगा। पहले के कठोर नियमों के तहत, विदेशी कर्मचारी का वीजा सीधे तौर पर उसके प्रायोजक (Sponsoring Employer) से बंधा होता था। यदि कोई कर्मचारी खराब कार्य परिस्थितियों, कम वेतन, बंधुआ मजदूरी जैसी स्थिति या मानसिक प्रताड़ना के चलते नौकरी छोड़ता था, तो उसका वीजा तत्काल ‘कर्टेलमेंट’ (Curtailment) के दायरे में आ जाता था और उसे 60 दिनों के भीतर नई स्पॉन्सरशिप न मिलने पर देश छोड़ना पड़ता था। नए प्रावधानों के तहत ब्रिटेन सरकार ने विदेशी पेशेवरों को यह कानूनी सुरक्षा दे दी है कि वे बिना अपना इमिग्रेशन स्टेटस गंवाए ऐसी दमनकारी कंपनियों की गिरफ्त से बाहर निकल सकते हैं और अपनी मौजूदा वीजा अवधि के दौरान दूसरी जगह काम कर सकते हैं।
ब्रिटेन में पिछले कुछ वर्षों में विशेषकर ब्रेक्जिट के बाद नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS), सोशल केयर सेक्टर, हॉस्पिटैलिटी, आईटी और निर्माण क्षेत्र में भारी लेबर शॉर्टेज को पूरा करने के लिए लाखों विदेशी कामगारों को स्पॉन्सरशिप वीजा पर बुलाया गया था। इनमें भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देशों के प्रोफेशनल्स की संख्या सबसे अधिक थी। हालांकि, इस व्यवस्था में एक गंभीर संरचनात्मक खामी थी—वीजा का मालिकाना हक पूरी तरह नियोक्ता कंपनी के नियंत्रण में था। इसके चलते कई बेईमान और फर्जी एजेंसियों (Rogue Agencies) ने विदेशी कर्मचारियों का जमकर फायदा उठाना शुरू कर दिया। कई मामलों में सामने आया कि विदेशी केयर वर्कर्स से नौकरी दिलाने के नाम पर 10,000 से 20,000 पाउंड तक की अवैध फीस वसूली गई, उन्हें न्यूनतम वेतन से कम भुगतान किया गया, अत्यधिक घंटे काम कराया गया और शिकायत करने पर तुरंत वीजा रद्द कराने और देश से डिपोर्ट कराने की खुली धमकियां दी गईं। चूंकि ब्रिटेन के आव्रजन नियमों के तहत स्किल्ड वर्कर वीजा धारकों को सरकारी कल्याणकारी फंड (No Recourse to Public Funds – NRPF) का लाभ नहीं मिलता, इसलिए कामगार बेसहारा होने के डर से घुट-घुटकर काम करने को मजबूर थे।
ब्रिटिश गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई विदेशी कर्मचारी किसी ऐसी कंपनी में फंसा है जो आधुनिक दासता (Modern Slavery), वेतन चोरी या श्रम मानकों के गंभीर उल्लंघन में लिप्त है, तो उसे तत्काल सुरक्षा कवच प्रदान किया जाएगा:
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वीजा स्टेटस की निरंतरता: प्रताड़ित या शोषित कर्मचारी द्वारा नौकरी छोड़ने पर उसका वीजा स्टेटस रद्द नहीं होगा, बल्कि उसे अपनी मूल वीजा अवधि की शेष बची समय-सीमा तक ब्रिटेन में कानूनी रूप से रहने की अनुमति रहेगी।
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अन्यथा काम करने का अधिकार: कर्मचारी को अपनी आजीविका चलाने के लिए अन्य अनुमोदित नियोक्ताओं के पास काम करने की तत्काल छूट दी जाएगी, जिससे उन्हें वेतनहीन रहने या बेघर होने की नौबत न आए।
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60 दिनों की तलवार हटी: सामान्य परिस्थितियों में स्पॉन्सरशिप खत्म होने पर मिलने वाली 60 दिनों की संकीर्ण समय-सीमा के मानसिक दबाव को कम किया गया है, ताकि कामगार बिना किसी हड़बड़ाहट के अपने करियर को दोबारा पटरी पर ला सकें।
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शिकायत पर डिपोर्टेशन का डर खत्म: कामगार अब होम ऑफिस और श्रम आयोग को बेझिझक शोषण की शिकायत दर्ज करा सकते हैं, क्योंकि शिकायत दर्ज करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कोई प्रतिशोधात्मक आव्रजन कार्रवाई नहीं की जाएगी।
ब्रिटेन में विदेशी श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ गृह मंत्रालय ने नियमों का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ देशव्यापी स्तर पर अब तक का सबसे बड़ा कार्रवाई अभियान चलाया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, एक साल के भीतर रिकॉर्ड 4,400 से अधिक नियोक्ता कंपनियों के स्पॉन्सर लाइसेंस निलंबित या पूरी तरह रद्द कर दिए गए हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में 140 प्रतिशत से अधिक का भारी उछाल है। यूके आव्रजन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो कंपनियां विदेशी कामगारों को केवल कागजों पर रखकर टैक्स चोरी करती हैं, या उनसे मोटी रकम लेकर उन्हें उचित घंटे काम नहीं देती हैं, उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। गृह मंत्रालय ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि एक तरफ जहां पीड़ित कामगारों को संरक्षण मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ कामगारों का शोषण करने वाले दुष्ट स्पॉन्सर्स पर कानून का पूरा शिकंजा कसा जाएगा।
इस नीतिगत बदलाव का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष लाभ ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय समुदाय को मिलने जा रहा है। भारत ब्रिटेन के स्किल्ड वर्कर और हेल्थकेयर वीजा रूट पर कर्मचारियों को भेजने वाला सबसे बड़ा स्रोत देश है। हजारों भारतीय नर्सें, केयरगिवर्स, फिजियोथेरेपिस्ट, आईटी प्रोफेशनल्स और शेफ ब्रिटेन के विभिन्न शहरों जैसे लंदन, बर्मिंघम, मैनचेस्टर, लीड्स और ग्लासगो में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से कई लोगों को स्थानीय केयर होम संचालकों द्वारा निर्धारित घंटों से कम काम देने या वीजा कैंसिलेशन की धमकी देकर कम पैसे देने की शिकायतें सामने आ रही थीं। अब भारतीय कामगार बिना किसी कानूनी खौफ के ऐसी शोषणकारी कंपनियों को छोड़ सकेंगे। इसके अलावा, एक नियोक्ता से दूसरे वैध स्पॉन्सर के पास स्विच करने की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी डिजिटल और तेज बनाया जा रहा है ताकि भारतीय टैलेंट को अपने करियर में आगे बढ़ने के निर्बाध अवसर मिल सकें।
ब्रिटिश सरकार के अनुसार, यह सुधार उनकी व्यापक ‘इमिग्रेशन व्हाइट पेपर’ प्रतिबद्धताओं का एक अहम हिस्सा है, जिसका मुख्य लक्ष्य विदेशी कर्मचारियों की किसी एक विशिष्ट कंपनी पर निर्भरता को कम करना है। सरकार का मानना है कि एक लचीला और न्यायसंगत श्रम बाजार ही ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकता है। जब कामगारों को यह आजादी होगी कि वे गलत कार्यस्थल को छोड़कर बेहतर कंपनी में जा सकें, तो इससे पूरे उद्योग जगत में वेतन और कार्यस्थल की सुरक्षा के मानकों में स्वतः सुधार होगा। ब्रिटेन में काम कर रहे किसी भी विदेशी नागरिक के लिए यह नियम एक मजबूत कानूनी ढाल बनकर उभरा है, जिससे दलाल स्ट्रीट से लेकर लंदन के वित्तीय व स्वास्थ्य गलियारों तक भारतीय प्रोफेशनल्स में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
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