
सनातन धर्म में शक्ति उपासना का महापर्व नवरात्रि देवी दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित एक अत्यंत पावन और फलदायी समय माना जाता है। इस दौरान भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत, पूजन, घटस्थापना और सात्विक नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि केवल फलाहार या उपवास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस पवित्र अवधि में दैनिक जीवन से जुड़ी कई गतिविधियों को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने का विधान है। शास्त्रों और लोक परंपराओं में नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान सुई, धागे, कैंची या किसी भी नुकीली वस्तु के प्रयोग को लेकर कई कड़े नियम बताए गए हैं। ऐसा माना जाता है कि पूजा-पाठ के इन पावन दिनों में अनजाने में की गई छोटी सी भूल भी व्रत के पूर्ण फल से वंचित कर सकती है और घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकती है।
पौराणिक मान्यताओं और बुजुर्गों की परंपरा के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों में किसी भी प्रकार के वस्त्रों की सिलाई, तुरपाई या कटी-फटी चीजों को सुई-धागे से जोड़ने का काम पूरी तरह से वर्जित माना गया है। इसके पीछे मुख्य धार्मिक तर्क यह है कि सुई और कैंची जैसी धातु की नुकीली चीजें ‘हिंसा’ और ‘काटने’ का प्रतीक मानी जाती हैं, जबकि नवरात्रि का पर्व सृजन, प्रेम, पवित्रता और शांति का प्रतीक है। मां दुर्गा की पूजा के दौरान किसी भी ऐसी वस्तु का स्पर्श या प्रयोग जो चुभने या काटने का काम करती हो, उसे शुभ कार्यों में बाधा डालने वाला माना जाता है। इसके अतिरिक्त, सिलाई के दौरान कपड़ों को काटने और सुई चुभाने की क्रिया से घर में नकारात्मक स्पंदन (Negative Vibrations) पैदा होते हैं, जो पूजा-पाठ के सात्विक वातावरण को प्रभावित कर सकते हैं।
ज्योतिषशास्त्र और व्रत नियमों के जानकारों के मुताबिक, नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त, संधि पूजा का समय, दोपहर का समय और संध्या आरती के दौरान सुई-धागे का उपयोग कतई नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, जिन घरों में अखंड ज्योत प्रज्वलित की गई हो या घटस्थापना (कलश स्थापना) हुई हो, वहां सुई-धागा चलाना और कपड़े सिलना देवी प्रकोप का कारण बन सकता है। मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में सुई-धागे का इस्तेमाल करने से घर के सदस्यों के आपसी रिश्तों में खटास और कड़वाहट आती है, बने-बनाये काम बिगड़ने लगते हैं और आर्थिक उन्नति में रुकावटें आने लगती हैं। यही वजह है कि पारंपरिक परिवारों में नवरात्रि शुरू होने से पहले ही सिलाई या सिलाई सुधार से जुड़े सारे कार्य पूरे कर लिए जाते हैं।
यदि किसी कारणवश या अनजाने में आपसे नवरात्रि के दौरान सुई-धागे का इस्तेमाल हो जाता है, तो इसके लिए धर्मशास्त्रों में क्षमा-प्रार्थना का विधान है। ऐसी स्थिति में देवी दुर्गा के समक्ष दीप जलाकर अपनी भूल के लिए क्षमा मांगें और माता के मंत्रों का जाप करें। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति पेशवर रूप से दर्जी (Tailor) है और उसका जीवनयापन इसी कार्य पर निर्भर है, या फिर किसी आकस्मिक स्थिति में बहुत जरूरी काम आ पड़े, तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति पूजा-पाठ समाप्त करने के बाद और सात्विक मन से कार्य कर सकता है, लेकिन पूजा के मुख्य समय और कलश स्थापना के स्थान के पास यह कार्य करने से बचना चाहिए। नवरात्रि के पावन पर्व पर मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना बेहद फलदायी होता है।
girls globe