
सर्दियों की दस्तक के साथ ही जब दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण और धुंध का साया गहराने लगता है, तब वाहनों से निकलने वाले धुएं पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति (Delhi EV Policy 2026) धरातल पर तेजी से असर दिखाने लगी है। राष्ट्रीय राजधानी में स्वच्छ ईंधन और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए घोषित किए गए बड़े ईवी पैकेज के तहत अब तक 2,707 इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों को 7.61 करोड़ रुपये की सीधी खरीद प्रोत्साहन (Purchase Incentive) राशि वितरित की जा चुकी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, नीति लागू होने के शुरुआती तीन महीनों के भीतर ही 7,700 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं और कुल मिलाकर लगभग 7.91 करोड़ रुपये की राशि सब्सिडी व इंसेंटिव के रूप में जारी हो चुकी है। सरकार का यह आक्रामक वित्तीय समर्थन न केवल राजधानी में जीवाश्म ईंधन पर चलने वाले वाहनों की संख्या को घटाने में मददगार साबित हो रहा है, बल्कि आम नागरिकों को पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से राहत दिलाते हुए पर्यावरण-अनुकूल आवागमन अपनाने के लिए सीधे तौर पर प्रेरित कर रहा है।
दिल्ली सरकार के इस व्यापक ईवी पैकेज की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि सरकार ने सिर्फ नकद सब्सिडी तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि नए इलेक्ट्रिक वाहनों की ऑन-रोड कीमत को बेहद किफायती बनाने के लिए दोहरे टैक्स का बोझ पूरी तरह हटा दिया है।
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शून्य रोड टैक्स (Zero Road Tax): दिल्ली में खरीदे और पंजीकृत होने वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों पर 100% रोड टैक्स माफ कर दिया गया है। आमतौर पर पेट्रोल या डीजल कार खरीदने पर 8 से 12 फीसदी तक रोड टैक्स चुकाना पड़ता था, जिससे अब खरीदार को सीधे तौर पर एक से डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा की एकमुश्त बचत हो रही है।
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रजिस्ट्रेशन फीस में पूरी छूट: आरटीओ में नई गाड़ी का नंबर लेने के लिए लगने वाले रजिस्ट्रेशन शुल्क को भी शून्य कर दिया गया है।
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बैटरी क्षमता के आधार पर सीधी छूट: इलेक्ट्रिक दोपहिया (स्कूटर व बाइक) पर बैटरी क्षमता के अनुसार 30,000 रुपये तक की खरीद सब्सिडी दी जा रही है, जबकि ई-ऑटो और तिपहिया वाहनों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज निर्धारित किए गए हैं।
दिल्ली सरकार की इस नई पहल का एक और बेहद महत्वपूर्ण पहलू ‘स्क्रैपेज इंसेंटिव’ (Scrappage Incentive) है, जिसका उद्देश्य राजधानी की सड़कों से 10 से 15 साल पुरानी, धुआं उगलने वाली खटारा गाड़ियों को हमेशा के लिए हटाना है।
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यदि कोई नागरिक अपने पुराने 15 साल पुराने पेट्रोल स्कूटर या बाइक को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त स्क्रैपेज सेंटर पर नष्ट कराता है और उसके बदले नया इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदता है, तो उसे 10,000 रुपये का अतिरिक्त स्क्रैपिंग इंसेंटिव मिलता है।
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पुरानी प्रदूषणकारी कारों को स्क्रैप कराने पर और नई इलेक्ट्रिक कार अपनाने पर अधिकतम 1 लाख रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
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स्क्रैपिंग का यह सर्टिफिकेट और नई गाड़ी की खरीद का सत्यापन पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज हो जाता है, जिससे खरीदार को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
दलालों और लालफीताशाही से मुक्त पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार ने विशेष ‘Delhi EV Subsidy Portal’ सक्रिय किया है, जिसके जरिए पूरी प्रक्रिया कैशलेस और फेसलेस हो गई है:
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30 दिनों के भीतर ऑनलाइन आवेदन: नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने और आरटीओ से स्थायी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) जारी होने के 30 दिनों के भीतर खरीदार को आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन सबमिट करना होता है।
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जरूरी दस्तावेज: आवेदक को अपनी नई गाड़ी की आरसी, आधार कार्ड, बैंक खाते की पासबुक/कैंसिल्ड चेक और दिल्ली का निवास प्रमाण पत्र पोर्टल पर अपलोड करना होता है।
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डीबीटी से सीधे खाते में ट्रांसफर: दस्तावेजों के डिजिटल वेरिफिकेशन के बाद 60 दिनों के भीतर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सब्सिडी की पूरी रकम सीधे खरीदार के आधार-लिंक्ड बैंक अकाउंट में जमा करा दी जाती है।
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स्टेटस ट्रैकिंग: आवेदक अपने मोबाइल नंबर और एप्लिकेशन आईडी के जरिए घर बैठे अपने क्लेम की लाइव स्थिति ट्रैक कर सकते हैं।
वित्तीय प्रोत्साहन देने के साथ-साथ दिल्ली सरकार का मुख्य फोकस शहर भर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मजबूत नेटवर्क को खड़ा करने पर है, ताकि वाहन चालकों को बीच रास्ते में बैटरी खत्म होने (Range Anxiety) का डर न सताए। नई ईवी नीति के अंतर्गत अगले चार वर्षों में पूरे एनसीआर क्षेत्र में 30,000 से अधिक नए चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग पॉइंट्स स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए आवासीय सोसायटियों, मॉल, मेट्रो स्टेशनों, पेट्रोल पंपों और सार्वजनिक पार्किंग स्थलों में रियायती बिजली दरों पर फास्ट चार्जर्स लगाए जा रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों और ऑटोमोबाइल जानकारों का मानना है कि सब्सिडी का यह सीधा और त्वरित वितरण दिल्ली में ग्रीन ट्रांजिशन की गति को कई गुना बढ़ा देगा। यदि इसी रफ्तार से नागरिक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ते रहे, तो दिल्ली आने वाले वर्षों में न केवल देश की बल्कि दुनिया के सबसे स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त शहरों की सूची में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराने में सफल होगी।
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