12 अक्टूबर से कनाडाई वाणिज्य मंत्री का अहम दौरा, ऐतिहासिक CEPA ट्रेड डील और अरबों डॉलर के निवेश पर टिकीं दुनिया की नजरें

भारत और कनाडा के आर्थिक रिश्तों में एक नए दौर की शुरुआत होने जा रही है। कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री 12 से 17 अक्टूबर तक भारत के बहुप्रतीक्षित आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। पिछले कुछ समय के कूटनीतिक तनाव के बाद यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को दोबारा पटरी पर लाने और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस छह दिवसीय उच्चस्तरीय यात्रा में न सिर्फ दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते यानी कॉम्प्रीहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) को अंतिम रूप देने की दिशा में गंभीर बातचीत होगी, बल्कि दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच नए व्यावसायिक तालमेल का खाका भी तैयार किया जाएगा। यह दौरा केवल दिल्ली के गलियारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और टेक हब बेंगलुरु में भी कनाडाई प्रतिनिधिमंडल भारतीय उद्योगपतियों, निवेशकों और नीति निर्माताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करेगा। लगभग 300 सदस्यीय कनाडाई व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ हो रहा यह दौरा पिछले तीन दशकों में कनाडा की ओर से भारत आने वाला सबसे बड़ा वाणिज्यिक मिशन है। इस यात्रा के केंद्र में ऊर्जा सुरक्षा, आधुनिक तकनीक, खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर बनाए रखने जैसे वैश्विक मुद्दे शामिल हैं।

भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता अब अपने निर्णायक दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। दोनों देश चाहते हैं कि व्यापारिक बाधाओं और उच्च सीमा शुल्कों को घटाकर एक ऐसा संतुलित ढांचा तैयार किया जाए जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद साबित हो। नई दिल्ली में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ होने वाली बैठक में इस समझौते के कानूनी, तकनीकी और नीतिगत पहलुओं पर आमने-सामने चर्चा होगी। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सिर्फ वस्तुओं के आयात-निर्यात को सुगम बनाना नहीं है, बल्कि दोनों देशों के सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) को एक नई गति देना भी है। भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, फिनटेक डेवलपर्स, वित्तीय विश्लेषकों और इंजीनियरों के लिए कनाडा का बाजार एक व्यापक अवसर प्रस्तुत करता है, वहीं कनाडाई कंपनियों के लिए भारत की विशाल घरेलू मांग और तेज आर्थिक वृद्धि एक आकर्षक केंद्र है। समझौते के लागू होने से भारत के कपड़ा, रत्न-आभूषण, चमड़ा, इंजीनियरिंग गुड्स और कृषि उत्पादों को कनाडाई बाजार में शून्य या बेहद कम शुल्क पर सीधी पहुंच मिल सकेगी। इसके साथ ही कनाडाई पोटाश, दलहन, लकड़ी के उत्पाद और आधुनिक तकनीकी उपकरण भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध हो सकेंगे। दोनों देशों की वाणिज्यिक प्राथमिकताओं में यह स्पष्ट है कि भू-राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद व्यापार को अलग रखकर प्रगति की राह पर आगे बढ़ा जाए।

इस यात्रा का भौगोलिक दायरा बेहद रणनीतिक रूप से तय किया गया है। दौरे की शुरुआत मुंबई में देश के शीर्ष कॉर्पोरेट लीडर्स, प्रमुख वित्तीय संस्थानों और पेंशन फंड प्रबंधकों के साथ संवाद से होगी। कनाडा के पेंशन फंड्स जैसे सीदारपीआईबी और सीडीपीक्यू पहले से ही भारत के बुनियादी ढांचे, रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश कर चुके हैं। मुंबई में होने वाली बैठकों का उद्देश्य इन दीर्घकालिक निवेशों का विस्तार करना और भारत के नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन में कनाडाई पूंजी के नए रास्तों को तलाशना है। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल का रुख बेंगलुरु की तरफ होगा, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और स्पेस-टेक पर काम कर रहे भारतीय इनोवेटर्स के साथ तकनीकी साझेदारी पर मंथन होगा। कनाडा का टेक इकोसिस्टम टोरंटो और वैंकूवर जैसे शहरों में काफी तेजी से विकसित हुआ है, और बेंगलुरु के साथ इस गठबंधन से दोनों देशों के स्टार्टअप्स को जॉइंट वेंचर्स, क्रॉस-बॉर्डर फंडिंग और तकनीकी आदान-प्रदान का सीधा लाभ मिलेगा। यह साझेदारी केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की नई तकनीकों के संयुक्त रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए एक सशक्त मंच तैयार करेगी।

आधुनिक विश्व में स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और डिजिटल क्रांति के लिए क्रिटिकल मिनरल्स रीढ़ की हड्डी बन चुके हैं। कनाडा लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट और यूरेनियम जैसे दुर्लभ खनिजों के मामले में दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में से एक है। भारत अपनी महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति, बैटरी स्टोरेज लक्ष्यों और सौर ऊर्जा पहलों के लिए इन खनिजों की सुरक्षित और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करना चाहता है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स पार्टनरशिप पर एक ठोस रूपरेखा बनने की प्रबल संभावना है। कनाडाई वाणिज्य मंत्री की टीम भारतीय सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ खनन, शोधन और वैल्यू-चेन क्रिएशन में दीर्घकालिक समझौतों पर विचार करेगी। इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन, बायोफ्यूल और कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं को गति देने पर भी बातचीत होगी। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से भारत और कनाडा का यह रणनीतिक तालमेल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की आर्थिक सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगा।

व्यापार और अर्थव्यवस्था के अलावा इस यात्रा का एक अत्यंत संवेदनशील और मानवीय पहलू भारतीय प्रवासियों, छात्रों और कुशल कामगारों से जुड़ा हुआ है। कनाडा में रहने वाला भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करता है। कूटनीतिक तनाव के कारण पिछले कुछ समय में वीजा प्रसंस्करण, छात्र परमिट और यात्रा सुगमता को लेकर जो चिंताएं पैदा हुई थीं, उन पर भी इस यात्रा के दौरान सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाए जाने की पूरी उम्मीद है। व्यापारिक सुगमता के लिए बिजनेस वीजा को फास्ट-ट्रैक करना, पेशेवरों की आवाजाही को सरल बनाना और शैक्षणिक सहयोग को सुगम रखना दोनों पक्षों की व्यापारिक प्राथमिकताओं का अभिन्न हिस्सा है। भारतीय कुशल प्रतिभा की मांग कनाडा के कई सेक्टरों में लगातार बनी हुई है, और एक पारदर्शी, स्थिर नीतिगत वातावरण दोनों देशों के बीच भरोसे को बहाल करने का काम करेगा।