चीन के मुंह से भारत ने छीना LPG का खजाना, समुद्र के बीच ईरान से खरीदा जहाज, रुपये में हुई डील से दुनिया हैरान

Post

News India Live, Digital Desk: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच मचे घमासान से पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच भारत ने एक ऐसा कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक खेला है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। साल 2019 से अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण बंद पड़े भारत-ईरान ऊर्जा व्यापार ने अचानक एक नई करवट ली है। एलपीजी के दुनिया के दूसरे सबसे बड़े आयातक भारत ने बीच समंदर में अपनी कूटनीति का ऐसा लोहा मनवाया है कि चीन भी देखता रह गया। दरअसल, ईरान से चीन के लिए निकला लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) से भरा एक विशालकाय जहाज भारत ने बीच समंदर में ही अपने नाम कर लिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस महा-डील का भुगतान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा डॉलर में नहीं, बल्कि भारतीय रुपये में किया जाएगा।

ट्रंप की छूट और भारत का मास्टरस्ट्रोक इस पूरी कहानी के पीछे अमेरिका की एक रणनीतिक चाल भी है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों को काबू में रखने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट दी गई थी, जिसका भारत ने तुरंत और भरपूर फायदा उठाया। प्रतिष्ठित शिपिंग डेटा एजेंसी (LSEG) की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ऑरोरा’ नाम का एक प्रतिबंधित पोत भारी मात्रा में ईरानी एलपीजी लेकर आज मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंचने वाला है। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यह कार्गो मूल रूप से चीन की प्यास बुझाने के लिए निकला था, लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों और भारत की फुर्ती के चलते इसे बीच रास्ते से ही भारत की ओर मोड़ लिया गया। रॉयटर्स के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह खेप एक अंतरराष्ट्रीय ट्रेडर के जरिए खरीदी गई है और भारत गर्व से इसका पूरा पेमेंट अपने रुपये में करेगा।

दशकों के सबसे बड़े गैस संकट से मिलेगी राहत भारत इस समय गैस आपूर्ति के दशकों के सबसे गंभीर संकट से जूझ रहा है। देश की 60 फीसदी एलपीजी मांग पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट और होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह चरमरा गई थी, जिसके चलते सरकार को मजबूरी में उद्योगों की गैस आपूर्ति में कटौती करनी पड़ी थी ताकि आम आदमी के घरों का चूल्हा जलता रहे। अब ईरान से आ रही ‘ऑरोरा’ की इस जीवनदायिनी खेप को देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों— इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के बीच बांटा जाएगा, जिससे घरेलू रसोई गैस की किल्लत काफी हद तक दूर हो जाएगी।

युद्ध के बीच सफल रेस्क्यू और नई तैयारी पश्चिम एशिया के बेहद तनावपूर्ण और खतरनाक हालात के बीच भारत सरकार सिर्फ गैस ही नहीं खरीद रही, बल्कि अपने जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए युद्ध स्तर पर मुस्तैद है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फंसे भारत के शिवालिक, नंदा देवी, पाइन गैस और जग वसंत जैसे चार टैंकरों को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाल लिया गया है। इसके साथ ही फारस की खाड़ी में खड़े खाली जहाजों पर भी तेजी से एलपीजी लोड करने का काम शुरू कर दिया गया है, ताकि आने वाले दिनों में देश की ऊर्जा सुरक्षा पर किसी भी तरह की कोई आंच न आए।

–Advertisement–