
हिमालयी राज्य उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं, विशेष रूप से भूकंप के खतरों से निपटने की पूर्व तैयारियों को परखने के लिए राज्य सरकार और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। आज सुबह ठीक 11:00 बजे पूरे प्रदेश में एक साथ भूकंप चेतावनी सायरन बजाए जाएंगे। आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों से स्पष्ट अपील की है कि सायरन की आवाज सुनकर किसी भी प्रकार की घबराहट, भगदड़ या भ्रम की स्थिति पैदा न करें। यह पूरी तरह से एक पूर्व-निर्धारित तकनीकी परीक्षण (मॉक टेस्ट) है। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को डराना नहीं, बल्कि उन्हें भूकंप चेतावनी सायरन की ध्वनि से भलीभांति परिचित कराना है, ताकि भविष्य में वास्तविक आपातकाल के समय लोग तुरंत अलर्ट होकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकें।
बीते 6 अक्टूबर को चमोली जिले के थराली क्षेत्र में 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। चूंकि उत्तराखंड का अधिकांश हिस्सा भूकंपीय संवेदनशीलता के लिहाज से ‘सिस्मिक जोन-4’ और ‘जोन-5’ (अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्र) में आता है, इसलिए सरकार ने आपदा पूर्व तैयारियों को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन द्वारा की गई उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद यह तय किया गया है कि अब प्रत्येक माह की 9 तारीख को सुबह ठीक 11 बजे पूरे प्रदेश में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली (Earthquake Early Warning System) का नियमित मॉक परीक्षण किया जाएगा।
आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) के तकनीकी सहयोग से संचालित इस परियोजना के तहत वर्तमान में उत्तराखंड के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में 169 सिस्मिक सेंसर और 112 हाई-डेसिबल सायरन स्थापित किए जा चुके हैं। आज होने वाले इस व्यापक परीक्षण के दौरान कंट्रोल रूम से सिग्नल भेजकर इन सभी सायरनों और सेंसर्स की रिस्पॉन्स टाइमिंग जांची जाएगी। यदि किसी पहाड़ी या दूरदराज के क्षेत्र में नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या, तकनीकी खराबी या आवाज कम होने की शिकायत सामने आती है, तो आपदा प्रबंधन की तकनीकी टीम उसे तुरंत दुरुस्त करेगी। सरकार की योजना इस नेटवर्क को दोगुना करने की है, जिसके तहत हर 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में नए सेंसर और सायरन लगाने का प्रस्ताव प्रगति पर है।
सायरन के साथ-साथ आम जनता के स्मार्टफोन्स पर भी तकनीकी अलर्ट का परीक्षण किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए ‘भूदेव’ (Bhudev) मोबाइल ऐप के पंजीकृत उपयोगकर्ताओं के फोन पर सुबह 11 बजे एक विशेष ‘टेस्ट वार्निंग मैसेज’, तेज वाइब्रेशन और लगातार ‘बीप-बीप’ की ध्वनि सुनाई देगी। आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपने स्मार्टफोन में भूदेव ऐप को हमेशा अपडेट रखें और उसकी ‘लोकेशन परमिशन’ को हमेशा के लिए सक्रिय (Enable) रखें, जिससे वास्तविक भूकंप की स्थिति में प्राथमिक तरंगों (P-waves) के आधार पर विनाशकारी तरंगों (S-waves) के पहुंचने से कुछ सेकंड पहले ही जीवनरक्षक चेतावनी मिल सके।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने लोगों से इस व्यवस्था को गंभीरता से समझने और मॉक टेस्ट के दौरान निम्नलिखित सावधानियां बरतने की अपील की है:
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ध्वनि को पहचानें: सायरन और मोबाइल बीप की आवाज को ध्यान से सुनें ताकि वास्तविक आपात स्थिति में इसे तुरंत पहचाना जा सके।
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अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया या पड़ोस में किसी भी तरह की अनहोनी की अफवाह न फैलाएं और न ही उस पर विश्वास करें।
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बच्चों और बुजुर्गों को समझाएं: घर के बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को पहले से बता दें कि यह केवल एक तकनीकी जांच है ताकि वे अचानक आवाज सुनकर विचलित न हों।
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सुरक्षा प्रोटोकॉल याद रखें: भूकंप आने पर ‘झुको, ढको और पकड़ो’ (Drop, Cover, and Hold On) के बुनियादी नियम का अभ्यास करें और लिफ्ट के इस्तेमाल से बचें।
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