
देश के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में खुदरा (Retail) और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) कर्ज वितरण को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक व तकनीकी बदलाव आकार लेने जा रहा है। केंद्र सरकार के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वाणिज्यिक और सहकारी बैंकों को ऋण स्वीकृति (Loan Sanctioning) और वितरण (Disbursement) की पूरी प्रक्रिया को शत-प्रतिशत डिजिटल और पेपरलेस बनाने का स्पष्ट टास्क सौंपा है। अब तक जहां पर्सनल लोन, होम लोन, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या बिजनेस लोन लेने के लिए ग्राहकों को बैंक शाखाओं के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, फिजिकल इनकम प्रूफ और सैलरी स्लिप के बंडल जमा करने पड़ते थे, वहीं अब आधुनिक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के जरिए ‘मिनटों में इन-प्रिंसिपल अप्रूवल’ और कुछ ही घंटों में खाते में लोन की रकम ट्रांसफर करने की व्यवस्था को अनिवार्य मानक बनाया जा रहा है।
रिजर्व बैंक की इनोवेशन हब (RBIH) द्वारा विकसित पब्लिक टेक प्लेटफॉर्म फॉर फ्रिक्शनलेस क्रेडिट (PTPFC) इस पूरे डिजिटल कायाकल्प की धुरी है। केंद्रीय बैंक ने सभी सरकारी और निजी बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपने कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) और लोन ओरिजिन सिस्टम (LOS) को इस केंद्रीय प्लेटफॉर्म से एकीकृत करें:
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डेटा का सीधा डिजिटल प्रवाह: यह प्लेटफॉर्म केंद्रीय और राज्य सरकारों के डिजिटल डेटाबेस, भूमि रिकॉर्ड (डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स), जीएसटीएन (GSTN), बिजली वितरण कंपनियों और पैन-आधार डेटाबेस से सीधे जुड़ा हुआ है।
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दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन की जरूरत खत्म: जब कोई किसान या छोटा कारोबारी कर्ज के लिए आवेदन करेगा, तो बैंक को जमीन की खतौनी, बिजली बिल या जीएसटी रिटर्न की हार्ड कॉपी मांगने की जरूरत नहीं होगी। ग्राहक की स्पष्ट डिजिटल सहमति (Consent) के बाद प्लेटफॉर्म सीधे सरकारी सर्वर से डेटा फेच कर लेगा।
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समय और लागत में भारी कमी: पारंपरिक ऋण स्वीकृति में औसतन 2 से 4 सप्ताह का समय लगता था, जिसे इस प्रणाली के जरिए घटाकर मात्र कुछ मिनटों से अधिकतम 24 घंटे के भीतर समेटने का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही बैंकों की परिचालन लागत में भी 70% तक की कमी आएगी।
डिजिटल लोन वितरण का दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ अकाउंट एग्रीगेटर (AA) इकोसिस्टम है। इसके तहत कर्जदार अपने बैंक खातों की वित्तीय हिस्ट्री को सुरक्षित तरीके से लेंडर के साथ साझा कर सकते हैं:
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बैंक स्टेटमेंट की झंझट खत्म: पहले लोन के लिए पिछले 6 महीने से 1 साल का बैंक स्टेटमेंट डाउनलोड करके, प्रिंट कराकर या पीडीएफ बनाकर बैंक को देना पड़ता था, जिसमें वित्तीय धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का अंदेशा रहता था।
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सुरक्षित व एन्क्रिप्टेड डेटा शेयरिंग: अकाउंट एग्रीगेटर के जरिए आवेदक अपने मोबाइल पर आए ओटीपी के जरिए कुछ ही सेकंड्स में अपना आधिकारिक वित्तीय डेटा बैंक को डिजिटल रूप से उपलब्ध करा देता है। इससे बैंक का अंडरराइटिंग एल्गोरिदम रियल-टाइम में कैश फ्लो, आय स्थिरता और कर्ज चुकाने की क्षमता का पारदर्शी मूल्यांकन कर लेता है।
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डिजिटल ई-हस्ताक्षर और ई-एनएसीएच (e-NACH): लोन समझौते (Loan Agreement) पर हस्ताक्षर करने के लिए अब शाखा जाने की आवश्यकता नहीं होगी। आधार ई-साइन और ऑटो-डेबिट के लिए ई-मैंडेट मोबाइल पर ही पूरे हो जाएंगे।
पारंपरिक लोन प्रक्रिया बनाम नया पूर्ण डिजिटल मॉडल
| प्रक्रिया / चरण | पारंपरिक लोन मॉडल (पुराना ढांचा) | नया डिजिटल क्रेडिट मॉडल (PTPFC & AA) |
| दस्तावेजीकरण (Documentation) | सैलरी स्लिप, आईटीआर, जमीन के पर्चे, बैंक स्टेटमेंट की हार्ड कॉपी | आधार ई-केवाईसी, डिजिलॉकर और अकाउंट एग्रीगेटर से 100% पेपरलेस |
| सत्यापन (Verification) | फिजिकल फील्ड वेरिफिकेशन, थर्ड-पार्टी एजेंट जांच | सेटेलाइट डेटा, डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स और डेटाबेस से ऑटो-वेरिफिकेशन |
| समय-सीमा (Turnaround Time) | न्यूनतम 7 दिन से 30 दिन तक | 5 मिनट में सैद्धांतिक स्वीकृति, 2 से 24 घंटे में डिस्बर्सल |
| पारदर्शिता व लागत | बार-बार शाखा के चक्कर, भारी प्रोसेसिंग व लीगल फीस | घर बैठे ट्रैकिंग, कम प्रोसेसिंग चार्ज और न्यूनतम हिडन कॉस्ट |
| सुरक्षा | कागजातों के गुम होने या छेड़छाड़ का जोखिम | एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और डिजिटल ऑडिट ट्रेल |
रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय ने बैंकों को अपनी डिजिटल लेंडिंग क्षमताओं को केवल मेट्रो शहरों तक सीमित न रखकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक तेजी से ले जाने का निर्देश दिया है:
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केसीसी और कृषि ऋण का डिजिटलाइजेशन: मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड के सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब इसे राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू किया जा रहा है, जिससे किसानों को पटवारी या बैंक शाखा के चक्कर लगाए बिना खाद-बीज के लिए तुरंत संस्थागत कर्ज मिल सके।
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एमएसएमई के लिए अनसिक्योर्ड क्रेडिट: जीएसटी इनवॉइस और डिजिटल यूपीआई लेनदेन के आधार पर छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को बिना किसी कोलैटरल (बंधक संपत्ति) के तत्काल कार्यशील पूंजी ऋण (Working Capital Loan) उपलब्ध कराने के लिए बैंकों को ऑटोमेटेड स्कोरिंग मॉडल बनाने का काम सौंपा गया है।
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वित्तीय धोखाधड़ी पर सख्त नियंत्रण: डिजिटल प्रक्रियाओं के साथ-साथ बैंकों को अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल, फेशियल रिकॉग्निशन (Video KYC) और जियो-टैगिंग को और मजबूत करने को कहा गया है ताकि किसी भी तरह के डिजिटल फ्रॉड या अनाधिकृत लोन ऐप्स के जाल से उपभोक्ताओं को बचाया जा सके।
इस संपूर्ण डिजिटलाइजेशन से देश के आम नागरिकों को तीन प्रमुख स्तरों पर राहत मिलेगी:
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दलालों और बिचौलियों का खात्मा: लोन स्वीकृति की प्रक्रिया सीधे एल्गोरिदम और डेटा आधारित होने से स्थानीय स्तर पर कमीशनखोरी और बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
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क्रेडिट हिस्ट्री न होने पर भी कर्ज संभव: न्यू-टू-क्रेडिट (NTC) ग्राहक—जिनका पहले से कोई सिबिल स्कोर नहीं है—वे भी अपने डिजिटल बिल भुगतान, यूपीआई लेनदेन और जीएसटी डेटा के आधार पर औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से सस्ता कर्ज प्राप्त कर सकेंगे।
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पारदर्शी ब्याज दरें: बैंक के डिजिटल पोर्टल पर आवेदक को लोन की ब्याज दर, ईएमआई और सभी लागू शुल्क (Key Fact Statement – KFS) स्पष्ट रूप से पहले ही स्क्रीन पर दिखाई देंगे, जिससे भविष्य में किसी भी छिपे हुए चार्ज का डर नहीं रहेगा।
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