
इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल (IPL) के गलियारों से इस वक्त क्रिकेट जगत को हिला देने वाली एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) फ्रेंचाइजी ने आगामी सीजन के लिए एक मास्टरस्ट्रोक खेलते हुए भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और ‘प्रिंस ऑफ कोलकाता’ के नाम से मशहूर सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) को टीम का नया हेड कोच नियुक्त कर दिया है। गांगुली के पास फ्रेंचाइजी क्रिकेट का लंबा अनुभव है और वे पहले भी टीम के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में जुड़ चुके हैं। इस बड़े कोचिंग बदलाव के बाद से ही क्रिकेट प्रेमियों के मन में यह सवाल सबसे तेजी से उठ रहा है कि क्या ‘दादा’ के मार्गदर्शन में दिल्ली कैपिटल्स आखिरकार अपना पहला आईपीएल खिताब जीतने का सूखा खत्म कर पाएगी? इतना ही नहीं, कोचिंग स्टाफ में हुए इस बदलाव के बाद टीम की कप्तानी को लेकर भी अंदरखाने सुगबुगाहट तेज हो गई है और आने वाले दिनों में कप्तानी में भी एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। आइए जानते हैं कि सौरव गांगुली के हेड कोच बनने के बाद दिल्ली कैपिटल्स की रणनीति में क्या-क्या बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।
आईपीएल के आगामी सीजन को ध्यान में रखते हुए दिल्ली कैपिटल्स प्रबंधन ने अपनी पूरी रणनीति में आमूल-चूल परिवर्तन करने का मन बना लिया है। इसी कड़ी में टीम ने सौरव गांगुली को मुख्य कोच यानी हेड कोच की बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है। गांगुली का क्रिकेटिया दिमाग और खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकलवाने की उनकी काबिलियत से पूरी दुनिया वाकिफ है। उन्होंने अतीत में भी भारतीय टीम को एक नई दिशा दी थी और कई युवा खिलाड़ियों को तराशने में अहम भूमिका निभाई थी। दिल्ली कैपिटल्स की टीम पिछले कई सत्रों से लगातार शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद नॉकआउट मुकाबलों या खिताबी मुकाबले में आकर चूक जाती थी। ऐसे में प्रबंधन का मानना है कि गांगुली का अनुशासित नेतृत्व और उनका विजयी दृष्टिकोण (Winning Mentality) टीम के ड्रेसिंग रूम का माहौल पूरी तरह बदल सकता है। उनके इस पद पर आने से न केवल कोचिंग स्टाफ मजबूत हुआ है, बल्कि खिलाड़ियों के अंदर भी एक नया आत्मविश्वास जागृत हुआ है।
सौरव गांगुली के हेड कोच बनने के बाद से ही इस बात पर कयासों का बाजार गर्म हो गया है कि क्या दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी में भी कोई बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है। क्रिकेट गलियारों में चर्चा है कि गांगुली अपनी पसंद और टीम की लंबी अवधि की रणनीति के हिसाब से एक नए कप्तान के साथ मैदान पर उतरना चाहते हैं। हालांकि, टीम के पास पहले से ही कई अनुभवी और युवा विकल्प मौजूद हैं, लेकिन ‘दादा’ की कप्तानी शैली हमेशा से आक्रामक और दूरदर्शी रही है, ऐसे वे टीम की बागडोर किसी ऐसे खिलाड़ी के हाथ में सौंपना चाहते हैं जो मैदान पर रणनीतिक रूप से पूरी तरह आक्रामक हो सके। इस संभावित कप्तानी परिवर्तन की खबर ने फैंस के बीच उत्सुकता को और अधिक बढ़ा दिया है, और हर कोई यह जानने के लिए बेताब है कि आगामी नीलामी (Auction) और सीजन से पहले दिल्ली की कमान किसके कंधों पर सजेगी।
दिल्ली कैपिटल्स उन चुनिंदा फ्रेंचाइजियों में शामिल है जिन्होंने आज तक एक भी बार आईपीएल की ट्रॉफी अपने नाम नहीं की है, जबकि टीम के पास हर साल कागजों पर बेहद मजबूत और संतुलित स्क्वाड मौजूद रहता है। टीम की इस पुरानी कमजोरी को दूर करने के लिए ही सौरव गांगुली को यह कमान सौंपी गई है। गांगुली का इतिहास गवाह रहा है कि जब भी उन्होंने किसी टीम की लीडरशिप संभाली है, उस टीम ने हार मान चुके हालात से भी लड़कर जीत हासिल करना सीखा है। वे खिलाड़ियों के ऊपर से मानसिक दबाव को कम करने और उन्हें अपनी पूरी क्षमता के साथ खुलकर खेलने की आजादी देने के लिए जाने जाते हैं। यदि वे अपनी इस रणनीति में कामयाब होते हैं, तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस बार दिल्ली कैपिटल्स का खेमा आईपीएल के इतिहास में पहली बार चैंपियन बनकर उभर सकता है, जिसका इंतजार पिछले कई सालों से दिल्ली के लाखों फैंस शिद्दत से कर रहे हैं।
मुख्य कोच की कुर्सी संभालते ही सौरव गांगुली ने बिना वक्त गंवाए आगामी खिलाड़ियों की नीलामी और रिटेंशन पॉलिसी पर अपना होमवर्क शुरू कर दिया है। उनकी प्राथमिकता टीम की कमजोर कड़ियों को पहचानना और ऐसे मैच विनर्स को अपने साथ जोड़ना है जो कठिन परिस्थितियों में टीम को जीत दिला सकें। गांगुली हमेशा से युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के प्रबल समर्थक रहे हैं, इसलिए इस बार दिल्ली के स्क्वाड में कुछ घरेलू क्रिकेट के चमकते सितारों को भी बड़ा मौका मिलने की पूरी संभावना है। उनके इस रणनीतिक ब्लूप्रिंट से यह साफ हो जाता है कि दिल्ली कैपिटल्स इस बार सिर्फ नाम के लिए नहीं, बल्कि एक अजेय और चैंपियन मानसिकता के साथ मैदान पर उतरेगी, जिससे बाकी सभी विरोधी टीमों की मुश्किलें बढ़ने तय हैं।
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