भारत-स्विट्जरलैंड के बीच 5 बड़े ऐतिहासिक समझौते: माइग्रेशन और मोबिलिटी से लेकर ट्रांसपोर्ट, स्टार्टअप और न्यूक्लियर एनर्जी तक मजबूत होगी साझेदारी

भारत और स्विट्जरलैंड के दशकों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों ने उस समय एक ऐतिहासिक और रणनीतिक छलांग लगाई जब दोनों देशों ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में पांच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए। स्विट्जरलैंड परिसंघ के राष्ट्रपति गाय पारमेलिन (Guy Parmelin) के भारत के आधिकारिक दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता में व्यापार, निवेश, नवाचार, माइग्रेशन, पर्यावरण-अनुकूल परिवहन और परमाणु ऊर्जा सहयोग के पूरे खाके को अंतिम रूप दिया गया। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ भारत के ‘ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ (TEPA) के व्यावहारिक कार्यान्वयन के ठीक बाद हुई यह बैठक दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने जा रही है। इसके तहत अगले 15 वर्षों में भारत में $100 बिलियन (लगभग ₹8.3 लाख करोड़) का भारी-भरकम स्विस व यूरोपीय निवेश आकर्षित करने और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर तेजी से काम शुरू हो गया है।

दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित समझौतों में सबसे क्रांतिकारी और बहुप्रतीक्षित कदम ‘माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप’ (MMP) समझौता है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के वैध नागरिकों की सुरक्षित, व्यवस्थित और निर्बाध आवाजाही को बढ़ावा देना है, जबकि मानव तस्करी, शोषण और अनियमित प्रवासन पर संयुक्त रूप से सख्त अंकुश लगाना है। इस समझौते के तहत योग्य भारतीय नागरिकों को 5 वर्ष तक की वैधता वाला ‘मल्टीपल-एंट्री वीजा’ दिया जाएगा, जिसके जरिए प्रत्येक यात्रा पर लगातार 6 महीने तक रुकने की आधिकारिक अनुमति होगी। इसके अलावा, स्विट्जरलैंड में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले भारतीय विद्यार्थियों के लिए 1 साल की अवधि वाले रिन्यूएबल (नवीकरणीय) छात्र परमिट की व्यवस्था की गई है, जिससे भारतीय युवाओं के लिए यूरोप के सर्वश्रेष्ठ शोध संस्थानों में पढ़ाई और रिसर्च करना पहले से कहीं अधिक सुगम हो जाएगा।

दोनों देशों के युवाओं के कौशल विकास और करियर ग्रोथ को नई दिशा देने के लिए ‘यंग प्रोफेशनल्स स्कीम’ (YPS) को आधिकारिक मंजूरी दी गई है। इस व्यवस्था के तहत भारत और स्विट्जरलैंड के अर्हता प्राप्त युवा पेशेवरों (Young Professionals) का सीमित अवधि के लिए आदान-प्रदान किया जाएगा। शुरुआती चरण में प्रति वर्ष दोनों देशों से 300-300 युवा प्रोफेशनल्स को एक-दूसरे के देश में जाकर कॉरपोरेट कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और तकनीकी फर्मों में प्रत्यक्ष रोजगार और व्यावहारिक कार्य अनुभव हासिल करने का अवसर मिलेगा। दोनों सरकारों की आपसी सहमति से इस कोटे को भविष्य में बढ़ाकर 500 पेशेवर प्रति वर्ष तक विस्तारित किया जा सकेगा। इससे भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स को अंतरराष्ट्रीय कार्य संस्कृति को समझने, विदेशी भाषाएं सीखने और वैश्विक नेटवर्क बनाने में सीधी मदद मिलेगी।

बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के क्षेत्र में भारत के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और स्विट्जरलैंड के आर्थिक मामलों के संघीय विभाग के बीच एक विस्तृत समझौता हुआ है। स्विट्जरलैंड को दुनिया भर में कठिन पर्वतीय इलाकों में टनलिंग (सुरंग निर्माण), अत्याधुनिक रोपवे प्रणालियों और टिकाऊ ट्रांसपोर्टेशन में महारत हासिल है। इस समझौते के तहत दोनों देश इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नेक्स्ट-जेनरेशन अर्बन ट्रांसपोर्ट, सर्कुलर इकोनॉमी और हिमालयी व पहाड़ी क्षेत्रों में टनल नेटवर्क बिछाने में एक-दूसरे के साथ विश्वस्तरीय तकनीक साझा करेंगे। पीएम मोदी ने इस अवसर पर विशेष रूप से उल्लेख किया कि वाराणसी का अर्बन रोपवे प्रोजेक्ट और जेवर में बन रहा नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहले से ही भारत-स्विस इंफ्रास्ट्रक्चर साझेदारी के उत्कृष्ट और जीवंत उदाहरण हैं।

उद्यमिता और डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और स्विट्जरलैंड की प्रतिष्ठित ‘ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज’ के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इनोवेशन पर विशेष कार्यान्वयन व्यवस्था तय की गई है। इस समझौते के तहत अर्ली-स्टेज भारतीय स्टार्टअप्स के लिए ‘इंडो-स्विस एकेडमिया-इंडस्ट्री ट्रेनिंग’ (AIT India) प्रोग्राम का विस्तार किया जाएगा। इसके जरिए भारतीय हेल्थ-टेक, क्लीन एनर्जी, एग्री-टेक और स्पेस-टेक स्टार्टअप्स को स्विस मेंटर्स, वेंचर कैपिटलिस्ट्स और वैश्विक प्रयोगशालाओं तक सीधी पहुंच हासिल होगी। इसके साथ ही दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अधिक जिम्मेदार, पारदर्शी और मानव-केंद्रित (Human-Centric) बनाने के लिए एक संयुक्त एआई गवर्नेंस मॉडल विकसित करने पर भी पूर्ण सहमति जताई है।

वैज्ञानिक अनुसंधान के दायरे को व्यापक बनाते हुए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन (SNSF) के बीच दीर्घकालिक सहयोग का ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ साइन किया गया है। इसके तहत लाइफ साइंसेज, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोटेक्नोलॉजी और स्पेस साइंस के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान के लिए एक नया ‘फ्लैगशिप रिसर्च प्रोग्राम’ शुरू किया जाएगा। वार्ता के दौरान व्यापार और विज्ञान के अलावा रक्षा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने पर भी गंभीर चर्चा हुई। भारत और स्विट्जरलैंड असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा विनिर्माण की नई संभावनाएं तलाशने पर सहमत हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों का यह बहुआयामी सहयोग आने वाले दशकों में वैश्विक शांति, आर्थिक आत्मनिर्भरता और तकनीकी नवाचार की दिशा में एक मजबूत वैश्विक धुरी साबित होगा।