PPF मैच्योरिटी के बाद पैसा निकालना भूल गए? तो खाते में पड़ी रकम का क्या होगा और आपके पास कौन से हैं ऑप्शन?

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) में 15 वर्षों तक अनुशासित बचत करने के बाद कई बार खाताधारक मैच्योरिटी की सही तारीख भूल जाते हैं या व्यस्तता के चलते बैंक या डाकघर नहीं पहुंच पाते। ऐसे में खाताधारकों के मन में पहला डर यह बैठता है कि क्या उनका खाता बंद हो गया, क्या सरकार ने ब्याज देना बंद कर दिया, या कहीं जमा रकम फ्रीज तो नहीं हो गई? डाकघर और वाणिज्यिक बैंकों के नियमों के अनुसार यदि आप मैच्योरिटी पर पैसा निकालना भूल भी गए हैं, तो आपकी जमा पूंजी पर कोई आंच नहीं आती। उल्टे, पीपीएफ योजना का ढांचा ऐसा बनाया गया है कि खाताधारक की अनुपस्थिति में भी उसका नुकसान न हो। मैच्योरिटी के बाद कोई कार्रवाई न करने की स्थिति में खाता अपने आप ‘डिफ़ॉल्ट एक्सटेंशन मोड’ में चला जाता है।

पीपीएफ योजना के तहत यदि आप 15 साल (16वें वित्तीय वर्ष के 1 अप्रैल) की मैच्योरिटी के एक वर्ष के भीतर न तो पूरा पैसा निकालते हैं और न ही कोई औपचारिक फॉर्म जमा करते हैं, तो आपका खाता अपने आप अगले 5 वर्षों के लिए ‘बिना अंशदान’ (Extension Without Contribution) एक्सटेंड हो जाता है।

  • ब्याज मिलना बंद नहीं होता: आपके खाते में मौजूद पूरे मैच्योरिटी बैलेंस पर सरकार द्वारा घोषित मौजूदा ब्याज दर (वर्तमान में 7.1% वार्षिक चक्रवृद्धि) लगातार जुड़ती रहती है।

  • शत-प्रतिशत टैक्स-फ्री स्टेटस: इस अवधि में मिलने वाला ब्याज और मूलधन आयकर कानून की धारा 10(11) / 10(10D) के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री (EEE) बना रहता है।

  • कोई पेनल्टी नहीं: भूल जाने पर किसी भी प्रकार का विलंब शुल्क या पेनल्टी नहीं काटी जाती।

विकल्प क्या करना होगा? निकासी के नियम नया पैसा जमा होगा?
1. पूरा खाता बंद करना फॉर्म-सी या क्लोजर फॉर्म भरकर बैंक/डाकघर में जमा करें। पूरा फंड एकमुश्त आपके बचत खाते में आ जाएगा। नहीं (खाता समाप्त)।
2. बिना नए निवेश के जारी रखना (डिफॉल्ट) कोई फॉर्म भरने की जरूरत नहीं; खाता 5-5 साल के ब्लॉक में चलता रहेगा। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक बार जितनी चाहें उतनी रकम निकाल सकते हैं। नहीं (नया पैसा डालने पर ब्याज नहीं मिलेगा)।
3. नए निवेश के साथ बढ़ाना (शर्त लागू) मैच्योरिटी के 1 साल के भीतर फॉर्म एच (Form H) जमा करना अनिवार्य। 5 साल के ब्लॉक में शुरुआती बैलेंस का अधिकतम 60% ही निकाल सकते हैं। हां, हर साल ₹500 से ₹1.5 लाख जमा कर 80C छूट पा सकते हैं।

यदि आप अपने खाते में हर साल नया पैसा (₹500 से ₹1.5 लाख) जमा करना जारी रखना चाहते हैं, तो इसके लिए मैच्योरिटी की तारीख से ठीक 1 वर्ष के भीतर फॉर्म एच जमा करना अनिवार्य कानूनी शर्त है।

  • यदि मैच्योरिटी के 1 साल से अधिक का समय बीत चुका है, तो आप चाहकर भी फॉर्म एच जमा नहीं कर सकते। आपका खाता हमेशा के लिए ‘बिना अंशदान’ श्रेणी में लॉक हो जाएगा।

  • सबसे बड़ी गलती: कई लोग बिना फॉर्म एच दिए ऑनलाइन नेट बैंकिंग से मैच्योरिटी के बाद खाते में ₹1.5 लाख ट्रांसफर कर देते हैं। नियमों के अनुसार, बिना फॉर्म एच के जमा किया गया नया पैसा ‘अनियमित’ (Irregular Deposit) माना जाता है। उस नए पैसे पर बैंक कोई ब्याज नहीं देगा और न ही उस पर धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलेगी। वह अतिरिक्त पैसा बिना किसी रिटर्न के खाते में पड़ा रहेगा।

यदि आपको नया पैसा जमा करने की जरूरत नहीं है और 1 साल की मियाद बीत चुकी है, तो यह स्थिति भी आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। बिना अंशदान वाले इस एक्सटेंशन में आपको जब चाहे, वित्तीय वर्ष में एक बार आंशिक या पूर्ण निकासी की पूरी छूट मिलती है।

  • मान लीजिए 15 साल बाद आपके खाते में ₹40 लाख का फंड जमा है।

  • 7.1% की ब्याज दर से आपको हर साल लगभग ₹2.84 लाख का गारंटीड, जोखिम-मुक्त और टैक्स-फ्री ब्याज मिलता रहेगा।

  • आप हर साल जरूरत के मुताबिक यह ब्याज निकाल सकते हैं और मूलधन को सुरक्षित रख सकते हैं, जिससे यह वरिष्ठ नागरिकों और रिटायरमेंट के बाद के जीवन के लिए एक मुफीद मासिक/वार्षिक आय का स्रोत बन जाता है।

  1. अपनी पीपीएफ पासबुक या ऑनलाइन बैंकिंग में लॉगिन करके खाते की वास्तविक मैच्योरिटी तिथि जांचें।

  2. यदि मैच्योरिटी को 1 वर्ष से कम समय हुआ है और आप आगे निवेश करना चाहते हैं, तो तुरंत अपनी होम ब्रांच में जाकर फॉर्म एच (Form H) दाखिल करें।

  3. यदि 1 साल से अधिक समय बीत चुका है, तो खाते में कोई नया पैसा ट्रांसफर न करें। जब तक आपको पूंजी की तत्काल जरूरत न हो, फंड को वहीं रहने दें ताकि उस पर 7.1% टैक्स-फ्री चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ मिलता रहे।

  4. जब भी पैसों की जरूरत हो, संबंधित बैंक या डाकघर में विड्रॉल फॉर्म देकर अपनी सुविधानुसार राशि सीधे अपने बचत खाते में ट्रांसफर करा लें।