
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने अमेरिका और वैश्विक महाशक्तियों की भूमिका को लेकर एक बेहद अहम और बड़ा बयान दिया है। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन और ‘लीडर्स मीटिंग’ को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका ने अपनी पसंद से दुनिया में एक अकेली महाशक्ति बनने का विकल्प चुना है।
लंबे समय तक वैश्विक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अमेरिका का भारी और मजबूत कूटनीतिक समर्थन हासिल था, लेकिन मौजूदा समय में अमेरिका के बदले हुए रुख और रणनीतियों के कारण यह वैश्विक व्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर पड़ती नजर आ रही है। इसके साथ ही, वैश्विक मंच पर अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का असर दुनिया के लगभग हर देश के प्रभाव और नीतियों पर पड़ रहा है।
अपने संबोधन के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने रूस-यूक्रेन युद्ध का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संघर्ष को लेकर भारत का रुख अब केवल तटस्थ रहकर शांति की वकालत करने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भारत अब इस युद्ध को समाप्त कराने और दोनों देशों के बीच सुलह कराने के लिए एक अधिक सक्रिय और व्यावहारिक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
भारत लगातार मॉस्को और कीव दोनों राजधानियों के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में है। भारत का मुख्य उद्देश्य काला सागर में समुद्री जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, खाद्यान्न एवं ऊर्जा निर्यात को सुचारू रखना तथा दोनों पक्षों की तात्कालिक सुरक्षा चिंताओं को कूटनीतिक बातचीत के जरिए दूर करना है।
विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस भीषण संघर्ष का अंत केवल संवाद और निरंतर कूटनीति के मार्ग से ही संभव है। भारत पिछले कई वर्षों से इसी सिद्धांत की वकालत करता आ रहा है, लेकिन अब हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत ने इसमें और अधिक व्यावहारिक कदम उठाए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया रूस और यूक्रेन यात्राओं के दौरान भी इस बात के स्पष्ट संकेत मिले थे कि भारत युद्ध रोकने के लिए ठोस और व्यावहारिक विचार विकसित कर रहा है। खास बात यह है कि भारत के इन शांति प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी सराहना मिल रही है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सार्वजनिक रूप से इस बात को स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री मोदी के पास शांति स्थापना के लिए बेहद व्यावहारिक और अच्छे विचार मौजूद हैं। वहीं, यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भी यह स्पष्ट किया है कि दुनिया के कई देशों द्वारा पेश किए गए शांति प्रस्तावों में भारत द्वारा सुझाया गया प्रस्ताव सबसे व्यापक और विस्तृत है।
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