
भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली गई रोमांचक तीन मैचों की वनडे सीरीज भले ही समाप्त हो चुकी है, लेकिन मैदान के बाहर से आ रही एक बड़ी खबर ने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी ICC ने सीरीज के आखिरी और तीसरे मुकाबले के दौरान नियमों की अनदेखी करने को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. न्यू चंडीगढ़ में खेले गए इस मुकाबले के दौरान स्लो ओवर-रेट (धीमी ओवर गति) के नियमों का उल्लंघन करने के लिए आईसीसी ने भारतीय टीम और वेस्टइंडीज टीम दोनों पर भारी भरकम आर्थिक जुर्माना ठोक दिया है. इस पेनल्टी की सबसे बड़ी खास बात यह रही कि भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल ने मैदानी अंपायरों के फैसले और आईसीसी के नियमों को स्वीकार करते हुए अपनी गलती मान ली है, जिसके चलते किसी औपचारिक सुनवाई या विवाद की गुंजाइश नहीं बची. सीरीज जीतने के बावजूद भारतीय टीम पर इस तरह का आर्थिक दंड लगना फैंस के लिए थोड़ा हैरान करने वाला जरूर है, लेकिन यह अनुशासनात्मक कार्रवाई इस बात की गवाही देती है कि आईसीसी खेल के तय समय और नियमों को लेकर कितनी सख्त है.
न्यू चंडीगढ़ वनडे में धीमी ओवर गति के कारण आईसीसी का कड़ा एक्शन
भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली जा रही इस द्विपक्षीय सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादवेंद्र सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया था, जो रोमांच के लिहाज से अपने चरम पर था. इस मैच में वेस्टइंडीज की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को 5 विकेट से हरा दिया था, हालांकि शुरुआती दोनों मैच जीतकर टीम इंडिया पहले ही 2-1 से श्रृंखला अपने नाम कर चुकी थी. इसी मुकाबले के दौरान खेल के निर्धारित समय के भीतर ओवर पूरे नहीं किए जा सके, जिसके बाद मैच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट आईसीसी को सौंपी. आईसीसी के आचार संहिता के नियमों के अनुसार, जब कोई टीम तय समय सीमा के अंदर अपने कोटे के ओवर फेंकने में विफल रहती है, तो उसे स्लो ओवर-रेट का दोषी माना जाता है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मैच रेफरी ने दोनों टीमों के कप्तानों पर जुर्माना लगाने का फैसला किया, ताकि भविष्य में इस तरह की सुस्ती और समय की बर्बादी से बचा जा सके.
भारत को चुकानी पड़ी बड़ी कीमत, वेस्टइंडीज के मुकाबले अधिक जुर्माना तय
धीमी ओवर गति के इस मामले में भारतीय टीम पर मेहमान वेस्टइंडीज टीम के मुकाबले अधिक आर्थिक दंड लगाया गया है. आईसीसी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, समय और छूट के तमाम प्रावधानों को ध्यान में रखने के बाद भी भारतीय टीम अपने तय समय से पूरे चार ओवर पीछे रह गई थी, जबकि वेस्टइंडीज की टीम दो ओवर पीछे पाई गई थी. इसी वजह से नियमों के तहत भारतीय खिलाड़ियों और कप्तान को ज्यादा बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है. भारत पर उनकी पूरी मैच फीस का 20 प्रतिशत हिस्सा जुर्माना के रूप में लगाया गया है, जबकि वेस्टइंडीज की टीम को उनकी मैच फीस का 10 प्रतिशत हिस्सा जुर्माने के तौर पर देना होगा. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इस तरह के जुर्माने खिलाड़ियों के लिए एक कड़ा संदेश होते हैं कि उन्हें मैच के दौरान खेल की गति को तेज रखना होगा और ओवर परिवर्तन के समय बिना किसी अनावश्यक देरी के फील्ड सजावट करनी होगी, वरना जीत की खुशी भी इस तरह के आर्थिक दंड से फीकी पड़ जाती है.
कप्तान शुभमन गिल ने गलती स्वीकार की, औपचारिक सुनवाई की नहीं पड़ी जरूरत
मैच के बाद जब आईसीसी की ओर से स्लो ओवर-रेट का यह मामला सामने आया, तो भारतीय वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल ने किसी भी तरह की टालमटोल या विरोध करने के बजाय बड़प्पन दिखाते हुए अपनी गलती को तुरंत स्वीकार कर लिया. कैरेबियाई टीम के कप्तान शाई होप ने भी अपनी टीम की तरफ से इस गलती को मान लिया. मैच रेफरी के सामने दोनों कप्तानों द्वारा अपने ऊपर लगे आरोपों और प्रस्तावित प्रतिबंधों को स्वेच्छा से स्वीकार कर लिए जाने के कारण इस मामले में किसी भी प्रकार की लंबी औपचारिक सुनवाई या अनुशासनात्मक बैठक की आवश्यकता नहीं पड़ी. कप्तान शुभमन गिल का यह कदम खेल भावना के अनुकूल रहा, जहां उन्होंने अपनी और टीम की गलती को खुले दिल से स्वीकार किया. सीरीज जीतने के बावजूद आईसीसी की यह पेनल्टी टीम प्रबंधन के लिए एक सबक है कि आगामी मुकाबलों और आगामी दौरों पर उन्हें अपनी रणनीतिक चुस्ती और समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि मैदान पर शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ इस तरह के अनचाहे आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सके.
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