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पश्चिम बंगाल में सरकारी जमीनों से हटेगा अवैध कब्जा: हाईटेक तकनीक से होगा बड़ा सर्वे, नपेंगे भू-माफिया

पश्चिम बंगाल में सरकारी जमीनों, फुटपाथों और वन विभाग की संपत्तियों पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर राज्य सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कड़े निर्देशों के बाद भूमि एवं भूमि सुधार विभाग (Land & Land Reforms Department) और शहरी विकास विभाग ने संयुक्त रूप से पूरे राज्य में एक विशेष और व्यापक सर्वेक्षण (Mega Survey) कराने की कार्ययोजना तैयार की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, नगर पालिकाओं और पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में आने वाली उन सभी जमीनों की पहचान करना है, जिन पर भू-माफियाओं, बिल्डरों या स्थानीय रसूखदारों ने वर्षों से अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चिन्हित जमीनों को मुक्त कराकर जनहित की योजनाओं के लिए सुरक्षित किया जाएगा।

इस बार जमीन का सर्वे पुराने कागजी तरीकों से नहीं, बल्कि अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों के सहारे किया जाएगा ताकि मानवीय हस्तक्षेप और गड़बड़ी की कोई गुंजाइश न रहे।

  • ड्रोन आधारित 3D मैपिंग: उच्च क्षमता वाले हाई-रेजोल्यूशन ड्रोनों की मदद से शहरी और ग्रामीण इलाकों में सरकारी प्लॉट्स का एरियल सर्वे कराया जाएगा। यह ड्रोन जमीन के एक-एक इंच की वास्तविक 3D इमेज तैयार करेंगे, जिससे यह साफ हो जाएगा कि स्वीकृत नक्शे से बाहर कितना और कहां निर्माण हुआ है।

  • सैटेलाइट इमेजरी और जीआईएस (GIS) मैपिंग: राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर और राज्य के भौगोलिक सूचना तंत्र (Geographic Information System) के माध्यम से डिजिटल नक्शे तैयार किए जाएंगे। इन नक्शों को पुराने लैंड रिकॉर्ड्स (आरएस और एलआर रिकॉर्ड) के साथ डिजिटल रूप से सुपरइम्पोज़ (मिलान) किया जाएगा।

  • जियो-फेंसिंग और डिजिटल टैगिंग: सर्वे पूरा होते ही सभी सरकारी संपत्तियों की डिजिटल सीमाबंदी यानी जियो-फेंसिंग (Geo-fencing) की जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि भविष्य में अगर कोई उस तय डिजिटल सीमा के अंदर निर्माण या कब्जा करने की कोशिश करेगा, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देगा।

राज्य सरकार के इस मेगा अभियान की शुरुआत उन प्रमुख औद्योगिक और शहरी क्लस्टर्स से की जा रही है जहां जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं और अतिक्रमण की सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं।

  1. कोलकाता और साल्टलेक: महानगर के प्रमुख बाइपास, राजारहाट, न्यू टाउन और ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स के आसपास की सरकारी जमीनों की गहन डिजिटल पड़ताल की जाएगी।

  2. हावड़ा और हुगली औद्योगिक बेल्ट: बंद पड़ी पुरानी मिलों और सरकारी संस्थाओं की खुली जमीनों पर भू-माफियाओं की नजर रहती है। इन सभी जमीनों का अलग से डिजिटल डेटाबेस तैयार हो रहा है।

  3. उत्तर बंगाल (सिलीगुड़ी और जलपाईगुड़ी): चाय बागानों और पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों के आसपास वन विभाग और राजस्व विभाग की जमीनों पर हुए कब्जों की ड्रोन निगरानी शुरू होगी।

  4. आसनसोल और दुर्गापुर: नगर निगम और खनिज विकास निगम की संपत्तियों पर बने अवैध गोदामों और शेड्स को खाली कराने के लिए विशेष टॉस्क फोर्स बनाई गई है।

सर्वे के बाद की कार्रवाई को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए जिला स्तर पर विशेष टास्क फोर्स गठित की जा रही हैं, जिनमें जिलाधिकारी (DM), पुलिस अधीक्षक (SP) और नगर निकाय के मुख्य अधिकारी शामिल होंगे। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि तकनीकी सर्वे में जिन जमीनों पर कब्जा प्रमाणित होगा, उन्हें पहले औपचारिक कानूनी नोटिस दिया जाएगा। निर्धारित समय में कब्जा न हटाने पर पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध ढांचे को ध्वस्त किया जाएगा। इसके अलावा, सरकारी जमीनों की फर्जी रजिस्ट्री करने या गैरकानूनी तरीके से बेचने वाले भू-माफियाओं और इसमें शामिल भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज कर संपत्ति कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।

इस कड़े अभियान के दौरान सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी भी निर्दोष या गरीब रेहड़ी-पटरी वाले को अनुचित परेशानी न झेलनी पड़े। जहां तक संभव होगा, वर्षों से बसे छोटे वेंडर्स के लिए अलग से ‘वेंडिंग जोन’ की व्यवस्था की जा रही है ताकि आजीविका का नुकसान न हो। वहीं, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की जानकारी सीधे प्रशासन तक पहुंचाने के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया जा रहा है। नागरिक इस पोर्टल पर गुमनाम रहकर भी अतिक्रमण की तस्वीरें और लोकेशन अपलोड कर सकेंगे, जिसके बाद ड्रोन टीम मौके पर जाकर तुरंत डिजिटल सत्यापन करेगी।