
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने देश के दिव्यांग नागरिकों (PwD) को नेशनल हाईवे पर यात्रा के दौरान बड़ी सुविधा देने के लिए छूट वाले फास्टैग (Exempted FASTag) से जुड़े नियमों में युगांतरकारी बदलाव किया है। 2 अक्टूबर से प्रभावी होने वाली इस नई व्यवस्था के तहत अब दिव्यांगजनों को हर साल टोल छूट जारी रखने के लिए बार-बार कागजी कार्यवाही और वार्षिक रिन्यूअल के झंझट से नहीं गुजरना पड़ेगा। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, डिजिटल और यूजर-फ्रेंडली बनाते हुए वैधता को सीधे दिव्यांगता के प्रतिशत (Percentage of Disability) से लिंक कर दिया है।
पहले लागू व्यवस्था के अनुसार, छूट वाले फास्टैग धारकों को हर 12 महीने में अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराकर रिन्यूअल कराना अनिवार्य होता था। कई बार तकनीकी कारणों या सत्यापन में देरी की वजह से टोल प्लाजा पर दिव्यांगजनों को असुविधा और विवाद का सामना करना पड़ता था। नए संशोधन से न केवल कागजी प्रक्रियाओं का बोझ कम होगा, बल्कि देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले लाखों दिव्यांग वाहन स्वामियों को निर्बाध आवागमन की गारंटी भी मिलेगी।
संशोधित दिशा-निर्देशों के मुताबिक, छूट वाले फास्टैग की वैधता अवधि को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है। जिन लाभार्थियों के वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र या यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड में 70 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक की दिव्यांगता दर्ज है, उनके लिए जारी फास्टैग अब पूरे 5 वर्षों के लिए वैध रहेगा। वहीं दूसरी श्रेणी में, 40 प्रतिशत से लेकर 70 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले पात्र लाभार्थियों को 3 वर्ष की वैधता वाला छूट फास्टैग जारी किया जाएगा।
यह छूट विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के उपयोग के लिए अनुकूलित (Retro-fitted/Adapted) वाहनों के साथ-साथ उन सभी गैर-व्यावसायिक वाहनों पर लागू होगी जो ‘दिव्यांगजन’ स्वामित्व श्रेणी के तहत पंजीकृत हैं। निर्धारित तीन या पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद, लाभार्थी राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम 2008 के तहत पात्रता और वैध दस्तावेजों के आधार पर इसका पुन: नवीनीकरण करा सकेंगे।
सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य वास्तविक जरूरतमंदों तक सीधा लाभ पहुंचाना और व्यवस्था में किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोकना है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटल डेटाबेस से एकीकृत करने की तैयारी कर ली है। दिव्यांगता रिकॉर्ड सीधे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के UDID पोर्टल से सत्यापित किए जाएंगे, जिससे फर्जी दावों की संभावना शून्य हो जाएगी।
टोल प्लाजा के इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम में यह डेटा पहले से फीड रहेगा। जैसे ही कोई पंजीकृत दिव्यांगजन वाहन टोल लेन में पहुंचेगा, आरएफआईडी (RFID) स्कैनर स्वतः वाहन की पहचान कर लेगा और बिना कोई शुल्क काटे बूम बैरियर खुल जाएगा। इससे दिव्यांग वाहन चालकों को टोल बूथ पर अपनी शारीरिक स्थिति का प्रमाण पत्र दिखाने या बहस करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे उनके आत्मसम्मान और समय दोनों की बचत होगी।
स्थानीय स्तर पर दिव्यांगजन इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय और एनएचआई के आधिकारिक पोर्टल या राजमार्ग यात्रा ऐप के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के समय वाहन का वैध रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), भारत सरकार द्वारा जारी यूडीआईडी (UDID) कार्ड या सक्षम मेडिकल बोर्ड द्वारा निर्गत दिव्यांगता प्रमाण पत्र और आधार कार्ड अपलोड करना होगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होते ही छूट वाला फास्टैग लाभार्थी के पंजीकृत पते पर भेज दिया जाता है।
परिवहन विशेषज्ञों और दिव्यांग अधिकार संगठनों ने 2 अक्टूबर से लागू हो रहे इस निर्णय की सराहना की है। उनका कहना है कि इस फैसले से दिव्यांगजनों का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण होगा और वे बिना किसी झिझक के राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र रूप से यात्रा कर सकेंगे। सरकार का यह कदम देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को समावेशी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
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