
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने की खबरों के बाद आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो गए थे। इस भ्रम और अफवाहों को दूर करते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के वरिष्ठ अधिकारियों व वित्तीय विशेषज्ञों ने पूरा गणित स्पष्ट कर दिया है। बैंकों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि आम ग्राहकों को अपनी जेब से एक भी अतिरिक्त रुपया नहीं देना होगा। यूपीआई का उपयोग आम नागरिकों, नौकरीपेशा और घरेलू लेन-देन के लिए पूरी तरह निशुल्क बना रहेगा।
एमडीआर (Merchant Discount Rate) दरअसल वह प्रोसेसिंग फीस होती है जो डिजिटल लेन-देन को पूरा करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने वाले बैंकों, पेमेंट गेटवे और नेटवर्क ऑपरेटरों के रखरखाव पर खर्च होती है। सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यह कोई टैक्स नहीं है और न ही यह किसी उपभोक्ता के बैंक खाते से काटा जाने वाला चार्ज है।
बैंकिंग अधिकारियों ने लेन-देन की श्रेणियों को स्पष्ट करते हुए बताया है कि एमडीआर का दायरा केवल चुनिंदा व्यावसायिक श्रेणियों तक सीमित है:
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आम उपभोक्ता (P2P – Person to Person): यदि आप अपने दोस्त, रिश्तेदार, परिजन या किसी भी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करते हैं, तो चाहे रकम ₹100 हो या ₹1 लाख, उस पर शून्य (0%) चार्ज लगेगा। यह पूरी तरह फ्री है।
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छोटे और स्थानीय दुकानदार (P2PM): गली-मोहल्ले के किराना स्टोर, चाय-पान के खोखे, सब्जी व फल विक्रेता और छोटे कारोबारी जो प्रति माह ₹1 लाख तक का लेन-देन करते हैं, उन्हें ‘जीरो-एमडीआर’ श्रेणी में रखा गया है। इन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
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₹2,000 तक की सामान्य खरीदारी: किसी भी दुकान या शोरूम पर ₹2,000 तक के भुगतान पर कोई एमडीआर देय नहीं है। देश के लगभग 96 फीसदी यूपीआई लेन-देन इसी सीमा के भीतर आते हैं।
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बड़े मर्चेंट (P2M above ₹2,000): केवल ₹2,000 से अधिक मूल्य के कमर्शियल मर्चेंट पेमेंट्स पर 0.4% की दर से एमडीआर लागू होगा, जिसका वहन संबंधित व्यापारी (Merchant) अपने बिजनेस मार्जिन से करेगा।
एसबीआई सिक्योरिटीज और बैंकिंग विश्लेषण के अनुसार, यदि कोई ग्राहक किसी बड़े शॉपिंग मॉल या इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर से ₹3,000 का सामान खरीदता है और क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान करता है, तो ग्राहक के खाते से पूरे ₹3,000 ही कटेंगे। बिलिंग काउंटर पर ग्राहक से ₹3,012 नहीं वसूले जा सकते, क्योंकि वित्त मंत्रालय के नियमों के अनुसार मर्चेंट इस चार्ज को सीधे ग्राहक पर नहीं डाल सकता।
व्यापारी के स्तर पर 0.4% की दर से ₹12 का एमडीआर बनेगा, जो व्यापारी के बैंक सेटलमेंट के दौरान कटेगा। इसके अलावा, बड़े लेन-देन के लिए सरकार ने एक निश्चित सीमा (Cap) तय की है। ₹75,000 या उससे अधिक के किसी भी लेन-देन पर अधिकतम एमडीआर ₹300 पर सीमित कर दिया गया है। यानी यदि कोई ग्राहक ₹1,00,000 का आभूषण या गैजेट खरीदता है, तो प्रतिशत के हिसाब से ₹400 बनने के बावजूद व्यापारी से अधिकतम सिर्फ ₹300 ही लिए जाएंगे।
रेलवे टिकट, बिजली-पानी के बिल, पेट्रोल पंप और बीमा प्रीमियम जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर भी केवल ₹5 का फ्लैट कंसेशनल एमडीआर तय किया गया है, ताकि आवश्यक सेवाओं की लागत न बढ़े।
बैंक ऑफ बड़ौदा और सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य बैंकों के अधिकारियों का मानना है कि देश में यूपीआई का वॉल्यूम अब हर महीने लाखों करोड़ रुपये को पार कर चुका है। अरबों ट्रांजैक्शन को सुरक्षित रूप से प्रोसेस करने के लिए हाई-स्पीड सर्वर, आधुनिक डेटा सेंटर, साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल और एआई-संचालित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम की निरंतर आवश्यकता होती है। अब तक शून्य एमडीआर नीति के कारण बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा था।
बड़े कॉरपोरेट और ई-कॉमर्स मर्चेंट्स से मिलने वाले इस मामूली चार्ज से जो राजस्व प्राप्त होगा, उसका उपयोग पूरी तरह से यूपीआई इकोसिस्टम को मजबूत करने, सर्वर क्षमता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार करने में किया जाएगा। बैंकों ने ग्राहकों को आगाह किया है कि यदि कोई दुकानदार या मर्चेंट यूपीआई से ₹2,000 से अधिक भुगतान करने पर अतिरिक्त सुविधा शुल्क (Convenience Fee) या एमडीआर वसूलने की कोशिश करता है, तो ग्राहक सीधे बैंक के पोर्टल या नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन पर इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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