
भारतीय शेयर बाजार में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेगमेंट की दिग्गज कंपनी ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (Ola Electric Mobility) के शेयरों पर दबाव लगातार बना हुआ है। मंगलवार को कारोबारी सत्र के दौरान कंपनी के शेयरों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इस बीच, दिग्गज ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म ‘एचएसबीसी’ (HSBC) ने ओला इलेक्ट्रिक के स्टॉक को लेकर एक बेहद सतर्क करने वाली रिपोर्ट जारी की है। ब्रोकरेज ने इस स्टॉक पर अपनी ‘Reduce’ (घटाएं) रेटिंग को बरकरार रखा है और शेयर के लिए ₹24 का टारगेट प्राइस तय किया है।
यह टारगेट प्राइस पिछले कारोबारी दिवस के बंद भाव (₹37.86) के मुकाबले लगभग 37 प्रतिशत की संभावित भारी गिरावट को दर्शाता है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि कंपनी के कारोबार के मोर्चे पर बैटरी निर्माण और लोकलाइजेशन में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन ब्रांड को दोबारा मजबूत करने और बाजार में अपनी रणनीतिक स्थिति को बनाए रखने से जुड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं।
एचएसबीसी की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, ओला इलेक्ट्रिक की गीगा फैक्ट्री (Giga Factory) में बैटरी निर्माण और स्थानीयकरण (Localization) की रफ्तार में सुधार देखने को मिल रहा है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि आने वाले 6 से 9 महीनों में बैटरी की उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकेगा और इसका यील्ड (Yield) मौजूदा लगभग 70 प्रतिशत से बढ़कर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा, कंपनी अपने कारोबार के विभिन्न हिस्सों में ऑटोमेशन को बढ़ा रही है और कामकाज को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास कर रही है, जिससे प्रबंधन के मार्जिन में सुधार के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन सकारात्मक पहलुओं के बावजूद ब्रोकरेज ने साफ किया है कि ब्रांड की विश्वसनीयता को दोबारा बहाल करना और ऑपरेशंस को प्रभावी ढंग से लागू करना निवेशकों के लिए मुख्य रूप से निगरानी करने वाले क्षेत्र (Watchpoints) बने हुए हैं।
इस बीच, ओला इलेक्ट्रिक ने आने वाले सप्ताह में 5 अक्टूबर को अपनी एक अहम बोर्ड बैठक (Board Meeting) बुलाई है, जो शेयर बाजारों और अन्य नियामक प्राधिकारियों (Regulatory Authorities) से मिलने वाली सैद्धांतिक मंजूरी के अधीन है।
इस आगामी बोर्ड बैठक में आंशिक रूप से चुकता इक्विटी शेयर जारी करके ₹1,000 करोड़ तक की पूंजी जुटाने वाले प्रस्तावित राइट्स इश्यू (Rights Issue) की विभिन्न शर्तों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। इनमें राइट्स इश्यू की कीमत (Issue Price), भुगतान का तरीका, राइट्स मिलने का अनुपात (Ratio), रिकॉर्ड डेट और इश्यू के समय से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।
ब्लूमबर्ग के एनालिस्ट्स के आंकड़ों पर नजर डालें तो ओला इलेक्ट्रिक को कवर करने वाले कुल 8 प्रमुख विश्लेषकों में से 6 ने ‘Sell’ (बेचने) की रेटिंग दी है, जबकि केवल 2 विश्लेषकों ने ‘Hold’ (धोखे से बचने/पकड़े रहने) की सलाह दी है। राहत की बात यह है कि किसी भी ब्रोकरेज या एनालिस्ट ने इस समय स्टॉक पर ‘Buy’ (खरीदने) की रेटिंग नहीं दी है। विश्लेषकों का 12 महीने का औसत टारगेट प्राइस ₹29.14 के आसपास है, जो शेयर के मौजूदा कारोबारी स्तर से काफी नीचे है।
मंगलवार को कारोबार के दौरान ओला इलेक्ट्रिक का शेयर फिसलकर ₹36.30 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया था, हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी भी देखने को मिली। वर्ष 2026 में अब तक यह शेयर मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, लेकिन पिछले एक साल के आंकड़ों को देखें तो निवेशकों को इसमें करीब 30 प्रतिशत तक का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। किसी भी नए निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।
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