
मैक्सिको के साल्टिलो में आयोजित आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल में भारतीय तीरंदाजी ने एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। भारतीय सेना के प्रतिभावान और दुनिया के 10वें नंबर के रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने पुरुषों के व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाकर देश का नाम रोशन कर दिया है। इस रोमांचक खिताबी मुकाबले में धीरज ने जापान के मजबूत खिलाड़ी नाकानिशी जुन्या को कड़े संघर्ष के बाद 6-5 से शिकस्त दी। यह जीत न केवल धीरज के व्यक्तिगत करियर के लिए मील का पत्थर है, बल्कि भारतीय पुरुष तीरंदाजी में 16 साल लंबे चले आ रहे पदक के सूखे को समाप्त करने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि भी है।
फाइनल मुकाबला बेहद उतार-चढ़ाव और सांसें थाम देने वाला रहा। शुरुआती पांच सेटों के खेल के बाद दोनों ही तीरंदाज 5-5 की बराबरी पर खड़े थे। इसके बाद विजेता का फैसला करने के लिए निर्णायक शूट-ऑफ का सहारा लिया गया। दबाव के इस बेहद नाजुक पल में धीरज बोम्मादेवरा ने अपनी गजब की मानसिक मजबूती और एकाग्रता का परिचय दिया। उन्होंने अपने तीर से सीधे ’10’ का परफेक्ट निशाना साधा, जबकि जापानी प्रतिद्वंद्वी नाकानिशी केवल 9 अंक ही हासिल कर सके। इस एक सटीक निशाने ने भारत के झोली में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक डाल दिया। इससे पहले साल 2007 में डोला बनर्जी ने महिलाओं के वर्ग में यह प्रतिष्ठित खिताब जीता था, जबकि पुरुष वर्ग में इतने बड़े मंच पर स्वर्ण पदक का इंतजार अब जाकर खत्म हुआ है।
धीरज बोम्मादेवरा की इस ऐतिहासिक सफलता ने देश के दिग्गजों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। देश के जाने-माने उद्योगपति आनंद महिंद्रा सोशल मीडिया पर धीरज की इस उपलब्धि के मु मुरीद हो गए और उनकी जमकर सराहना की। आनंद महिंद्रा ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा कि जब सेना के एक जवान को इतिहास रचने के लिए सिर्फ एक तीर की जरूरत थी, तो उसने एकदम सटीक ’10’ का निशाना लगा दिया। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय तीरंदाजी के भविष्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पारंपरिक महाशक्तियों माने जाने वाले देशों जैसे दक्षिण कोरिया और चीन को हमारे खिलाड़ियों ने लगातार मात दी है, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय आर्चरी अब एक नए और सुनहरे दौर में प्रवेश कर चुकी है।
धीरज की यह सफलता केवल एक मेडल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन गई है। मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले और संघर्षों का सामना करते हुए यहां तक पहुंचे धीरज ने साबित कर दिया है कि पक्का इरादा और कड़ी मेहनत हो तो हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। इस जीत के बाद देश भर में खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स और एशियाई खेलों में भारतीय तीरंदाज और भी शानदार प्रदर्शन कर तिरंगे का मान और अधिक बढ़ाएंगे।
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