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Mamta Kulkarni Comeback: ‘ये तो साध्वी बन गई थी ना?’ ममता कुलकर्णी के मॉडर्न लुक पर खड़े हुए सवाल, 25 साल बाद भारत लौटीं पूर्व एक्ट्रेस ने दिया दो टूक जवाब

90 के दशक में ‘करण अर्जुन’, ‘बाजी’ और ‘आशिक आवारा’ जैसी सुपरहिट फिल्मों से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में हैं। करीब 25 वर्षों तक देश से दूर रहने और एक संन्यासिनी के रूप में शांत जीवन बिताने के दावों के बाद जब ममता हाल ही में मुंबई लौटीं, तो उनके बदले हुए अंदाज ने सोशल मीडिया से लेकर मनोरंजन जगत तक हलचल मचा दी। कभी भगवा वस्त्र, माथे पर भस्म और सादगी भरे रूप में दिखने वाली ममता कुलकर्णी जब एक बार फिर आधुनिक परिधानों, मेकअप और ग्लैमरस लुक में नजर आईं, तो इंटरनेट पर यूजर्स ने हैरान होकर सवाल दागने शुरू कर दिए कि “ये तो साध्वी बन गई थीं, फिर अचानक यह मॉडर्न अवतार कैसा?” अब पूर्व अभिनेत्री ने इन सभी सवालों और ट्रोलिंग पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और अपने आध्यात्मिक सफर व वर्तमान जीवन को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है।

ममता कुलकर्णी का नाम बॉलीवुड की उन अभिनेत्रियों में गिना जाता है जिनका करियर जितना चमकदार रहा, उनका व्यक्तिगत जीवन उतना ही विवादों और रहस्यों से घिरा रहा। 2000 के दशक की शुरुआत में अचानक हिंदी सिनेमा की चकाचौंध को अलविदा कहने के बाद वे केन्या (नैरोबी) चली गई थीं। कुछ वर्षों बाद जब उनकी तस्वीरें सामने आईं, तो वे पूरी तरह एक साध्वी के वेश में थीं। उन्होंने ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ एन योगिन’ (Autobiography of an Yogin) नामक एक किताब भी लिखी थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने दुनिया के सारे भौतिक सुख त्याग दिए हैं और भगवान शिव व मां काली की घोर तपस्या में लीन हो चुकी हैं।

यही कारण है कि जब वे हाल ही में ढाई दशक बाद भारत लौटीं और मीडिया के कैमरों के सामने वेस्टर्न और ग्लैमरस कपड़ों में नजर आईं, तो लोगों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी साध्वी वाली तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि क्या अध्यात्म केवल दिखावा था? वहीं कुछ ने पूछा कि क्या यह किसी नए बॉलीवुड प्रोजेक्ट या रियलिटी शो में वापसी की तैयारी है?

अपने बदले हुए लुक और लाइफस्टाइल को लेकर उठ रहे सवालों पर ममता कुलकर्णी ने बेहद सहजता और बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अध्यात्म किसी बाहरी वेशभूषा या कपड़ों का मोहताज नहीं होता, बल्कि यह आत्मा के भीतर की एक गहरी अवस्था है।

ममता ने मीडिया से बातचीत में कहा:

  • आंतरिक चेतना की पुकार: उन्होंने बताया कि जब उन्होंने फिल्में छोड़ी थीं, तो वह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। उन्हें अंदर से यह महसूस हो रहा था कि आध्यात्मिक जीवन उन्हें पुकार रहा है। उस वक्त उन्हें आत्मा की शांति और ईश्वर की खोज के लिए एकांत और साधना की सख्त जरूरत थी।

  • साधना का 12-14 साल का कठिन दौर: पूर्व एक्ट्रेस के अनुसार, उन्होंने वर्षों तक कठोर तपस्या, उपवास और ध्यान का पालन किया। उस समय उनका मन भौतिक संसार से पूरी तरह विरक्त हो चुका था, जिसके चलते उन्होंने सांसारिक सुख-सुविधाओं को त्याग दिया था।

  • कपड़े तय नहीं करते कि आप कितने आध्यात्मिक हैं: अपने मौजूदा मॉडर्न अवतार पर उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति आज सामान्य या फैशनेबल कपड़े पहन रहा है, तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसने अपनी भक्ति या साधना को छोड़ दिया है। उनके अनुसार, “मैंने दुनिया को नहीं छोड़ा है, बल्कि दुनिया में रहकर अनासक्त (Detached) रहना सीख लिया है। ईश्वर मेरे भीतर है, चाहे मैं भगवा पहनूं या आधुनिक कपड़े।”

ममता कुलकर्णी की भारत वापसी के साथ ही यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वे एक बार फिर फिल्मों या वेब सीरीज के जरिए अभिनय की दुनिया में कदम रखने जा रही हैं। जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि 25 साल बाद अपनी मातृभूमि पर लौटना उनके लिए बेहद भावुक क्षण है। वे यहां अपने पुराने दोस्तों, रिश्तेदारों से मिलने और मुंबई की हवा को फिर से महसूस करने आई हैं।

अभिनय में वापसी के सवाल पर उन्होंने पूरी तरह इनकार तो नहीं किया, लेकिन यह जरूर कहा कि अब वे किसी अंधी दौड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं। यदि कोई ऐसा विषय या प्रोजेक्ट उनके सामने आता है जो सार्थक हो और उनके वर्तमान विचारों से मेल खाता हो, तो वे उस पर विचार कर सकती हैं, लेकिन उनका प्राथमिक लक्ष्य अपने आत्मिक संतुलन को बनाए रखना ही है।

ममता कुलकर्णी का यह नया रूप भले ही इंटरनेट पर बहस का विषय बना हुआ हो, लेकिन उनके प्रशंसकों का एक बड़ा वर्ग आज भी उनकी बेबाकी और 90 के दशक की उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को याद कर उनकी सुरक्षित और सुखद वापसी का स्वागत कर रहा है।