Sunday , September 27 2026

ई-वीज़ा से लेकर क्रूज़ हब तक: विश्व पर्यटन दिवस और भारत के पर्यटन उछाल के 10 महत्वपूर्ण तथ्य

नई दिल्ली। हर साल 27 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने वाला ‘विश्व पर्यटन दिवस’ (World Tourism Day) इस बार भारत के लिए दोहरी खुशियों और ऐतिहासिक उपलब्धियों का गवाह बन रहा है। ऐतिहासिक रूप से सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों का केंद्र रहे भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी पर्यटन नीति को ‘आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर’, ‘डिजिटल सुगमता’ और ‘अनुभव आधारित यात्रा’ (Experiential Tourism) के मॉडल में बदल दिया है। इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा (e-Visa) की सरलीकृत व्यवस्था से लेकर तटीय और अंतर्देशीय क्रूज़ हब के विस्तार तक, भारत वैश्विक पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा और सुलभ गंतव्य के रूप में स्थापित हुआ है। आइए जानते हैं विश्व पर्यटन दिवस और भारत के पर्यटन उछाल से जुड़े 10 सबसे महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी तथ्य।

संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UN Tourism) द्वारा इस वर्ष विश्व पर्यटन दिवस की आधिकारिक वैश्विक थीम “डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ पर्यटन का पुनर्रचना” (Digital Agenda and Artificial Intelligence to Redesign Tourism) रखी गई है। यह थीम दर्शाती है कि कैसे तकनीक और डेटा विश्लेषण पर्यटन क्षेत्र को स्मार्ट, समावेशी और पर्यावरण-अनुकूल बना रहे हैं। भारत ने इस दिशा में भारत मंडपम से लेकर डिजिटल हेरिटेज गाइड तक कई अत्याधुनिक तकनीकी पहलों को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया है।

अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की यात्रा को झंझट-मुक्त बनाने के लिए भारत की ई-वीज़ा (e-Visa) प्रणाली दुनिया के सबसे सफल मॉडलों में से एक बन चुकी है। वर्ष 2014 में केवल 43 देशों के साथ शुरू हुई यह डिजिटल सुविधा अब बढ़कर 170 से अधिक देशों के नागरिकों के लिए उपलब्ध है। इसके तहत ई-टूरिस्ट, ई-बिजनेस, ई-मेडिकल और ई-कॉन्फ्रेंस वीज़ा घर बैठे ऑनलाइन जारी किए जाते हैं, जिन्हें 30 से अधिक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और प्रमुख बंदरगाहों पर मान्य किया गया है।

भारत अपने 7,500 किलोमीटर लंबे समुद्र तट का रणनीतिक उपयोग करते हुए एशिया का शीर्ष क्रूज़ हब बनने की ओर अग्रसर है। केंद्र सरकार के ‘क्रूज़ भारत मिशन’ और ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ के तहत मुंबई, कोच्चि, चेन्नई, गोवा और विशाखापट्टनम में विश्वस्तरीय अंतरराष्ट्रीय क्रूज़ टर्मिनलों का आधुनिकीकरण किया गया है।

  • ई-ग्रुप वीज़ा की शुरुआत: अंतरराष्ट्रीय क्रूज़ ऑपरेटरों और यात्रियों के लिए विशेष 30 दिवसीय मल्टीपल-एंट्री ‘e-Group Visit Visa’ की सुविधा शुरू की गई है, जिससे विदेशी क्रूज़ यात्रियों को भारतीय बंदरगाहों पर क्यूआर कोड के जरिए तुरंत इमिग्रेशन क्लीयरेंस मिलता है।

  • जहाजों की संख्या में उछाल: देश में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रूज़ कॉल्स की संख्या को 1,000 वार्षिक कॉल तक पहुंचाने का लक्ष्य तेजी से साकार हो रहा है।

तटीय पर्यटन के साथ-साथ भारत ने अपने अंतर्देशीय जलमार्गों (National Waterways) को पर्यटन की रीढ़ बना दिया है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से असम के डिब्रूगढ़ (बांग्लादेश होते हुए) तक चलने वाली ‘एमवी गंगा विलास’ (MV Ganga Vilas) दुनिया की सबसे लंबी नदी यात्रा (लगभग 3,200 किमी) का रिकॉर्ड बना चुकी है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और केरल के बैकवाटर में संचालित रिवर क्रूज़ ने विदेशी सैलानियों के लिए ग्रामीण और पारिस्थितिक पर्यटन के नए द्वार खोले हैं।

भारत की सांस्कृतिक विविधता और स्थापत्य कला विश्वभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। देश में अब कुल 43 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Sites) मौजूद हैं। हाल के वर्षों में शांतिनिकेतन, होयसल के पवित्र मंदिर समूह और मोइदम्स (असम के अहोम राजवंश की टीला-दफन प्रणाली) को इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल किए जाने से विदेशी पर्यटकों के बीच भारत के सांस्कृतिक हेरिटेज सर्किट की मांग में भारी उछाल दर्ज किया गया है।

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ और ‘प्रसाद’ (PRASHAD) योजनाओं ने देश के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों का कायाकल्प कर दिया है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक (उज्जैन), अयोध्या धाम, केदारनाथ धाम और कामाख्या मंदिर जैसे प्रमुख केंद्रों पर विश्वस्तरीय सुविधाओं, पार्किंग और कनेक्टिविटी का विस्तार हुआ है। इसके तहत हेरिटेज, वाइल्डलाइफ, वेलनेस, बुद्ध सर्किट और रामायण सर्किट जैसी थीम-आधारित यात्राओं को संगठित रूप दिया गया है।

आधुनिक तनाव भरी जीवनशैली के बीच भारत दुनिया के ‘ग्लोबल वेलनेस कैपिटल’ के रूप में उभरा है। उत्तराखंड का ऋषिकेश, केरल के पारंपरिक आयुर्वेदिक हीलिंग सेंटर्स और कर्नाटक व गोवा के ध्यान केंद्र अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की पहली पसंद हैं। भारत के ‘हील इन इंडिया’ (Heal in India) अभियान और किफायती विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते मेडिकल टूरिज्म के तहत आने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या में सालाना 30% से अधिक की वृद्धि देखी जा रही है।

विदेशी पर्यटकों के साथ-साथ घरेलू पर्यटन को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए ‘देखो अपना देश’ जन-आंदोलन ने घरेलू यात्राओं को नई ऊर्जा दी है। इसके साथ ही भारतीय शादियों को विदेशों में आयोजित करने के बजाय देश के हेरिटेज महलों (राजस्थान, उत्तराखंड, गोवा और केरल) में आयोजित करने के लिए ‘वेड इन इंडिया’ (Wed in India) अभियान को बढ़ावा दिया गया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, हस्तशिल्प और रोजगार को अरबों रुपये का सीधा संबल मिला है।

पर्यटन उद्योग की सबसे बड़ी जरूरत तेज और आरामदायक आवागमन होती है। भारतीय रेलवे की सेमी-हाईस्पीड ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ ट्रेनों ने देश के सभी प्रमुख धार्मिक और पर्यटन नगरों (कटरा, वाराणसी, देहरादून, पुरी, अजमेर, तिरुपति) को महानगरों से कुछ ही घंटों की दूरी पर ला दिया है। वहीं दूसरी तरफ, नागर विमानन मंत्रालय की ‘उड़ान’ (UDAN – उड़े देश का आम नागरिक) योजना के तहत छोटे टियर-2 और टियर-3 शहरों व दूरदराज के द्वीपों (लक्षद्वीप, अंडमान) में नए एयरपोर्ट्स और हेलीपोर्ट्स चालू होने से ऑफबीट लोकेशन्स तक पहुंच बेहद आसान हो गई है।

पर्यटन सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने NIDHI+ (National Integrated Database of Hospitality Industry) प्लेटफॉर्म सक्रिय किया है, जिस पर देश के 63,000 से अधिक होटल, होमस्टे और टूर ऑपरेटर्स पंजीकृत हो चुके हैं। भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने विदेशी यात्रियों के लिए बिना स्थानीय करेंसी बदले सेकंडों में डिजिटल भुगतान करना संभव बना दिया है। इसके अलावा गूगल और वैश्विक टेक कंपनियों के साथ साझेदारी करके ऐतिहासिक स्मारकों के 360-डिग्री वर्चुअल टूर और एआई-संचालित बहुभाषी गाइड की सुविधाएं शुरू की गई हैं।

भारत आज न केवल अपनी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों और ‘अतिथि देवो भव:’ के संस्कार को सहेजे हुए है, बल्कि अत्याधुनिक कनेक्टिविटी और डिजिटल सुगमता के दम पर 21वीं सदी के वैश्विक पर्यटन बाजार का सबसे चमकदार सितारा बनकर उभर रहा है।