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मैं उस दिन को कभी नहीं भूल सकता जब कैंची धाम के सामने अचानक खुल गया था गाड़ी का गेट

भारतीय सिनेमा जगत में अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘हनुमान अंश’ से बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचने वाले प्रसिद्ध निर्देशक और डॉक्टर विशाल चतुर्वेदी इन दिनों अपनी फिल्म के साथ-साथ अपनी जिंदगी से जुड़े एक बेहद चमत्कारी और दिलचस्प संस्मरण को लेकर सुर्खियों में हैं। नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित इस फिल्म की सफलता के पीछे एक ऐसा व्यक्तिगत वाकया जुड़ा है, जिसने एक डॉक्टर को फिल्ममेकर बनने पर मजबूर कर दिया। हाल ही में एक खास बातचीत के दौरान डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने उत्तराखंड के पहाड़ों में हुई उस घटना को याद किया, जब मूसलाधार बारिश के बीच अचानक उनकी गाड़ी का गेट प्रसिद्ध ‘कैंची धाम’ के मुख्य द्वार के सामने जाकर खुला था। उन्होंने बताया कि वह पल उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था, जिसे वे आज भी चाहकर कभी भूल नहीं सकते।

फिल्म ‘हनुमान अंश’ के निर्देशन से पहले बतौर डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे विशाल चतुर्वेदी ने अपने शुरुआती संघर्षों और अध्यात्म से जुड़ने की कहानी साझा करते हुए बताया कि एक बार वे अपने एक मित्र के साथ उत्तराखंड के पहाड़ी रास्तों पर घूमने निकले थे। उस दौरान अचानक मौसम बहुत खराब हो गया और भारी बारिश के कारण उनकी गाड़ी सड़क पर फिसलने (स्किट होने) लगी। मजबूरी में उन्हें अपनी गाड़ी रोकनी पड़ी और उन्होंने यह तय किया कि जब तक बारिश पूरी तरह थमती नहीं, वे आगे नहीं बढ़ेंगे। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कुछ ही सेकंड के भीतर अचानक बारिश थम गई और बादलों के बीच से सूरज की चमकीली किरणें बाहर आ गईं। उस चमत्कारी माहौल से प्रेरित होकर जब वे गाड़ी से बाहर निकले और चारों तरफ देखा, तो उनकी आंखें खुली की खुली रह गईं।

कैंची धाम के उस चमत्कारी संयोग ने बदल दी जिंदगी की पूरी दिशा

निर्देशक ने उस पल को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने गाड़ी का दरवाजा खोला, तो उनका गेट ठीक बाबा नीम करोली महाराज के प्रसिद्ध ‘कैंची धाम’ (Kainchi Dham) के मुख्य द्वार की तरफ खुल रहा था। उस समय उनके मित्र, जो गाड़ी चला रहे थे, उन्हें बाबा नीम करोली के चमत्कारों और उत्तराखंड की इस पवित्र आध्यात्मिक भूमि के बारे में विस्तार से बताया। हल्द्वानी वापसी के दौरान हुई इस चर्चा ने डॉक्टर विशाल चतुर्वेदी के मन में बाबा के प्रति एक गहरी जिज्ञासा और श्रद्धा जगा दी। यही वह बीज था जो आगे चलकर उनके भीतर पनपता रहा और उन्होंने बाबा के आध्यात्मिक संस्मरणों पर आधारित एक किताब ‘डिवाइन डिटोर: दैट चेंज्ड माई लाइफ’ (Divine Detour: That Changed My Life) लिखी। सालों बाद जब उन्होंने फिल्म निर्माण की दुनिया में कदम रखा, तो उनके दिल में वही पुरानी कहानी और बाबा का आशीर्वाद हमेशा बना रहा, जो अंततः ‘हनुमान अंश’ फिल्म के रूप में बड़े पर्दे पर साकार हुआ।

सुरक्षित डॉक्टरी पेशा छोड़कर फिल्ममेकिंग चुनने का जोखिम भरा सफर

एमबीबीएस की डिग्री लेने और हल्द्वानी तथा मुंबई के अस्पतालों में एक डॉक्टर के रूप में अपनी प्रैक्टिस सेट करने के बाद फिल्म निर्देशन की दुनिया में उतरना विशाल चतुर्वेदी के लिए आसान फैसला नहीं था। उनके परिवार और परिचितों ने उन्हें यह सलाह दी थी कि डॉक्टर बनकर एक सुरक्षित और प्रतिष्ठित जीवन जीने के बजाय वे इस अनिश्चित और संघर्षपूर्ण क्षेत्र में क्यों अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। लेकिन उनके मन में भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और बाबा नीम करोली के संदेशों को सिनेमा के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाने की एक मजबूत इच्छा थी। आखिरकार उन्होंने अपने दिल की बात सुनी और तमाम आर्थिक व सामाजिक जोखिमों को पार करते हुए अपनी इस महत्वाकांक्षी cinematic journey को पूरा किया। आज उनकी यह फिल्म जिस तरह से वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रही है, उससे यह साबित हो गया है कि उनका वह फैसला पूरी तरह सही था और पहाड़ों में हुए उस चमत्कारी संयोग ने सचमुच उनकी पूरी जिंदगी की तकदीर बदल दी।