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नया घर या ऑफिस खरीदने से पहले चुटकियों में जानें वहां का मोबाइल नेटवर्क और 5G स्पीड, TRAI का क्रांतिकारी DCR पोर्टल लाइव

नई दिल्ली। नया आशियाना या ऑफिस स्पेस चुनते समय अब तक लोग वेंटिलेशन, लोकेशन, पार्किंग और कनेक्टिविटी जैसी पारंपरिक सुविधाओं की पड़ताल करते थे, लेकिन अब भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने डिजिटल युग की सबसे बुनियादी जरूरत को लेकर बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। ट्राई ने आधिकारिक तौर पर डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग (Digital Connectivity Rating – DCR) प्लेटफॉर्म लाइव कर दिया है। इस आधुनिक पारदर्शी व्यवस्था के लागू होने के बाद आम नागरिक और कारोबारी किसी भी आवासीय या व्यावसायिक परिसर में शिफ्ट होने से पहले वहां मौजूद मोबाइल नेटवर्क, कॉल ड्रॉप की स्थिति, ब्रॉडबैंड उपलब्धता और 5G डेटा स्पीड की आधिकारिक रेटिंग देख सकेंगे।

दूरसंचार विभाग और ट्राई का यह कदम देश के रियल एस्टेट सेक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गेमचेंजर साबित होने वाला है। बड़े शहरों में बहुमंजिला इमारतों, बेसमेंट और घनी सोसायटियों के फ्लैट्स के अंदर कमजोर नेटवर्क कवरेज हमेशा से एक गंभीर समस्या रही है। लोग अक्सर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करके नया घर खरीदते हैं, लेकिन अंदर कदम रखते ही मोबाइल से सिग्नल गायब हो जाते हैं। वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड वर्क कल्चर के इस दौर में इनडोर नेटवर्क का अभाव मानसिक तनाव और काम में रुकावट का कारण बनता है। इसी गंभीर जमीनी समस्या के स्थायी समाधान के रूप में डीसीआर फ्रेमवर्क को पेश किया गया है।

डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग यानी डीसीआर एक वैज्ञानिक और मानकीकृत मूल्यांकन प्रणाली है। जिस तरह इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे एसी, फ्रिज या पंखों पर बिजली की बचत दर्शाने वाले बीईई (BEE) स्टार रेटिंग लेबल लगे होते हैं, ठीक उसी तर्ज पर अब रेजिडेंशियल और कमर्शियल इमारतों को उनकी इनडोर डिजिटल कनेक्टिविटी क्षमता के आधार पर 1 से लेकर 5 स्टार तक की रेटिंग प्रदान की जाएगी।

यह प्रणाली पूरी तरह से निष्पक्ष, डेटा-आधारित और स्वतंत्र तकनीकी जांच पर काम करती है। इसमें प्रमाणित तकनीकी एजेंसियां साइट पर जाकर आधुनिक उपकरणों से सिग्नल स्ट्रेंथ, लेटेंसी, डाउनलोड-अपलोड स्पीड, इनडोर ऑप्टिकल फाइबर केबलिंग (OFC) की स्थिति और अलग-अलग टेलीकॉम ऑपरेटर्स जैसे जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के नेटवर्क रिसेप्शन की जांच करती हैं। इस गहन तकनीकी परीक्षण के बाद भवन को एक समग्र स्कोर और स्टार रेटिंग जारी की जाती है, जिसे सार्वजनिक रूप से पोर्टल पर दर्ज किया जाता है।

अब तक प्रॉपर्टी डेवलपर्स अपनी परियोजनाओं में लग्जरी क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, जिम और लैंडस्केप गार्डन का खूब प्रचार करते थे, लेकिन इन-बिल्डिंग सॉल्यूशंस (IBS) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को नजरअंदाज कर दिया जाता था। ट्राई के इस नए नियम के बाद प्रॉपर्टी खरीदारों को यह अधिकार मिल गया है कि वे बुकिंग करने से पहले डेवलपर से इमारत की आधिकारिक डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग की मांग कर सकें।

बिल्डरों को अब निर्माण के शुरुआती ब्लूप्रिंट डिजाइन में ही टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा। इसमें रूफटॉप टावर लगाने की व्यवस्था, हर फ्लोर पर कॉमन टेलीकॉम डक्ट्स, ऑप्टिकल फाइबर वायर रूटिंग और बेसमेंट में बूस्टर एंटीना लगाने के लिए समर्पित जगह शामिल है। जिन प्रोजेक्ट्स की डीसीआर स्टार रेटिंग 4 या 5 होगी, उनकी मार्केट वैल्यू और रीसेल वैल्यू कमजोर रेटिंग वाले भवनों की तुलना में काफी ज्यादा आंकी जाएगी। खरीदार अब अंधकार में रहकर केवल दावों पर भरोसा नहीं करेंगे, बल्कि प्रमाणित सरकारी रेटिंग देखकर निवेश का फैसला लेंगे।

इस व्यवस्था का सर्वाधिक प्रत्यक्ष लाभ आम कामकाजी जनता, फ्रीलांसर्स, छात्रों और कॉर्पोरेट घरानों को मिलेगा। कोरोना महामारी के बाद से वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन क्लासेस और रिमोट बिजनेस ऑपरेशंस रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न अंग बन चुके हैं। ऐसे में अगर किसी अपार्टमेंट या को-वर्किंग स्पेस में डिजिटल सिग्नल कमजोर हैं, तो कामकाज ठप पड़ जाता है।

डीसीआर पोर्टल के माध्यम से कोई भी व्यक्ति पिनकोड, शहर, इलाके या संबंधित सोसाइटी के नाम से सीधे सर्च कर सकेगा कि वहां मोबाइल सिग्नल और ब्रॉडबैंड की क्या स्थिति है। किरायेदार भी लीज एग्रीमेंट साइन करने से पहले यह जांच सकेंगे कि संबंधित फ्लैट में जियो, एयरटेल या वीआई का सिग्नल बेडरूम या बालकनी में पूरा मिलता है या नहीं। कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए नया डाटा सेंटर या ब्रांच ऑफिस खोलने से पहले डिजिटल रेडिनेस का आकलन करना बेहद आसान और पारदर्शी हो जाएगा।

यह सुधार केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद या लखनऊ जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी तेजी से लागू हो रहा है। छोटे शहरों में बन रहे नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स, आईटी पार्क्स और कमर्शियल प्लाजा को भी अब इस नेटवर्क फ्रेमवर्क के दायरे में लाया जा रहा है। नेशनल ब्रॉडबैंड मिशन और भारत नेट के लक्ष्यों को गति देने के लिए यह जरूरी था कि लास्ट-माइल इनडोर कनेक्टिविटी को विश्वस्तरीय बनाया जाए।

लोकल लेवल पर प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और नगर निगम के नक्शा पास करने के नियमों के साथ भी भविष्य में इसे जोड़ा जा सकता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी नई बहुमंजिला इमारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना न बने। ट्राई का लक्ष्य देश के कोने-कोने में रहने वाले हर नागरिक को कॉल ड्रॉप की समस्या से मुक्ति दिलाना और हाई-स्पीड इंटरनेट की निर्बाध सुविधा उपलब्ध कराना है।

अगर आप आने वाले दिनों में कोई नया फ्लैट, दुकान, शोरूम या ऑफिस स्पेस खरीदने अथवा लंबे समय के लिए रेंट पर लेने की योजना बना रहे हैं, तो इन प्रमुख बिंदुओं को अपनी प्राथमिक जांच सूची में अवश्य शामिल करें:

  • बिल्डर अथवा ब्रोकर से संबंधित प्रोजेक्ट की प्रमाणित ट्राई डीसीआर (DCR) स्टार रेटिंग रिपोर्ट मांगें।

  • इमारत के अंदर सभी प्रमुख टेलीकॉम नेटवर्क ऑपरेटर्स के 4G और 5G इनडोर सिग्नल कवरेज का स्तर पोर्टल पर क्रॉस-वेरीफाई करें।

  • भवन के शाफ्ट और कॉमन यूटिलिटी डक्ट्स में न्यूट्रल शेयर्ड ऑप्टिकल फाइबर केबलिंग (FTTH) की उपलब्धता की पुष्टि करें।

  • लिफ्ट, क्लब हाउस, बेसमेंट पार्किंग और रूफटॉप जैसे कॉमन एरियाज में इन-बिल्डिंग सॉल्यूशंस (IBS) एंटीना इंस्टॉलेशन की जांच करें।

ट्राई का यह डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग पोर्टल न केवल उपभोक्ताओं को सशक्त और जागरूक बना रहा है, बल्कि भारतीय रियल एस्टेट उद्योग को भविष्य की 6G और स्मार्ट होम जरूरतों के लिए तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार भी कर रहा है।