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एअर इंडिया का को-पायलट उड़ान से ठीक पहले नशे में धुत मिला! ब्रीद एनालाइजर टेस्ट में फेल होने पर तुरंत किया गया ग्राउंड

हवा में हजारों फीट की ऊंचाई पर सफर कर रहे सैकड़ों यात्रियों की जान पूरी तरह से कॉकपिट में बैठे दो पायलटों के हाथ में होती है। ऐसे में अगर उड़ान भरने से ठीक पहले कोई पायलट नशे में धुत पाया जाए, तो यह किसी बड़े दुःस्वप्न से कम नहीं है। टाटा समूह के स्वामित्व वाली देश की प्रमुख एयरलाइन एअर इंडिया (Air India) से एक ऐसा ही बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। एयरलाइन का एक को-पायलट (फर्स्ट ऑफिसर) उड़ान ड्यूटी पर जाने से ठीक पहले अनिवार्य मेडिकल जांच यानी ब्रीद एनालाइजर (Breathalyzer – BA) टेस्ट में फेल हो गया। मशीन ने पुष्टि कर दी कि को-पायलट के शरीर में अल्कोहल की मात्रा मौजूद है। इस रिपोर्ट के सामने आते ही एयरलाइन प्रबंधन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एअर इंडिया ने तुरंत सख्त कदम उठाए और उस को-पायलट को विमान के कॉकपिट तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया।

विमानन नियमों के अनुसार, किसी भी कमर्शियल फ्लाइट के टेकऑफ से पहले सभी क्रू मेंबर्स, जिसमें कैप्टन, को-पायलट और एयर होस्टेस (केबिन क्रू) शामिल होते हैं, को एक अनिवार्य मेडिकल टेस्ट से गुजरना होता है। यह टेस्ट एयरपोर्ट के मेडिकल रूम में होता है। एअर इंडिया का यह को-पायलट जब अपनी निर्धारित उड़ान के लिए रिपोर्ट करने पहुंचा, तो रूटीन प्रक्रिया के तहत उसका ब्रीद एनालाइजर टेस्ट किया गया।

जैसे ही को-पायलट ने मशीन में सांस छोड़ी, रीडिंग में अल्कोहल की मौजूदगी का अलर्ट आ गया। नियमों के मुताबिक, किसी भी तरह के संदेह को दूर करने के लिए कुछ मिनटों के अंतराल पर दूसरा कन्फर्मेशन टेस्ट किया जाता है। जब दूसरी बार भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तो यह साफ हो गया कि को-पायलट ने ड्यूटी से पहले शराब या किसी अल्कोहल युक्त पदार्थ का सेवन किया है। इसके तुरंत बाद ड्यूटी मैनेजर को सूचित किया गया और उस उड़ान के लिए आनंद-फानन में स्टैंडबाय (रिजर्व) पायलट को बुलाया गया, ताकि यात्रियों की उड़ान में कोई बड़ी देरी न हो और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इस गंभीर लापरवाही के उजागर होते ही एअर इंडिया ने बिना कोई समय गंवाए कड़ा एक्शन लिया। एयरलाइन ने तत्काल प्रभाव से उस को-पायलट को रोस्टर से हटा दिया (Off-rostered) और उसे ग्राउंड कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि जब तक इस मामले की पूरी विभागीय और आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह को-पायलट किसी भी विमान को नहीं उड़ा सकेगा।

इसके साथ ही, एयरलाइन ने तुरंत नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को इस घटना की आधिकारिक सूचना दे दी है। डीजीसीए भारत में एविएशन सेक्टर का सर्वोच्च रेगुलेटर है और उड़ान सुरक्षा से जुड़े मामलों में उसके नियम बेहद सख्त हैं। डीजीसीए के ‘सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स’ (CAR) के तहत, अगर कोई पायलट पहली बार प्री-फ्लाइट ब्रीद एनालाइजर टेस्ट में पॉजिटिव (शराब के नशे में) पाया जाता है, तो उसका फ्लाइंग लाइसेंस सीधे 3 महीने के लिए निलंबित (Suspend) कर दिया जाता है। अगर यही गलती दूसरी बार होती है, तो लाइसेंस 3 साल के लिए सस्पेंड होता है। वहीं, अगर कोई पायलट तीसरी बार नशे में पाया जाए, तो उसका कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाता है और वह जीवन में कभी विमान नहीं उड़ा सकता।

टाटा ग्रुप (Tata Group) के हाथों में जाने के बाद से एअर इंडिया अपनी ब्रांड इमेज, सुरक्षा मानकों और यात्री सुविधाओं को लेकर बेहद संवेदनशील हो गई है। एयरलाइन प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा (Safety) और क्रू मेंबर्स के अनुशासन को लेकर उनकी ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ (Zero Tolerance Policy) है। इसका सीधा मतलब है कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

विमान उड़ाना एक अत्यधिक तकनीकी और मानसिक एकाग्रता वाला काम है। शराब का सेवन इंसान की निर्णय लेने की क्षमता (Decision-making), प्रतिक्रिया समय (Reaction time) और आंखों-हाथों के तालमेल (Hand-eye coordination) को बुरी तरह प्रभावित करता है। उड़ान के दौरान अगर मौसम खराब हो जाए या विमान में कोई तकनीकी खराबी आ जाए, तो पायलट को सेकंड के सौवें हिस्से में सही फैसले लेने होते हैं। ऐसे में नशे में धुत पायलट पूरी फ्लाइट और सैकड़ों जिंदगियों को मौत के मुंह में धकेल सकता है। यही कारण है कि एयरलाइन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त विभागीय जांच भी शुरू कर दी है, जिसमें नौकरी से निकाले जाने तक का प्रावधान शामिल है।

गूगल और बिंग पर अक्सर लोग सर्च करते हैं कि आखिर पायलटों का टेस्ट कैसे होता है? आपको बता दें कि ब्रीद एनालाइजर (BA) एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो सांस में अल्कोहल की मात्रा (Blood Alcohol Concentration) को मापता है। डीजीसीए के नियमों के अनुसार, भारत में ड्यूटी से 12 घंटे पहले तक किसी भी क्रू मेंबर के लिए शराब पीना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

यह नियम इतना सख्त है कि पायलटों और केबिन क्रू को उड़ान से पहले ऐसी खांसी की दवा (Cough Syrup), माउथवॉश या होम्योपैथिक दवाएं लेने से भी सख्त मना किया जाता है, जिनमें अल्कोहल का बेस होता है। यदि कोई क्रू मेंबर टेस्ट देने से इनकार करता है, टेस्ट बीच में छोड़कर भाग जाता है, या ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने के बाद टेस्ट कराने से बचता है, तो उसे भी टेस्ट में फेल (पॉजिटिव) ही माना जाता है और समान सजा दी जाती है। पोस्ट-फ्लाइट (उड़ान के बाद) भी रैंडम चेकिंग की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी ने हवा में या ड्यूटी के दौरान तो शराब का सेवन नहीं किया है।

यह घटना जहां एक तरफ एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति की घोर लापरवाही को दर्शाती है, वहीं दूसरी तरफ यह भी साबित करती है कि भारतीय विमानन क्षेत्र का सुरक्षा तंत्र (Safety Mechanism) मजबूती से काम कर रहा है। एयरपोर्ट पर उड़ान से ठीक पहले होने वाले इसी मेडिकल फिल्टर के कारण एक बड़ा संभावित हादसा टल गया। आधुनिक एविएशन इंडस्ट्री में इंसानी गलतियों (Human Errors) को पकड़ने के लिए कई लेयर के चेक और बैलेंस बनाए गए हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि नियम कितने भी कड़े क्यों न हों, वे अंततः आम जनता की सुरक्षित घर वापसी के लिए ही बनाए गए हैं।