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NSE IPO: लिस्टिंग से पहले Macquarie ने दिया ₹1,965 का बड़ा टारगेट; ‘The Dominator’ टैग के साथ समझें रणनीति

भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में गुरुवार, 24 सितंबर 2026 का कारोबारी सत्र एक ऐतिहासिक दिन बनने जा रहा है, जब देश का प्रमुख और सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) दलाल स्ट्रीट पर अपनी औपचारिक शुरुआत करने जा रहा है। साल 2026 के इस सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गम को लेकर शेयर बाजार के प्रतिभागियों और विश्लेषकों में जबरदस्त उत्सुकता है, भले ही अनौपचारिक ग्रे मार्केट में इस इश्यू को लेकर कोई असाधारण उत्साह नहीं देखा जा रहा हो। लंबी अवधि के फंडामेंटल आउटलुक को लेकर वैश्विक वित्तीय संस्थान बेहद सकारात्मक नजर आ रहे हैं, और इसी क्रम में लिस्टिंग से ठीक पहले ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी (Macquarie) ने एनएसई पर अपनी कवरेज रिपोर्ट जारी करते हुए इसे ‘The Dominator’ का तमगा दिया है और मजबूत वित्तीय रणनीति सुझाते हुए आउटपरफॉर्म रेटिंग दी है।

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी ने अपनी विस्तृत कवरेज रिपोर्ट में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को अपने सेक्टर का सबसे निर्विवाद और प्रभावी लीडर मानते हुए “The Dominator” का दर्जा दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि इक्विटी कैश, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) और डेट सेगमेंट में एनएसई की भारी बाजार हिस्सेदारी इसे एक ऐसा एकाधिकारवादी तंत्र बनाती है, जिसका सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू बचतों के वित्तीयकरण (Financialization of Savings) से एक्सचेंज को मिलेगा। मैक्वायरी ने स्टॉक पर आउटपरफॉर्म रेटिंग तय करते हुए ₹1,965 का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है, जो आईपीओ के ₹1,785 के ऊपरी प्राइस बैंड के मुकाबले लगभग 10.1 प्रतिशत की ठोस बढ़त को प्रदर्शित करता है। ब्रोकरेज ने रेखांकित किया कि एनएसई का मजबूत टेक्नोलॉजी स्टैक, अद्वितीय ट्रेडिंग लिक्विडिटी, इंडस्ट्री में सबसे आगे रहने वाला ऑपरेटिंग मार्जिन और मजबूत कैश फ्लो इसे लंबी अवधि के पोर्टफोलियो के लिए अनिवार्य शेयर बनाते हैं।

प्राथमिक बाजार के आंकड़े बताते हैं कि जहां संस्थागत निवेशक एक्सचेंज की दीर्घकालिक ताकत पर भरोसा जता रहे हैं, वहीं ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में लिस्टिंग के दिन सुबह बहुत आक्रामक तेजी दर्ज नहीं की गई। इन्वेस्टरगेन (InvestorGain) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार गुरुवार सुबह एनएसई के अनलिस्टेड शेयरों पर लगभग ₹40 प्रति शेयर का प्रीमियम देखा गया, जिसका अर्थ है कि शेयर ₹1,825 के आसपास लिस्ट हो सकता है, जो इसके हालिया जीएमपी स्तरों का निचला दायरा है। वहीं आईपीओ वॉच (IPO Watch) के ताजा अनुमानों के मुताबिक स्टॉक 2.5 प्रतिशत के मामूली लिस्टिंग गेन के साथ ₹1,830 के आसपास डेब्यू कर सकता है। बाजार जानकारों का कहना है कि 22,500 करोड़ रुपये से अधिक के विशालकाय आकार और 100 प्रतिशत ऑफर फॉर सेल होने के कारण लिस्टिंग के दिन अत्यधिक सट्टेबाजी सीमित रह सकती है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक आकर्षक आधार प्रदान करता है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का यह सार्वजनिक निर्गम कुल ₹22,561.57 करोड़ का था, जिसने इसे वर्ष 2026 का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बना दिया है। यह पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल (OFS) संरचना पर आधारित था, जिसके तहत एक्सचेंज ने कुल 12.64 करोड़ इक्विटी शेयर ऑफर किए थे और बिक्री से प्राप्त होने वाली समूची राशि सीधे बिकवाल शेयरधारकों को जाएगी। निर्गम के लिए ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर का प्राइस बैंड निर्धारित किया गया था और खुदरा निवेशकों के लिए लॉट साइज 8 शेयरों का रखा गया था। 17 सितंबर को बोली के लिए खुले इस आईपीओ को 21 सितंबर को बंद होने तक देश-विदेश के निवेशकों की ओर से कुल 5.71 गुना अभिदान मिला, जिसमें 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले कुल 50.58 करोड़ शेयरों के लिए वैध बोलियां प्राप्त हुईं और कुल बोली मूल्य ₹90,000 करोड़ के पार पहुंच गया।

इस विशाल निर्गम में मांग की सबसे मजबूत धुरी योग्य संस्थागत खरीदार (QIB) रहे, जिनका आरक्षित कोटा 12.68 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि गैर-संस्थागत निवेशकों (NII/HNI) की श्रेणी को 6.55 गुना और रिटेल व्यक्तिगत निवेशकों के हिस्से को 1.39 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। पब्लिक इश्यू खुलने से ठीक पहले एनएसई ने दिग्गज वैश्विक और घरेलू एंकर निवेशकों से ₹6,746 करोड़ की भारी-भरकम पूंजी जुटाकर अपने बुनियादी ढांचे पर संस्थागत भरोसे की मुहर लगा दी थी। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि लिस्टिंग के बाद अल्पावधि के उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय डेरिवेटिव्स और कैश वॉल्यूम की ग्रोथ सीधे तौर पर एनएसई के ऑपरेटिंग प्रॉफिट को बढ़ावा देगी, जिससे यह शेयर लंबे नजरिए वाले निवेशकों के लिए वेल्थ क्रिएटर साबित हो सकता है।