
जैसे-जैसे साल के आखिरी महीने नजदीक आ रहे हैं और मौसम में हल्की ठंडक घुलने लगी है, वैसे-वैसे देश के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को लेकर एक बेहद डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आने लगी है। सर्दियों के आधिकारिक आगमन से ठीक पहले देश के कई प्रमुख हिस्सों में एक ऐसा ‘आक्रामक खतरा’ दस्तक दे चुका है, जिसने वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और आम नागरिकों की नींद उड़ा दी है। इस खतरनाक पर्यावरणीय संकट के कारण आने वाले कुछ ही हफ्तों में विशेषकर दीपावली के पावन पर्व के आसपास हवा की गुणवत्ता इतनी ज्यादा खराब होने वाली है कि लोगों का सांस लेना तक दूभर हो सकता है। मौसम और प्रदूषण के जानकारों का यह मानना है कि यदि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो इस बार का त्योहारी सीजन खुशियों की जगह एक बड़े स्वास्थ्य आपातकाल में बदल सकता है। आइए इस गंभीर खतरे, इसके कारणों और आने वाले दिनों में देश की हवा पर पड़ने वाले घातक असर की पूरी और गहरी समीक्षा करते हैं।
सर्दी की आहट के साथ ही क्यों मंडराने लगता है यह आक्रामक खतरा?
हर साल जैसे ही मानसून विदा होता है और उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदलने लगता है, वैसे ही प्रदूषण के मोर्चे पर हालात बेकाबू होने शुरू हो जाते हैं। इसे केवल आम प्रदूषण नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह एक ऐसा ‘आक्रामक खतरा’ है जो हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों (PM 2.5 और PM 10), जहरीली गैसों, पराली के धुएं और मौसमी बदलाव का एक घातक मिश्रण होता है। ठंडी हवाओं की भारी प्रकृति के कारण जमीन के पास मौजूद ये जहरीले तत्व ऊपर नहीं उठ पाते और एक मोटी चादर के रूप में वायुमंडल में फंस जाते हैं। इस साल भी मौसम विभाग और वायु गुणवत्ता निगरानी एजेंसियों ने संकेत दे दिए हैं कि हवा की गति धीमी होने के कारण यह प्रदूषणकारी परत बहुत तेजी से अपनी जड़ें जमा रही है। यही वजह है कि सर्दी शुरू होने से पहले ही आसमान में धुंध और स्मॉग का असर साफ तौर पर महसूस किया जाने लगा है।
दिवाली और त्योहारी सीजन पर प्रदूषण का सबसे खतरनाक वार
भारत में दिवाली का त्योहार रोशनी, उमंग और आतिशबाजी का प्रतीक है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह पर्व पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बन चुका है। इस साल सर्दी की शुरुआत के साथ ही जिस तरह का आक्रामक खतरा पैदा हुआ है, उससे यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि दिवाली के आसपास स्थिति बेहद भयावह हो सकती है। त्योहारों के दौरान जलाए जाने वाले पटाखों से निकलने वाला धुआं, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन और पहले से ही प्रदूषित हवा मिलकर एक ऐसा ज़हरीला कॉकटेल तैयार करते हैं जो फेफड़ों को अंदर से झकझोर कर रख देता है। अस्पतालों में सांस के मरीजों, दमा (Asthma) के पीड़ितों और बुजुर्गों की संख्या में भारी उछाल दर्ज किया जाने लगा है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि लोगों ने अभी से सावधानी नहीं बरती और प्रशासन ने सख्त पाबंदियां नहीं लगाईं, तो दिवाली की रात कई इलाकों में दम घुटने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
प्रशासनिक तैयारियां और प्रदूषण से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदम
इस आसन्न खतरे की गंभीरता को भांपते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की पर्यावरण एजेंसियों ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। निर्माण कार्यों पर रोक, धूल नियंत्रण के उपायों, पुराने वाहनों पर नकेल कसने और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। हालांकि, कागजी नीतियों और ज़मीनी हकीकत के बीच का अंतर अक्सर इन उपायों को बेअसर साबित कर देता है। जब तक किसानों के पास पराली प्रबंधन के लिए व्यावहारिक और सस्ते विकल्प नहीं पहुंचेंगे और आम जनता इसके प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं होगी, तब तक इस आक्रामक खतरे से पूरी तरह से निपटना असंभव सा प्रतीत होता है। स्थानीय प्रशासन और नगर निगमों को युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत है ताकि आने वाले हफ्तों में हवा की गुणवत्ता को एक तय सीमा से ज्यादा गिरने से रोका जा सके।
आम नागरिक के रूप में हमारी सुरक्षा और स्वास्थ्य की प्राथमिकता
इस गंभीर परिस्थिति में केवल सरकारों और संस्थाओं पर निर्भर रहने से काम नहीं चलेगा, बल्कि एक जागरूक नागरिक के रूप में हमें भी अपनी और अपने परिवार की सेहत की रक्षा के लिए खुद आगे आना होगा। सुबह की सैर पर निकलते समय सावधानी बरतें, अत्यधिक प्रदूषण वाले दिनों में एन-95 मास्क का उपयोग करें, और अपने घर के आस-पास वायु शोधक पौधे लगाएं। बच्चों और बुजुर्गों को प्रदूषित हवा के सीधे संपर्क में आने से बचाना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि हम सब मिलकर इस खतरे की गंभीरता को समझेंगे और त्योहारों के दौरान थोड़े संयम का परिचय देंगे, तो इस जहरीले संकट के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आने वाला यह हफ्ता हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए एक बड़ी परीक्षा है, जिसमें हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी ही हमारा सबसे बड़ा कवच बनेगी।
girls globe