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मजबूती से दौड़ रही भारतीय इकोनॉमी: Fitch और S&P ने बढ़ाया देश की GDP ग्रोथ का अनुमान, लेकिन महंगाई पर बजाई खतरे की घंटी

नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और प्रमुख पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी रफ्तार और लचीलेपन (Resilience) का लोहा मनवा रही है। दुनिया की दो सबसे प्रतिष्ठित क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों—फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) और एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स (S&P Global Ratings)—ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर के अनुमानों में सकारात्मक संशोधन करते हुए अपने ताजा आंकड़े जारी किए हैं। दोनों वैश्विक एजेंसियों का मानना है कि घरेलू मांग की मजबूती, बुनियादी ढांचे पर केंद्र सरकार का आक्रामक पूंजीगत व्यय (Capex) और विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र में आई तेजी के दम पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

हालांकि, आर्थिक विकास दर के इस सुनहरे परिदृश्य के साथ-साथ दोनों एजेंसियों ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नीति निर्माताओं के लिए एक संवेदनशील पहलू पर गंभीर चेतावनी भी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, लगातार अनिश्चित मौसम, अल-नीनो/ला-नीना के असर और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों के कारण खाद्य महंगाई (Food Inflation) अभी भी एक बड़ा जोखिम बनी हुई है। यदि आवश्यक खाद्य वस्तुओं के दाम लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं, तो यह ग्रामीण मांग और आम उपभोक्ता की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को प्रभावित कर सकता है।

रेटिंग एजेंसियों द्वारा जारी ताजा समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, भारत के हालिया तिमाही प्रदर्शन और औद्योगिक उत्पादन (IIP) के मजबूत आंकड़ों ने विश्लेषकों को अपने पूर्व अनुमानों में ऊपर की ओर संशोधन करने के लिए प्रेरित किया है।

रेटिंग एजेंसी पिछला जीडीपी अनुमान संशोधित नया जीडीपी अनुमान प्रमुख सकारात्मक कारक
फिच रेटिंग्स (Fitch) 6.5% – 7.0% 7.2% – 7.4% सरकारी बुनियादी ढांचा निवेश, मजबूत कॉर्पोरेट बैलेंस शीट
एसएंडपी ग्लोबल (S&P) 6.8% 7.0% – 7.1% मजबूत घरेलू खपत, निजी निवेश (Private Capex) में सुधार

फिच ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि भारत की विकास दर अधिकांश विकासशील और विकसित बाजारों की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति में है। निर्माण क्षेत्र, रियल एस्टेट बूम और वित्तीय सेवाओं में आई तेजी ने जीडीपी को मजबूती दी है। वहीं, एसएंडपी ने उल्लेख किया है कि भारत का राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और वैश्विक मंदी के थपेड़ों के बावजूद देश का घरेलू सेवा निर्यात (Services Exports) रिकॉर्ड स्तर पर कायम है।

वैश्विक एजेंसियों ने अपनी विस्तृत समीक्षा में उन प्रमुख इंजनों को रेखांकित किया है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं:

  1. पूंजीगत व्यय (Public Capex Drive): केंद्र सरकार द्वारा बजट में रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्गों, बंदरगाहों और रक्षा उत्पादन पर किए जा रहे ऐतिहासिक आवंटन ने मल्टीप्लायर इफेक्ट (Multiplier Effect) पैदा किया है। इससे सीमेंट, स्टील और लॉजिस्टिक्स जैसे कोर सेक्टरों में अभूतपूर्व गतिविधियां देखी जा रही हैं।

  2. सशक्त बैंकिंग प्रणाली (Healthy Banking Sector): भारतीय बैंकों का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) एक दशक के निचले स्तर पर आ चुका है। बैलेंस शीट साफ होने से बैंक कॉर्पोरेट सेक्टर और रिटेल बॉरोअर्स को खुलकर कर्ज वितरित कर रहे हैं, जिससे क्रेडिट ग्रोथ 14-16% की दर से बढ़ रही है।

  3. पीएलआई (PLI) स्कीम्स और चीन+1 रणनीति: इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल और फार्मास्यूटिकल सेक्टर में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं (PLI) का परिणाम अब प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के रूप में धरातल पर नजर आ रहा है।

जहां एक ओर विकास के आंकड़े उत्साहजनक हैं, वहीं फिच और एसएंडपी ने खाद्य मुद्रास्फीति को ‘अदृश्य गतिरोध’ बताया है। सब्जियों, दालों, खाद्य तेलों और अनाजों की कीमतों में समय-समय पर आने वाले उछाल से हेडलाइन सीपीआई (CPI Inflation) समय-समय पर केंद्रीय बैंक के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है।

रेटिंग एजेंसियों का आकलन है कि जब तक खाद्य महंगाई पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ जाती और कोर इन्फ्लेशन में स्थिरता नहीं दिखती, तब तक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के लिए नीतिगत रेपो दरों (Repo Rates) में आक्रामक कटौती करना मुश्किल होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि आम उपभोक्ताओं के लिए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) में निकट भविष्य में तुरंत भारी राहत की संभावना सीमित रहेगी।

इसके बावजूद, भारतीय नीति निर्माताओं के लिए राहत की बात यह है कि देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) मौजूद है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपये के उतार-चढ़ाव को संभालने और किसी भी बाहरी वित्तीय झटके को अवशोषित करने में पूरी तरह सक्षम है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक भी इस बात से सहमत हैं कि भारत वैश्विक आर्थिक विकास में 16% से अधिक का योगदान देकर वैश्विक रिकवरी का मुख्य इंजन बना हुआ है।