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India Canada Relations: भारत-कनाडा के रिश्तों में घुलेगी मिठास? दिसंबर में पीएम मोदी की कनाडा यात्रा संभव, ऐतिहासिक ट्रेड डील पर टिकीं निगाहें

बीते कुछ वर्षों से राजनयिक तल्खी और कड़वाहट के दौर से गुजर रहे भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में एक बार फिर सकारात्मक बदलाव के मजबूत संकेत मिलने लगे हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठकों के इतर आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल दिसंबर में कनाडा का दौरा कर सकते हैं।

यह संभावित दौरा न केवल दोनों देशों के बीच हाई-कमीशनरों की बहाली और कूटनीतिक संवाद की पुनर्स्थापना का प्रतीक माना जा रहा है, बल्कि इसके जरिए दोनों देशों के बीच लंबित ऐतिहासिक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA – Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना जताई जा रही है। पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान उपजे गंभीर विवादों और आरोपों के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह पहली पूर्ण द्विपक्षीय शिखर वार्ता होगी, जिसे भू-राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से एक बड़ा टर्निंग पॉइंट देखा जा रहा है।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, “हम भारत के साथ अपनी व्यापार वार्ताओं में शानदार प्रगति कर रहे हैं। यह कई स्तरों पर एक असाधारण रूप से महत्वपूर्ण रिश्ता है—जन-जन के जुड़ाव (People-to-people ties), सुरक्षा और रक्षा सहयोग तथा व्यापार एवं आर्थिक मोर्चे पर। प्रधानमंत्री मोदी दिसंबर के आसपास कनाडा का दौरा करेंगे और मैं उनकी मेजबानी के लिए उत्सुक हूं।’

कार्नी प्रशासन द्वारा भारत के साथ संबंधों को सुधारने की इस आक्रामक पहल के पीछे उनकी आर्थिक विविधीकरण (Trade Diversification) नीति है। अमेरिका में बदलते व्यापारिक माहौल और टैरिफ नीतियों के बीच कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था की भारी अमेरिकी निर्भरता को कम करने के लिए भारत जैसे सबसे तेजी से बढ़ते बाजार के साथ व्यापारिक साझेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।

भारत और कनाडा के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA/CEPA) को लेकर बातचीत का इतिहास एक दशक से भी अधिक पुराना है। अगस्त 2023 में राजनीतिक विवादों के चलते इस वार्ता को बीच में ही रोक दिया गया था। हालांकि, 2025 में जी20 बैठकों के दौरान बनी सहमति के बाद मार्च 2026 में प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा के दौरान नए सिरे से टर्म्स ऑफ रेफरेंस तय किए गए।

हाल ही में भारतीय केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और उनके कनाडाई समकक्ष मनिंदर सिद्धू के बीच मुंबई में चौथे दौर की वार्ता संपन्न हुई है। दोनों देशों ने निर्णय लिया है कि वार्ताओं को ‘फास्ट-ट्रैक’ किया जाएगा और इसका 5वां दौर 5 अक्टूबर 2026 से शुरू होने जा रहा है।

इस समझौते के प्रमुख आर्थिक आयाम:

  • व्यापार का आकार दोगुना करना: वर्तमान में दोनों देशों के बीच वस्तु एवं सेवा व्यापार लगभग 11 से 15 अरब डॉलर के दायरे में है। समझौते के तहत 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर $70 बिलियन (लगभग ₹5.8 लाख करोड़) तक पहुंचाने का साझा लक्ष्य तय किया गया है।

  • प्राथमिक क्षेत्र: इस समझौते में डिजिटल ट्रेड, कृषि एवं खाद्य उत्पाद, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, केमिकल, टेक्सटाइल्स, क्लीन टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स (लिथियम, पोटाश) और सर्विसेज सेक्टर को शुल्क-मुक्त पहुंच दी जाएगी।

  • भारतीय पेशेवरों की मोबिलिटी: भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए वर्क वीजा व मूवमेंट के नियमों को सुगम बनाने पर सहमति बनने के आसार हैं।

कनाडा में लगभग 18 लाख भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं, जो वहां की कुल आबादी का करीब 4% से अधिक हैं। इसके अलावा 4 लाख के करीब भारतीय छात्र कनाडाई विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं। शिक्षा, वीजा और वाणिज्यिक उड़ानों के सामान्य होने से लाखों प्रवासी परिवारों को सीधी राहत मिलेगी।

राजनयिक रिश्तों के सामान्य होने के साथ-साथ दोनों देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) और कानूनी एजेंसियों के स्तर पर सुरक्षा सहयोग और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए नया संस्थागत ढांचा भी स्थापित किया है। भारत का रुख हमेशा से अपनी संप्रभुता, अलगाववादी तत्वों पर सख्त निगरानी और दूतावासों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट रहा है, जिस पर कनाडाई पक्ष ने कानून के दायरे में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया है।

यदि दिसंबर में पीएम मोदी की यह कनाडा यात्रा संपन्न होती है और बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता सील हो जाता है, तो यह भारतीय विदेश नीति की एक बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक जीत मानी जाएगी। इससे यह संदेश जाएगा कि मतभेदों के बावजूद भारत अपनी संप्रभु चिंताओं से समझौता किए बिना आर्थिक हितों को साधने में सक्षम है।

आगामी 90 दिनों की वार्ताएं दोनों देशों के आधुनिक इतिहास में एक नए और मजबूत अध्याय की नींव रखने जा रही हैं।