Wednesday , September 23 2026

Gold Silver Price Today: चांदी में 1% से ज्यादा का जोरदार उछाल, सोना रहा सुस्त; जानें बुलियन मार्केट में तेजी और उतार-चढ़ाव की बड़ी वजह

भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कीमती धातुओं के रुख में आज स्पष्ट अलगाव देखने को मिला है। एक तरफ जहां चांदी की कीमतों में 1% से ज्यादा की तेज बढ़त दर्ज की गई, वहीं सोने के भाव सीमित दायरे में सपाट बने रहे। वैश्विक और घरेलू स्तर पर अलग-अलग आर्थिक संकेतकों के असर के कारण दोनों संपत्तियों का व्यवहार अलग-अलग नजर आ रहा है।

घरेलू बाजार में चांदी का भाव मजबूत औद्योगिक मांग और वैश्विक शॉर्ट-कवरिंग के चलते जोरदार छलांग लगा चुका है, जबकि सोना नए आर्थिक आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर रुख को लेकर सतर्क कारोबार कर रहा है। निवेशकों और खरीदारों के लिए यह समझना जरूरी है कि बुलियन मार्केट में यह अस्थिरता किन व्यापक कारणों से पैदा हो रही है।

वायदा बाजार में चांदी का अनुबंध 1% से अधिक उछलकर मजबूत स्तरों पर पहुंच गया है, जिससे खुदरा बाजार में प्रति किलोग्राम चांदी की कीमतें नई मजबूती की ओर अग्रसर हैं। इसके विपरीत, 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के भाव अपने पिछले बंद स्तरों के आसपास बेहद संकीर्ण दायरे में ट्रेड कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स (COMEX) पर भी चांदी में खरीदारी का मजबूत समर्थन देखा गया है, जहां हाजिर चांदी ने ऊपरी प्रतिरोध स्तरों को छूने की कोशिश की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर इंडेक्स के उतार-चढ़ाव और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की हलचल का सीधा प्रभाव सोने की चाल को सीमित किए हुए है, जिसके चलते सोने में किसी बड़े ब्रेकआउट की जगह ठहराव की स्थिति बनी हुई है।

चांदी को न केवल एक सुरक्षित निवेश (Safe-Haven Asset) माना जाता है, बल्कि इसका आधा से अधिक उपभोग वैश्विक औद्योगिक विनिर्माण में होता है। चांदी में आई हालिया तेजी के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारक सक्रिय हैं:

  1. ग्रीन एनर्जी और सोलर सेक्टर की बढ़ती मांग: विश्व स्तर पर सोलर पीवी पैनल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी का भारी उपयोग हो रहा है। ग्रीन ट्रांजिशन से जुड़ी नई औद्योगिक परियोजनाओं के कारण चांदी की फिजिकल डिमांड लगातार मजबूत बनी हुई है।

  2. सप्लाई डेफिसिट (आपूर्ति संकट): प्रमुख उत्पादक देशों में माइनिंग उत्पादन खपत की तुलना में सीमित रहा है। लगातार तीसरे-चौथे साल बाजार में स्ट्रक्चरल सप्लाई डेफिसिट की रिपोर्टों ने सटोरियों और संस्थागत खरीदारों को आकर्षित किया है।

  3. गोल्ड-सिल्वर रेशियो में एडजस्टमेंट: सोने के मुकाबले चांदी ऐतिहासिक तौर पर लंबे समय से अंडरपरफॉर्म कर रही थी। जब भी यह अनुपात बहुत अधिक खिंच जाता है, तब चांदी में सोने की तुलना में तेजी से कैच-अप रैली देखने को मिलती है।

  4. घरेलू त्योहारी व शादी सीजन की अग्रिम खरीदारी: भारतीय बाजारों में आगामी शादियों और त्योहारी सीजन को देखते हुए आभूषण निर्माताओं और खुदरा कारोबारियों द्वारा समय से पहले स्टॉक जमा करने की होड़ ने भी कीमतों को सहारा दिया है।

चांदी की तुलना में सोने की चाल थमी हुई दिखने के पीछे वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की नीतियां और मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा जिम्मेदार हैं:

  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सतर्क रुख: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा महंगाई और रोजगार के आंकड़ों के आधार पर ब्याज दरों में कटौती की गति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ब्याज दरें लंबे समय तक स्थिर रहने की आशंका सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्ति की तेजी को रोकती है।

  • डॉलर इंडेक्स (DXY) का दबाव: जब अमेरिकी डॉलर इंडेक्स एक निश्चित दायरे में मजबूती बनाए रखता है, तो अन्य विदेशी मुद्राओं में सोने की खरीद महंगी हो जाती है, जिससे वैश्विक स्तर पर नई आक्रामक खरीदारी सीमित हो जाती है।

  • प्रॉफिट बुकिंग का दबाव: सोने ने हाल के महीनों में रिकॉर्ड स्तरों को छुआ है, जिसके चलते उच्च स्तरों पर संस्थागत निवेशक और ट्रेडर्स मुनाफावसूली (Profit Booking) करते नजर आते हैं, जिससे कीमतें ऊपर जाने के बजाय स्थिर हो जाती हैं।

सोने और चांदी के मौजूदा ट्रेंड का सीधा असर खुदरा ग्राहकों पर पड़ रहा है। सोने में स्थिरता उन खरीदारों के लिए राहत भरी खबर है जो आगामी शादियों या पारिवारिक आयोजनों के लिए गहनों की योजना बना रहे हैं, क्योंकि स्थिर भाव अचानक आने वाले भारी बजट उछाल से बचाते हैं।

वहीं चांदी में निवेश करने वालों के लिए यह समय सतर्कता भरा है। जो निवेशक सिल्वर ईटीएफ (Silver ETF) या फिजिकल कॉइन्स के जरिए लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, उन्हें औद्योगिक तेजी का लाभ मिल सकता है। हालांकि, तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि तेजी के बाद छोटी अवधि में करेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए एकमुश्त बड़ी खरीद के बजाय सिस्टमैटिक तरीके से डिप्स (गिरावट) पर खरीदारी की रणनीति अधिक सुरक्षित मानी जाती है।

कमोडिटी बाजार के जानकारों के मुताबिक, आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, यूएस बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों से तय होगी। यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों में नरमी का रुख स्पष्ट होता है, तो सोने में दोबारा खरीदारी लौट सकती है। दूसरी तरफ, वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई आंकड़े यदि मजबूत बने रहते हैं, तो चांदी की औद्योगिक मांग कीमतों को आगे भी सहारा देती रहेगी।

घरेलू निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे वायदा बाजार में लिवरेज ट्रेड्स के दौरान सख्त स्टॉप-लॉस का पालन करें और खुदरा आभूषण खरीदते समय हॉलमार्किंग (BIS Hallmark) और मेकिंग चार्जेस की तुलना अवश्य करें।