
दिनभर की धूल-मिट्टी, प्रदूषण, सूरज की हानिकारक पराबैंगनी किरणों और पसीने का सामना करने के बाद हमारी त्वचा को रात के समय सबसे ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। त्वचा विज्ञान (Dermatology) के अनुसार, रात के समय जब हम गहरी नींद में होते हैं, तब हमारी स्किन ‘रिपेयर और रिजनरेशन मोड’ में चली जाती है। इस दौरान त्वचा की नई कोशिकाएं बनती हैं और दिनभर हुई क्षति की भरपाई होती है। यही वजह है कि आज के दौर में ‘नाइट स्किन केयर रूटीन’ (Night Skincare Routine) को बेहद अहमियत दी जा रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार महंगे से महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स लगाने के बावजूद चेहरे पर मुंहासे, झुर्रियां या रूखापन नजर आने लगता है? इसका सबसे बड़ा कारण नाइट केयर के दौरान की जाने वाली बुनियादी गलतियां हैं, जो फायदे की जगह त्वचा को गहरा नुकसान पहुंचा देती हैं।
नाइट स्किन केयर की सबसे आम और विनाशकारी गलती है थकान के फेर में बिना मेकअप उतारे या केवल पानी से मुंह धोकर सो जाना। दिनभर चेहरे पर लगा फाउंडेशन, कंसीलर, कॉम्पैक्ट और वातावरण की धूल-मिट्टी आपस में मिलकर एक चिपचिपी परत बना लेते हैं। जब आप इसके साथ रातभर सोते हैं, तो चेहरे के रोमछिद्र (Skin Pores) पूरी तरह बंद (Clogged) हो जाते हैं। इसके चलते त्वचा में ऑक्सीजन का प्रवाह रुक जाता है, जिससे सुबह उठते ही चेहरे पर बड़े पिंपल्स, ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स उभर आते हैं। इसके अलावा, आंखों का मेकअप (मस्कारा या काजल) न हटाने से आंखों में संक्रमण और पलकों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है। डर्मेटोलॉजिस्ट्स हमेशा रात को ‘डबल क्लींजिंग’ (पहले माइसेलर वॉटर या ऑयल क्लींजर और फिर जेंटल फेसवॉश) की सलाह देते हैं।
कई लोगों को यह गलतफहमी होती है कि रात में चेहरे को जोर-जोर से स्क्रब करने से सारी डेड स्किन निकल जाएगी और चेहरा चमकने लगेगा। वास्तव में, रात के समय त्वचा काफी संवेदनशील होती है। हार्श फिजिकल स्क्रब या जरूरत से ज्यादा केमिकल एक्सफोलिएंट्स (जैसे सैलिसिलिक एसिड या ग्लाइकोलिक एसिड) का रोजाना इस्तेमाल करने से स्किन का प्राकृतिक सुरक्षा घेरा यानी ‘स्किन बैरियर’ टूट जाता है। इसके परिणामस्वरूप चेहरे पर लालिमा (Redness), तेज जलन, अत्यधिक सूखापन और प्री-मैच्योर एजिंग के लक्षण दिखने लगते हैं। एक्सफोलिएशन हफ्ते में सिर्फ 1 या 2 बार ही पर्याप्त माना जाता है, वह भी बेहद सौम्य तरीके से।
आजकल बाजार में रेटिनॉल (Retinol), विटामिन सी, हयालूरोनिक एसिड और नियासिनमाइड जैसे कई एक्टिव सीरम उपलब्ध हैं, लेकिन बिना जानकारी के इन्हें एक साथ चेहरे पर थोप लेना सबसे बड़ी भूल साबित हो सकता है। उदाहरण के लिए, रात में रेटिनॉल के साथ विटामिन सी या एएचए/बीएचए को मिलाना त्वचा के पीएच लेवल को बिगाड़ देता है और गंभीर केमिकल बर्न या एलर्जी का कारण बन सकता है। इसके अलावा, अगर आपकी त्वचा तैलीय (Oily) है और आप बहुत गाढ़ा या कॉमेडोजेनिक (Comedogenic) ऑयल-बेस्ड सीरम लगा रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर मुंहासों को दावत देगा। हमेशा अपने डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह पर अपनी त्वचा की जरूरत के अनुसार केवल एक या दो एक्टिव इनग्रेडिएंट्स ही चुनें।
अक्सर ऑयली स्किन वाले लोग यह सोचते हैं कि उन्हें रात में मॉइस्चराइजर की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनकी त्वचा पहले से ही तेल छोड़ती है। यह पूरी तरह से एक मिथक है। रात में जब कमरे में एसी या पंखा चलता है, तो त्वचा की नमी तेजी से उड़ने लगती है (Transepidermal Water Loss)। अगर आप सीरम लगाने के बाद उस पर अच्छा मॉइस्चराइजर नहीं लगाते, तो सीरम का असर हवा में उड़ जाता है और त्वचा अपनी सुरक्षा के लिए और ज्यादा सीबम (तेल) बनाने लगती है। इससे चेहरा और ज्यादा चिपचिपा और ब्रेकआउट-प्रोन हो जाता है। चाहे स्किन टाइप कोई भी हो, एक लाइटवेट, नॉन-कॉमेडोजेनिक नाइट क्रीम या जेल-बेस्ड मॉइस्चराइजर लगाना अनिवार्य है ताकि त्वचा रातभर हाइड्रेटेड रहे।
नाइट स्किन केयर सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि आप चेहरे पर क्या लगाते हैं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपका चेहरा रातभर किस चीज के संपर्क में रहता है। अगर आप हफ्ते में अपने तकिए का कवर (Pillow Cover) नहीं बदलते हैं, तो उस पर जमी पुरानी लार, बालों का तेल, डेड स्किन सेल्स और बैक्टीरिया सीधे आपके चेहरे पर ट्रांसफर होते रहते हैं। चाहे आप कितना भी महंगा सीरम लगा लें, गंदा तकिया चेहरे पर एक्ने पैदा कर ही देगा। इसके साथ ही, पेट के बल या करवट लेकर तकिए में मुंह दबाकर सोने से चेहरे की त्वचा पर दबाव पड़ता है, जिससे समय से पहले चेहरे पर स्लीप रिंकल्स (Sleep Wrinkles) और फाइन लाइन्स बनने लगती हैं। सिल्क या साटन के पिलो कवर का इस्तेमाल करना और पीठ के बल सोना त्वचा की सेहत के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
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