
अयोध्या। राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए चढ़ावे की कथित चोरी और गबन से जुड़े मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र यानी चार्जशीट दाखिल की जाएगी। मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) और पुलिस की निगरानी में आगे बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले की जांच को लेकर स्टेटस रिपोर्ट तलब कर चुका है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या बोली यूपी सरकार?
मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से जांच की प्रगति से अदालत को अवगत कराया गया। सरकार का रुख है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर विवेचना पूरी की जाएगी और उसके बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। यानी फिलहाल जांच के अंतिम नतीजे आने से पहले आरोपपत्र दाखिल करने के बजाय जांच प्रक्रिया को पूरा करने पर जोर है।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी इस मामले की जांच को लेकर गंभीरता दिखाई थी। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से जांच की स्थिति बताने वाली रिपोर्ट मांगी थी। बाद में अदालत ने SIT की जांच के दायरे से जुड़े सुझाव भी लेने की अनुमति दी थी और रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था।
25 जून को दर्ज हुई थी एफआईआर, आठ लोग नामजद
राम मंदिर चढ़ावा मामले में 25 जून 2026 को अयोध्या में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया। इसके बाद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की है।
जांच के दौरान मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती से जुड़े रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेज, बैंक लेनदेन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों की पड़ताल किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि चढ़ावे की रकम में कथित अनियमितता किस तरह हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
पुलिस की जांच में आरोपियों की कथित भूमिकाओं और उनसे संबंधित बरामदगी की भी पड़ताल की गई है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, जांच के दौरान करीब 79.85 लाख रुपये की बरामदगी की बात सामने आई है। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर या गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। अंतिम फैसला न्यायालय में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।
जांच एजेंसी ने मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, चढ़ावा गिनने से संबंधित रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों को भी खंगाला है। संबंधित कर्मचारियों और अन्य लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। इन्हीं साक्ष्यों को जांच के अंतिम निष्कर्ष के साथ चार्जशीट का हिस्सा बनाया जा सकता है।
22 सितंबर की समयसीमा पर भी नजर
मामले में 22 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, 25 जून को एफआईआर और गिरफ्तारी के बाद 90 दिन की अवधि 22 सितंबर को पूरी हो रही है। यदि लागू कानूनी प्रावधानों के तहत इस अवधि में चार्जशीट दाखिल नहीं होती है, तो आरोपी वैधानिक या डिफॉल्ट जमानत का दावा कर सकते हैं।
इसी वजह से पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। दूसरी ओर, जांच एजेंसी की ओर से विवेचना को अंतिम चरण में बताया जा रहा है और चार्जशीट में कथित घटना की पूरी कार्यप्रणाली, आरोपियों की भूमिका, बरामदगी तथा उपलब्ध साक्ष्यों का विवरण शामिल किए जाने की बात सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
राम मंदिर में चढ़ावे की रकम से कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद मामले की स्वतंत्र और निगरानी में जांच की मांग को लेकर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। शीर्ष अदालत ने जुलाई में उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र से संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जांच की स्थिति बताने को कहा था। बाद में अदालत ने SIT की जांच से जुड़े सुझाव लेने और उन्हें जांच टीम तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की।
अब इस मामले में जांच पूरी होने और चार्जशीट दाखिल किए जाने पर सबकी नजर है। चार्जशीट में सामने आने वाले साक्ष्य और आरोपों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।
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