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द्वापर युग से जुड़ा है फरीदाबाद का यह ऐतिहासिक राधा-कृष्ण मंदिर, जानिए परिक्रमा और दर्शन का खास महत्व

दिल्ली से सटे हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद की पहचान केवल आधुनिक गगनचुंबी इमारतों और कल-कारखानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस पावन धरा के तार सीधे द्वापर युग और भगवान श्रीकृष्ण की ब्रज भूमि से जुड़े हुए हैं। ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा का अभिन्न हिस्सा माने जाने वाले फरीदाबाद के बल्लभगढ़ स्थित प्राचीन दाऊजी मंदिर और ऐतिहासिक श्री राधा-कृष्ण मंदिर का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण और उनके बड़े भ्राता बलराम (दाऊजी) ने यहां गौचारण और विश्राम किया था। आज भी दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु इस दिव्य मंदिर में नतमस्तक होकर अपनी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

पौराणिक ग्रंथों और लोक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण और दाऊजी मथुरा और वृंदावन के वनों में गायों को चराने निकलते थे, तो ब्रज सीमा के अंतर्गत आने वाला यह संपूर्ण क्षेत्र उनकी बाल-लीलाओं की क्रीड़ास्थली हुआ करता था।

कहा जाता है कि एक समय भगवान श्रीकृष्ण और दाऊजी ने अपने सखा ग्वालों के साथ इसी स्थान पर स्थित सरोवर के किनारे विश्राम किया था और अपनी गौओं को जल पिलाया था। कालांतर में संतों और तपस्वियों ने इस भूमि पर वर्षों तक कठोर साधना की, जिससे यह क्षेत्र ऊर्जावान तीर्थ स्थल में परिवर्तित हो गया। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, बाद के कालखंड में बल्लभगढ़ रियासत के राजाओं ने इस दिव्य स्थल पर भव्य शिखरबंद मंदिर का निर्माण कराया और राधा-कृष्ण तथा दाऊजी महाराज की अलौकिक विग्रह मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा कराई।

सनातन संस्कृति में ब्रज क्षेत्र के देवालयों की परिक्रमा का फल सभी चार धामों की यात्रा के समान माना गया है। फरीदाबाद के इस प्राचीन मंदिर परिसर की परिक्रमा को लेकर श्रद्धालुओं के बीच अटूट आस्था है:

  • मानसिक शांति और पापों का शमन: मंदिर परिसर की 7 या 11 बार परिक्रमा करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के विकार दूर होते हैं और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

  • दाऊजी और राधा-कृष्ण की संयुक्त कृपा: यहां आने वाले भक्तों को राधा-कृष्ण के प्रेम स्वरूप के साथ-साथ बलराम जी के रक्षक स्वरूप के भी दर्शन प्राप्त होते हैं, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है।

  • विशेष अवसरों पर महा-आरती: जन्माष्टमी, राधाष्टमी, होली और अन्नकूट महोत्सव पर यहां विशेष पंचामृत अभिषेक और मंगला आरती का आयोजन होता है, जिसमें शामिल होने मात्र से जीवन के बड़े-बड़े संकट टल जाते हैं।

शहर के शोरगुल के बीच स्थित यह मंदिर प्राचीन राजस्थानी और ब्रज स्थापत्य कला का एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित राधा-कृष्ण और बलराम जी की मूर्तियां अत्यंत सजीव और मनमोहक हैं। मंदिर के गुंबदों पर की गई नक्काशी और प्राचीन पत्थर सदियों पुराना इतिहास बयां करते हैं।

मंदिर परिसर में कदम रखते ही भक्तों को एक अलौकिक शांति की अनुभूति होती है। बुजुर्ग श्रद्धालुओं का कहना है कि जो भक्त सच्चे मन से मंदिर के पवित्र जलकुंड और चरणामृत को ग्रहण करते हैं, उनके रोग-दोष शांत हो जाते हैं और संतान प्राप्ति व दांपत्य जीवन के क्लेशों से मुक्ति मिलती है।

यह ऐतिहासिक मंदिर फरीदाबाद के बल्लभगढ़ क्षेत्र में स्थित है, जहां पहुंचना बेहद आसान है:

  • मेट्रो मार्ग: दिल्ली मेट्रो की वायलेट लाइन के जरिए सीधे ‘राजा नाहर सिंह (बल्लभगढ़)’ मेट्रो स्टेशन पर उतरकर ऑटो या ई-रिक्शा से मंदिर पहुंचा जा सकता है।

  • सड़क और रेल मार्ग: राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (दिल्ली-मथुरा रोड) से यह स्थल बेहद नजदीक है। बल्लभगढ़ रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी मात्र 2 से 3 किलोमीटर है।

  • दर्शन का समय: मंदिर श्रद्धालुओं के लिए सुबह 5:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:30 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।

यदि आप भी ब्रज संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और आध्यात्मिक शांति के संगम का अनुभव करना चाहते हैं, तो फरीदाबाद के इस पावन राधा-कृष्ण मंदिर के दर्शन और परिक्रमा का पुण्य लाभ अवश्य उठाएं।