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डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का औचक निरीक्षण: लखनऊ के अस्पताल में बुजुर्ग महिला को देख पसीजा दिल

उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों को लेकर हमेशा अपनी सक्रियता और ताबड़तोड़ दौरों के लिए जाने जाने वाले राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (Brijesh Pathak) एक बार फिर अपने एक अनूठे और मानवीय अंदाज के चलते सुर्खियों में आ गए हैं। अक्सर अस्पतालों की कमियों को उजागर करने और लापरवाह डॉक्टरों व कर्मचारियों की क्लास लगाने वाले ब्रजेश पाठक का इस बार एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक रूप देखने को मिला है। लखनऊ के एक सरकारी अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान जब उनकी नजर एक बेसहारा और बीमार बुजुर्ग महिला पर पड़ी, तो उनका दिल पसीज गया। अस्पताल के गलियारे में लावारिस हालत में पड़ी और दर्द से कराह रही उस बुजुर्ग महिला को देखकर डिप्टी सीएम ने तुरंत अपने कदम रोके और अस्पताल के सभी प्रशासनिक अमले को अपने पास बुलाया। राजनीति और सत्ता के गलियारों से इतर जब कोई जनप्रतनिधि आम इंसान की तरह किसी गरीब की पीड़ा देखकर खुद को उससे जोड़ लेता है, तो वह दृश्य समाज के लिए एक मिसाल बन जाता है। इस घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि सत्ता के ऊंचे पदों पर बैठे लोगों में यदि संवेदनशीलता जीवित हो, तो सरकारी व्यवस्थाओं में सुधार लाना कितना आसान हो जाता है।

अस्पताल के उस वार्ड या गलियारे का माहौल उस वक्त पूरी तरह से बदल गया जब डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने वहां मौजूद डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ से उस बुजुर्ग महिला के इलाज को लेकर बेहद भावुक और कड़े निर्देश दिए। बुजुर्ग महिला के सिर पर हाथ फेरते और उसकी सुध लेते हुए उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा, “ई समझि लओ कि ई हमार अम्मा है, इनका इलाज सबसे पहले और बेहतरीन तरीके से होना चाहिए।” उनकी इस ठेठ आत्मीय भाषा और अपनी मां की तरह बुजुर्ग महिला की देखभाल करने के आदेश ने वहां मौजूद हर शख्स को अंदर तक झकझोर कर रख दिया। अक्सर सरकारी अस्पतालों में गरीब और असहाय मरीजों के साथ होने वाली उपेक्षा या देरी की शिकायतें आम बात होती हैं, लेकिन जब राज्य का स्वास्थ्य मंत्री खुद किसी मरीज को अपनी ‘अमा’ (मां) का दर्जा दे दे, तो अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों की लापरवाही की गुंजाइश अपने आप खत्म हो जाती है। उनके इन शब्दों ने न केवल उस बेसहारा महिला को एक नई उम्मीद दी, बल्कि वहां मौजूद अन्य मरीजों और तीमारदारों का भी सरकार और स्वास्थ्य प्रणाली पर भरोसा और अधिक मजबूत कर दिया।

बुजुर्ग महिला की दयनीय स्थिति को देखते हुए ब्रजेश पाठक ने तुरंत प्रभाव से अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों को तलब किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि इस महिला की जांच में किसी भी प्रकार की कोताही या कागजी औपचारिकता के नाम पर देरी नहीं होनी चाहिए। तुरंत व्हीलचेयर मंगवाकर महिला को सुरक्षित वार्ड में शिफ्ट किया गया और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज शुरू करवाया गया। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट चेतावनी दी कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले हर गरीब और असहाय मरीज को अपने परिवार के सदस्य की तरह ट्रीट किया जाना चाहिए, और यदि भविष्य में किसी भी गरीब मरीज के इलाज में लापरवाही बरती गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीधे तौर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अस्पताल के रैन बसेरों, वार्डों की साफ-सफाई और मरीजों को मिलने वाले खानपान व मुफ्त दवाओं की उपलब्धता का भी बारीकी से जायजा लिया। इस औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही स्वास्थ्य योजनाएं धरातल पर वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच रही हैं या नहीं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्रजेश पाठक की छवि एक ऐसे नेता की है जो एसी कमरों में बैठकर आदेश जारी करने के बजाय सीधे जमीनी स्तर पर उतरकर अस्पतालों, स्कूलों और सरकारी दफ्तरों का निरीक्षण करना पसंद करते हैं। उनके इस प्रकार के औचक दौरे अक्सर स्वास्थ्य विभाग के लापरवाह कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाते हैं। चाहे आधी रात का छापा हो या दिन के वक्त अचानक किसी जिला अस्पताल का दौरा, वे हमेशा आम जनता की समस्याओं को अपनी प्राथमिकता बनाते हैं। ‘ई हमार अम्मा है’ वाला उनका यह ताजा बयान सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है, और लोग उनकी इस संवेदनशीलता और जनसेवा के जज्बे की जमकर तारीफ कर रहे हैं। राजनेताओं से अक्सर जनता की दूरी की शिकायतें रहती हैं, लेकिन जब कोई मंत्री किसी गरीब बुजुर्ग महिला को अपनी मां का दर्जा देकर उसकी देखरेख की व्यक्तिगत जिम्मेदारी उठाता है, तो वह लोकतंत्र में जनता के विश्वास को और अधिक प्रगाढ़ करता है।

लखनऊ के अस्पताल में घटी यह घटना महज एक प्रशासनिक निरीक्षण नहीं थी, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं का एक ऐसा जीवंत उदाहरण थी जो यह सिखाती है कि पद और रुतबे से ऊपर उठकर इंसानियत सबसे पहले आती है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा बुजुर्ग महिला को अपनी मां बताकर उसका हालचाल लेना और अधिकारियों को सख्त निर्देश देना यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में अब सुधार के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस प्रकार की घटनाएं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों और अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेंगी ताकि कोई भी बेसहारा मरीज इलाज के अभाव में दम न तोड़े। जनता के बीच जाकर उनकी पीड़ा को महसूस करना और उसका तुरंत समाधान निकालना ही एक सच्चे और जनप्रिय नेता की सबसे बड़ी पहचान होती है, और ब्रजेश पाठक ने इस घटना के जरिए एक बार फिर से लोगों के दिलों में अपनी एक विशेष जगह बना ली है।