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Semicon 2.0 से पहले ग्लोबल टेक दिग्गजों संग PM मोदी की हाई-लेवल बैठक: कहा- सेमीकंडक्टर के नए चरण में करें निवेश, भारत में है ऐतिहासिक अवसर

देश को वैश्विक चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के संकल्प के साथ भारत सेमीकंडक्टर मिशन के अगले चरण में कदम रख रहा है। नई दिल्ली के ‘यशोभूमि’ में तीन दिवसीय भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ (SEMICON India 2026) के औपचारिक उद्घाटन से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की अग्रणी सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) के साथ एक विशेष गोलमेज बैठक (Roundtable Meeting) की। इस उच्चस्तरीय संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने वैश्विक दिग्गजों को भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के नए चरण ‘सेमीकॉन 2.0’ (Semicon 2.0 / ISM 2.0) में सक्रिय रूप से भाग लेने और भारी निवेश करने का खुला न्योता दिया।

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर का सफर अब बुनियादी तैयारियों से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर विस्तार (Scale) और अवसरों के दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने वैश्विक टेक लीडर्स से कहा कि भारत में मजबूत बुनियादी ढांचा, कुशल युवा प्रतिभा का विशाल भंडार और नवाचार के प्रति अटूट प्रतिबद्धता मौजूद है। इन क्षमताओं को वैश्विक उद्योग के दशकों पुराने अनुभव के साथ जोड़कर भारत को दुनिया की सबसे विश्वसनीय सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का केंद्र बनाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री के साथ इस गोलमेज बैठक में दुनिया के सबसे बड़े सेमीकंडक्टर कंसोर्टियम SEMI के नेतृत्व के अलावा वैश्विक दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron), इंटेल (Intel), एएमडी (AMD), एएसएमएल (ASML), टोक्यो इलेक्ट्रॉन (Tokyo Electron), एप्लाइड मटीरियल्स (Applied Materials), इनफिनियन (Infineon), लैम रिसर्च (Lam Research), फॉक्सकॉन (Foxconn), रैपिडस (Rapidus), मर्क (Merck), फुजीफिल्म (Fujifilm) और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) जैसी दिग्गज कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान सभी कंपनियों के प्रमुखों ने भारत में पहले चरण के तहत स्थापित हो रही फैब और ओएसएटी (OSAT/ATMP) इकाइयों की प्रगति की सराहना की। उल्लेखनीय है कि गुजरात के साणंद और धोलेरा के साथ-साथ असम के मोरीगांव में स्थापित हो रहे सेमीकंडक्टर प्लांट्स पहले से ही तेजी से आकार ले रहे हैं। सीईओज ने भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (ISM 2.0) के विजन और सरकार द्वारा नीतिगत स्थिरता प्रदान करने के प्रयासों पर पूरा भरोसा जताया।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का दायरा केवल चिप्स की असेंबलिंग और टेस्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार पूरी सप्लाई चेन को भारत में ही स्थापित करना चाहती है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत ₹1.27 लाख करोड़ के पैकेज के साथ ‘सेमीकॉन 2.0’ का मुख्य जोर छह बुनियादी क्षेत्रों पर है:

  • एडवांस्ड फैब्रिकेशन और फाउंड्री: उच्च-स्तरीय सिलिकॉन वेफर फैब्स की स्थापना।

  • मशीनें और विशिष्ट कच्चा माल (Equipment & Chemicals): चिप निर्माण में लगने वाले केमिकल्स, गैसें और टूल्स।

  • एडवांस्ड पैकेजिंग और परीक्षण: 3D पैकेजिंग और सिस्टम-इन-पैकेज जैसी आधुनिक तकनीकें।

  • चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा (IP Core): भारत के घरेलू डिजाइन स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना।

  • उभरती हुई तकनीकें: सिलिकॉन फोटोनिक्स, पावर सेमीकंडक्टर्स और क्वांटम कंप्यूटिंग।

  • कुशल कार्यबल विकास (Skilling): लाखों युवाओं को चिप मैन्युफैक्चरिंग का विशेष प्रशिक्षण।

पीएम मोदी ने कहा कि आधुनिक दुनिया में तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए भारत का लक्ष्य केवल आज की तकनीकों का अनुसरण करना नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों में ‘शुरुआती वैश्विक लीडर’ (Early Leader) बनना है।

तकनीकी प्रगति की रीढ़ कुशल मानव संसाधन होता है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य का उल्लेख किया जिसके तहत भारत में 1 करोड़ लोगों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक डिजिटल स्किल्स में प्रशिक्षित किया जाना है। उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योगपतियों से अपील की कि वे भारत के शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर संयुक्त पाठ्यक्रम और रिसर्च लैब स्थापित करें।

पीएम ने कहा कि जब भारत में युवाओं को चिप डिजाइनिंग और फैब्रिकेशन का विश्वस्तरीय प्रशिक्षण मिलेगा, तो यह प्रतिभा न केवल भारत के घरेलू उद्योगों को संबल देगी, बल्कि आने वाले दशकों में दुनिया भर में सेमीकंडक्टर इंजीनियरों की कमी को भी पूरा करेगी।

विदेशी और घरेलू निवेशकों को आश्वस्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया कि भारत सरकार सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए एक पूर्वानुमानित (Predictable), पारदर्शी और प्रतिक्रियाशील (Responsive) नीतिगत माहौल बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने उद्योग जगत के लीडर्स से सीधे प्रशासनिक सुधारों और नीतियों को और अधिक सुगम बनाने के लिए सुझाव मांगे और भरोसा दिया कि सरकार उनके इनपुट्स को आगामी नीति-निर्माण में शामिल करेगी।

वर्तमान में भारत अपनी जरूरत की 90% से अधिक चिप्स का आयात करता है, जिस पर हर साल लगभग 30 अरब डॉलर खर्च होते हैं। वर्ष 2030 तक घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप बाजार के 200 अरब डॉलर के पार पहुंचने का अनुमान है। इस विशाल बाजार की मांग, सरकारी सब्सिडी और रणनीतिक सुरक्षा को देखते हुए वैश्विक टेक दिग्गजों के लिए भारत में अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने का यह सबसे उपयुक्त समय है।